असहाब

27 मार्च 2021   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (414 बार पढ़ा जा चुका है)

"रंजन" का सामान था एक चराग ,एक किताब और उम्मीद ,

जब वो भी लूट लिया असहाब ने तभी तो एक अफसाना बना !

https://ghazalsofghalib.com

https://sahityasangeet.com

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