आशिकी

23 अप्रैल 2020   |  pradeep   (343 बार पढ़ा जा चुका है)

इस बात पे खुश है कि हुई तारीफ़ हमारी,

नहीं दुःख कितने मरे इस तारीफ़ की खातिर.

ख़ूबसूरत हो फिर भी तो तुम्ही हो कातिल ,

बेबस है हम यही तो है आशिकी हमारी. (आलिम)

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