ख़याल

25 मार्च 2021   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (435 बार पढ़ा जा चुका है)

ख़याल

हर ग़म ही रहा हर दम में मेरे, हर ग़म पे मेरा हर दम निकला ,

"रंजन" हर दम की ये खू तेरे कूचे की हर दम ही मेरा हर दम निकला।

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