अलविदा

09 जुलाई 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (303 बार पढ़ा जा चुका है)

अलविदा

💦 💦💦 💦 💦💦 💦

दर्द तेरा सारा, काश मैं पी पाता!

अश्कों को तेरे पोछ मैं जी पाता!!

ताजिंदगी निभाने का वायदा किया है,

जहाँ की सारी खुशियाँ तुझे मैं दे पाता!

तेरी हर चाहतों पे दिल कुरवाँ हो जाता!!

🐾 🐾🐾 🐾 🐾 🐾🐾 🐾🐾

शराबोर है मेरा मन!

छायें हैं मेध सधन!!

तिश्नगी बेहिसाब- बेताब हूँ,

शराबोर हो पिधल जाता!

बरस रहा नूरानी हुश्न,

भींग बह तो जाता!!

💐💐💐💐💐💐💐

मौत को सभी कज़ा--

कह ख़ौफ़ करते हैं!

सजा तअन्नुस की--

दीवाने झेल मर जाते हैं!!

कहर बेरहम कुदरत की,

जश्न मना थकती नहीं।

क़ायनात की सफर--

कभी पूरा होती नहीं।।

मालिक के तेवर देख भी

गुमराह हो नेह बिसराता है।

अफ़रात है आशियाने में मगर--

खालि हाथ भी बँध जाता है।।

🌵डॉ. कवि कुमार निर्मल🌵

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