सावन

23 जुलाई 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (308 बार पढ़ा जा चुका है)

सावन

सावन


लद्द-फद्द मदहोश हो-

छा गये दिलोदिमाग पर

खुशियों का सावन

लिख दिया बुझते वज़ूद पर

लुट-लुटा के मुकम्मल

जब होश आ झकझोरा

नासाज़ हुए बेहिसाब

कज़ा की बरसात झेलकर


डॉ. कवि कुमार निर्मल

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