"ज़िंदगी"

03 मई 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (314 बार पढ़ा जा चुका है)

"ज़िंदगी"

🐾🐾🐾🐾🐾🐾🐾

ज़िंदगी की अधुरी किताब,

अश्कों की अज़िबोगरीब दॉस्ता है!

🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵

मानो न मानो दोस्त,

ये मुकम्मल बेज़ुवाँ है!!

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

उल्फ़त का यह है जनाजा,

बेवफ़ाई इसका इन्तिहॉ है!

🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄

सिद्दतों का असर यक़िनन,

फ़रिस्तों पे हीं मेहरवॉ है!!

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

खुदगर्ज- जाहील इन्सान पे,

होती नहीं कुदरत मेहरवॉ है!!!

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

शातीर मिज़ाज का मालिक,

दोज़ख में जगहॉ है पाता!

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

ख़न्जर किया पार कलेजे के,

मज़हब का नाम है जब आता!!

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

गरीबों का हक-हकूक़ खा-पचा,

अमीरजादा है वह कहलाता!

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱

सिकन्दर से अकबर की सफ़र,

वह तय नहीं कर है पाता!!

🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳

सितारों की बात वह करता,

धरती को नाप नहीं पाता!

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

हज-तीर्थ-किताबों में वह,

मालीक को है बिठाता!!

🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾

खुद की नब्ज़-दिमाग़ का,

मुआयना नहीं वह कर पाता!

कवि शायर बन कर

सहज नेह में रम जाता!!

जिंदगी ओ' मौत का असर-

हो नहीं पाता!!!

🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️🕸️

🙏डॉ. कवि कुमार निर्मल🙏

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