तारीख़

12 अप्रैल 2020   |  pradeep   (338 बार पढ़ा जा चुका है)

ना तख़्त रहेंगे ना ताज़ रहेंगे,

ना करोना के नामोनिशान रहेंगे.

तारीख़ में कुछ नाम दर्ज़ रहेंगे,

मना रहे थे जश्न महामारी में.

मेहमाननवाज़ी भी हुई ज़ोरो से,

बदली हुकूमत भी खूब शोरो से.

धमकियाँ भी खाई खूब शेरों ने,

मज़हबी दहशत भी फैलाई लोगो ने.

बजा थाली, जला दीया बाती,

मनाई सालगिरह भी सियासतदानों ने.

खड़ा था पूरा अवाम खामोशी से,

देख रहा था तबाही बेबस आँखों से.(आलिम)


अगला लेख: आशिकी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
23 अप्रैल 2020
29 मार्च 2020
29 मार्च 2020
05 अप्रैल 2020
गो
29 मार्च 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x