दोहा गीतिका

30 जून 2020   |  महातम मिश्रा   (286 बार पढ़ा जा चुका है)


"दोहा गीतिका"


मुट्ठी भर चावल सखी, कर दे जाकर दान

गंगा घाट प्रयाग में, कर ले पावन स्नान

सुमन भाव पुष्पित करो, माँ गंगा के तीर

संगम की डुबकी मिले, मिलते संत सुजान।।


पंडित पंडा हर घड़ी, रहते हैं तैयार

हरिकीर्तन हर पल श्रवण, हरि चर्चा चित ध्यान।।


कष्ट अनेकों भूलकर, पहुँचें भक्त अपार

बैसाखी की क्या कहें, बुढ़ऊ जस हनुमान।।


कहीं काँवरी में पिता, कहीं पीठ पर लाल

दिख जाते हैं सुलभ ही, रिश्ते बहुत महान।।


सुबह गंग जयघोष प्रिय, शाम आरती थाल

जगमग होती रात है, दिन डुबकी परिधान।।


गौतम मन मंशा खिली, अति सुंदर माँ धाम

गंगा यमुना सरस्वती, दुर्लभ मातु मिलान।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: दोहा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 जुलाई 2020
दो
तेरे बहिष्कार का आगाज़ भारत की जनता व सरकार दोनों ने कर दिया है रे पापी चीन, अब तेरा क्या होगा कालिया.......धाँय धाँय धाँय......."दोहा" उतर गया तू नजर से, औने बौने चीन।फेंक दिया भारत तुझे, जैसे खाली टीन।।नजर नहीं तेरी सही, घटिया तेरा माल।सुन ले ड्रेगन कान से, बिगड़ी तेरी चाल।।सुन पाक बिलबिला रहा, अब
07 जुलाई 2020
07 जुलाई 2020
मु
"मुक्तकसुनते रहिये गीत गायकी अपने अपने घर में।धोते रहिए हाथ हमेशा साबुन अपने घर में।आना जाना छोड़ कहीं भी धीरज के संग रहिए-पानी गरम गला तर रखिए हँसिए अपने घर में।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
07 जुलाई 2020
30 जून 2020
हा
"हाचड़" (फुरसतिया मनोरंजन)कौवा अपनी राग अलाप रहा था और कोयल अपनी। मजे की बात, दोनों के श्रोता आँख मूँदकर आत्मविभोर हो रहे थे।अंधी दौड़ थी फिर भी लोग जी जान लगाकर दौड़ रहे थे। न ठंड की चिंता थी न महंगाई के मार की, न राष्ट्र हित की और न राष्ट्र विकास की। अगर कुछ था तो बस नाम कमाने की ललक और बड़ी कुर्सी की
30 जून 2020
03 जुलाई 2020
मु
मुक्तक जी करता है जी भर नाचूँ, जीवन में झनकार लिए।सारे गुण की भरी गागरी, हर पन का फनकार लिए।सभी वाद्य बजने को आतुर, आए कोई वादक तो-शहनाई वीणा औ डमरू, सुरभित स्वर संसार लिए।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुर
03 जुलाई 2020
07 जुलाई 2020
गी
"गीतिका" नदियों में वो धार कहाँ से लाऊँराधा जैसा प्यार कहाँ से लाऊँकैसे कैसे मिलती मन की मंजिलआँगन में परिवार कहाँ से लाऊँ।।सबका घर है मंदिर कहते सारेमंदिर में करतार कहाँ से लाऊँ।।छूना है आकाश सभी को पल मेंचेतक सी रफ्तार कहाँ से लाऊँ।।सपने सुंदर आँखों में आ जातेसचमुच का दीदार कहाँ से लाऊँ।।संकेतों क
07 जुलाई 2020
03 जुलाई 2020
दो
"दोहा गीतिका"री बसंत क्यों आ गया लेकर रंग गुलालकैसे खेलूँ फाग रस, बुरा शहर का हालचिता जले बाजार में, धुआँ उड़ा आकाशगाँव घरों की क्या कहें, राजनगर पैमाल।।सड़क घेर बैठा हुआ, लपट मदारी एकमजा ले रही भीड़ है, फुला फुला कर गाल।।कहती है अधिकार से, लड़कर लूँगी राजगलत सही कुछ भी कहो, मैं हूँ मालामाल।। सत्याग्रह
03 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
दो
07 जुलाई 2020
मु
03 जुलाई 2020
कु
07 जुलाई 2020
कु
03 जुलाई 2020
कु
07 जुलाई 2020
गी
07 जुलाई 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x