अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए

14 जुलाई 2020   |  Arun choudhary(sir)   (301 बार पढ़ा जा चुका है)

अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए,

जल्दी से समेट ले ,कहीं देर ना हो जाए।

पिरों दे माला में इन्हे,कहीं भटक ना जाए।

वक़्त बहुत है कम,कहीं ये फिसल ना जाए।

इबारत का रास्ता है कठिन,कहीं अटक ना जाए।

मंजिल पे पहुंचा जल्दी इन्हें,कहीं देर ना हो जाए। अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए।

अगला लेख: विश्वास की चादर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 जुलाई 2020
इंदौर के पास एक कस्बा राऊ नगर, रंगवासा रोड पे स्थित उमिया पैलेस बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर रोजाना की तरह महिलाओं,बच्चों और पुरुषों की हलचल।अचानक से राऊ नगर के जननायक भाई राजेश मंडले का आगमन।दोपहर के करीब साढ़े बारह बजे थे।संजय सर,अरुण
16 जुलाई 2020
09 जुलाई 2020
तीन मंजिला हवेली को मैं आते ही चंद मिनटों में नाप देता था।पीछे गली में झांक कर उधर रहने वालों को भी बता देता कि हम आ गए है। नाना जी काफी पहले ही
09 जुलाई 2020
28 जुलाई 2020
सभ्यता की विकास यात्रा जारी है अनवरत अनवरत, पृथ्वी के जन्म से चल रहा है परिवर्तन अब तक।कई प्रजातियां पौधों की और जीवों की बदल रही अविरत,बड़े बड़े पेड़ों में और जानवरों में हो रह
28 जुलाई 2020
15 जुलाई 2020
वि
विश्वास की चादर फैला, उस पे ईमानदारी को बैठा, इतिहास बदल दिया उसने भारत का है।वर्षों से विश्वभर में जो स्थिति हमारी थी,आज पूरे विश्व में वो साख देश ने कमाई है।स्वच्छता का संदेश फैला जनमानस में,गांव गांव गली गली आज साफ सुथरी है।भ्रष्टाचा
15 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x