अल्फ़ाज़

17 जुलाई 2020   |  Arun choudhary(sir)   (297 बार पढ़ा जा चुका है)

रोज इंतेज़ार करते है,

तुम्हारे इन अलफाजों का,

शोर मच जाता है,

इस खामोशी के आलम में,

जब आगाज़ होता है,

इन अलफाजों का।

अगला लेख: विश्वास की चादर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
14 जुलाई 2020
अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए, जल्दी से समेट ले ,कहीं देर ना हो जाए।पिरों दे माला में इन्हे,कहीं भटक ना जाए।वक़्त बहुत है कम,कहीं ये फिसल ना जाए।इबारत का रास्ता है कठिन,कहीं अटक ना जाए।मंजिल पे पहुंचा जल्दी इन्हें,कहीं देर ना हो जाए। अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए।
14 जुलाई 2020
24 जुलाई 2020
या
कुछ मीठी,कुछ खट्टी,कुछ कड़वी,कुछ रंगीन,कुछ बचपन की,कुछ जवानी की,कुछ संगीन।ये ही तो हैं वो यादें,जो भूले ना भुलायी जा सकी;कुछ यादें पूरी याद रही,याद रह गयी अधूरी बाकी।कुछ यादें तड़पाती है,कुछ प्रफुल्लित कर जाती है;यादें तो यादें हैं ,जो
24 जुलाई 2020
21 जुलाई 2020
हमारे शहर में हुआ मंत्री जी का आगमन,
21 जुलाई 2020
16 जुलाई 2020
इंदौर के पास एक कस्बा राऊ नगर, रंगवासा रोड पे स्थित उमिया पैलेस बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर रोजाना की तरह महिलाओं,बच्चों और पुरुषों की हलचल।अचानक से राऊ नगर के जननायक भाई राजेश मंडले का आगमन।दोपहर के करीब साढ़े बारह बजे थे।संजय सर,अरुण
16 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x