अब तो हँसने में भी

28 फरवरी 2020   |  अनिल मिश्रा प्रहरी   (282 बार पढ़ा जा चुका है)

अब तो हँसने में भी कोई गम छलक जाता है

देखते हैं यह दर्द कहाँ तलक जाता है।


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