गीत, आंचलिक पुट

25 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (27 बार पढ़ा जा चुका है)

"गीत" आंचलिक पुट


मोरे अँगने में है तुलसी का चौरा

एक पेड़ नीम संग आम खूब बौरा

अड़हुल का फूल लाल केसर कियारी

मगही के पतवा तुराये भरि दौरा.....मोरे अँगने में


गाय संग कुकुरा के रोज रोज कौरा

धूल और माटी में खेले चंचल छौरा

गैया के गोबर भल घास दूब मोथा

बगिया फुलाए पै उड़े लागल भौंरा.....मोरे अँगने में


होखे जब ओसवनी तब मारे लोग बौंरा

देह खजुआये मानों धइले बा खौरा

जामुन के डारि अरु कोयल की बोली

लाल पीयरि चुनरी लट आँख कजरौरा.....मोरे अँगने में


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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रचना को विशिष्ट सम्म्मन प्रदान करने हेतु मंच व मित्रों का हृदय से आभारी हूँ

रेणु
25 जून 2019


होखे जब ओसवनी तब मारे लोग बौंरा
देह खजुआये मानों धइले बा खौरा
जामुन के डारि अरु कोयल की बोली
लाल पीयरि चुनरी लट आँख कजरौरा.....मोरे अँगने में!!!!!!!
बहुत सुंदर भैया | लोकरस माधुरी से सराबोर मस्त रचना |
गवंई अदा के क्या कहने !!!!!!!!!हार्दिक शुभकामनायें और प्रणाम

हार्दिक धन्यवाद बहन, शुभाशीष

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