चंद अलफ़ाज़ दिल के

12 जनवरी 2021   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (428 बार पढ़ा जा चुका है)

चंद अलफ़ाज़ दिल के

■□■चंद अल्फाज़ दिल के■□■


आपकी पारखी आँखों ने,
पलकों पे जब से बिठा के रखा है।
चुपके से उतर-टगर दिल की,
धड़कनों में समा
तूफ़ान मचाए रखा है।।
★☆★☆★☆★☆★☆★
खुदकी ख़ुशबुओं से मदहोश,
प्यार का ख़्वाब देखा है शायद
उल्फ़त के काँटों की चुभन,
दिल को नासाज़ किये रखा है।
हुश्न तो होता है लाज़वाब सदा,
सोहबत हुई- ईमान चकनाचूर किये रखा है।।
★☆★☆★☆★□■□★☆★☆★☆★
मोहब्बत ने पागल बना के रखा है!
दिल चुरा के कहते हो चाहतें मन में रखा है
इल्तिज़ा थी शौहरत छोड़ तुझे पाने की,
अब दिल को मेरे फुसलाये क्यूँ? रखा है!!
★☆★★☆★☆★★★☆★☆★☆★
तलाशता रहा हर शहर- हर डगर,
चिलमन के पीछे ख़ुद को बुत बना रखा है।।
दीदार की चाहत संजोए,
हर ख़ुशी का ख्याल,
ज़ेहन में तरोताज़ा रखा है।।
★☆★☆★☆★☆★☆★
धड़कनों की तफ़्तार देख,
दिल गुस्ताख़ी पे उतर आया है।
क्या? कहूँ अब ओ यारब बता,
साँसों के तार थामे रखा हैं।।
★☆★☆★☆★☆★☆★


डॉ. कवि कुमार निर्मल_✒️


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