खुशियां

17 जुलाई 2020   |  Arun choudhary(sir)   (283 बार पढ़ा जा चुका है)

खुशियां खरीदना चाहता है पैसों से ,

लेकिन जानता नहीं कि

खुशियां टिकती नहीं,

जो खरीदी जाए पैसों से।

खुशियां वफ़ा नहीं होती है,

पैसों की ।

वह तो मुराद होती है,

प्रेम की।

गर खुशियों की दुकान जो होती,

तो शायद खुशियां उधार न मिलती।

फिर खुशियां हर किसी के नसीब में ना होती।

प्रभु की माया अजीब है,

खुशियां हरेक के नसीब है।

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