शायरी

30 मार्च 2021   |  AYESHA MEHTA   (417 बार पढ़ा जा चुका है)

शाख से है रंग उड़ा मन है बेरंग सा

होंठ पर है धूप खिला दर्द ने है आह भरा

रंग पर जब रंग चढ़ा रूह से आवाज़ आई

ये ज़िन्दगी है आयशा ये भी ज़िन्दगी है क्या

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