हिंदी

16 सितम्बर 2018   |  क्षमा राधे   (37 बार पढ़ा जा चुका है)

में हिंदी हू

कही माला को बनाने वाला धागा हू में,

तो कही माथे की बिंदी हू

में हिंदी हू !

में पहले थी , अब हू ,और कल

भविश्य हू !

है में कालजयी हू ,

में हिंदी हू !

नीत नई खोजो की सीढिया चढ़ती

में तो कभी न थकती !

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