रहनुमाँ

20 मार्च 2021   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (417 बार पढ़ा जा चुका है)

रहनुमाँ

मेरे रहनुमा लो मै फिर से आ गया खोंज में तेरे ,

फिर से तूने मुझे गलत मंजिल पे क्यूँ छोड़ा था !

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