बरिश की बूंदे

13 अगस्त 2020   |  Vicky   (455 बार पढ़ा जा चुका है)

बरिश की बूंदे

बारिश की बूंदे जब भी पड़ती है

मुझे मेरा यौवन याद आता है

कभी श्रृंगार की हुईं नव वधू की तरह दिखती है

कभी मानो अपने मै समा जाने को तरसती है

जब भी आती है साथ अपने प्यार लाती है

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