अमीरी गरीबी का फर्क मिटा जामिया के छात्र ने भरी उड़ान, मिला 70 लाख का सालाना पैकेज

20 नवम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (198 बार पढ़ा जा चुका है)

अमीरी गरीबी का फर्क मिटा जामिया के छात्र ने भरी उड़ान, मिला 70 लाख का सालाना पैकेज

किसी ने सच ही कहा है काबिल बनो कामयाबी तो झक मार के पीछे आएगी। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी से रूबरू करने जा रहे हैं जिसने अपनी प्रतिभा से वो मुकाम हासिल किया जिसका ख़्वाब न जाने कितनी ही आँखों ने देखा होगा और ये साबित किया कि प्रतिभा ना उम्र देखती है ना जाति और ना ही अमीरी-गरीबी का फर्क जानती है।


ये कहानी है दिल्ली में पढ़ने वाले एक लड़के की जिसने साबित कर दिखाया की अगर काबिलियत है तो मंजिल तक पहुँचना मुश्किल नहीं है।जिनका नाम है मोहम्मद आमिर और महज 22 साल की उम्र में मोहम्मद आमिर अली को एक अमेरिका कंपनी ने 70 लाख रुपए सालाना का पैकेज दिया है आपको बता दें कि यह बात ख़ास इसलिए है क्योंकि आमिर बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं उनकी आर्थिक स्थिति इस हद तक कमजोर रही कि पैसों की तंगी के चलते यह होनहार विद्यार्थी एक साल तक पढ़ाई नहीं कर पाया था लेकिन जैसे ही आमिर को अवसर मिला उन्होंने अपनी प्रतिभा दुनिया को दिखा दी।आमिर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ से है और दिल्ली के जामिया नगर में रहते हैं।


बचपन से ही अपने होनहार बेटे की प्रतिभा को समझ चुके उनके पिता शमशाद अली ने कर्ज लेकर आमिर की आगे की पढ़ाई पूरी करवाई। आमिर के पिता पेशे से एक इलेक्ट्रीशियन है लेकिन हर माता पिता की तरह उनका भी सपना है की उनका बेटा बड़ा आदमी बने। अपने बेटे की कबिलियत पर पूरा विश्वास रखने वाले शमशाद अली ने आमिर को एक सैकेंड हैंड मारुति 800 कार करीब 40 हजार रुपए में खरीदकर दी जिसे अपने हुनर से आमिर ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग कार में बदल दिया। आमिर द्वारा बनाई गयी इस कार को पिछले साल 29 अक्टूबर को जामिया के स्थापना दिवस के समारोह में प्रदर्शित किया गया था। जिसके चलते आमिर का काम देश-विदेश की कई कंपनियों की नजर में आया और उसे अमेरिकी कंपनी की ओर से 70 लाख का पैकेज मिला ।


आमिर बताते है कि “जामिया के पॉलिटेक्निक के प्रोफेसर वकार आलम और सीआइई के सहायक निदेशक डॉ. प्रभाष मिश्र के नेतृत्व में मैंने अपना प्रोजेक्ट पूरा किया।”लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब आमिर का जेईई मेन परीक्षा देने के बाद एनएसआइटी में बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर में दाखिला हो गया था लेकिन आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण वह दाखिला नहीं ले सके। एक होनहार विद्यार्थी जिसने साल 2014 में बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ और बॉयोलॉजी पढ़कर 70.8 फीसद अंक प्राप्त किये थे उसे एक साल पढ़ाई छोड़नी पड़ी उसके बाद अगले साल 2015 में आमिर ने जामिया विश्वविद्यालय में बीटेक एवं इंजीनियरिंग डिप्लोमा की प्रवेश परीक्षा दी और जामिया से 2015 से 2018 तक उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।


अब अमेरिका की फ्रिजन मोटर व‌र्क्स द्वारा आमिर को बैट्री मैनेजमेंट सिस्टम में बतौर इंजीनियर के पद पर लिया है।आमिर का रुझान शुरुआत से ही इलेट्रिकल विषय में है इसी के चलते उन्होंने जामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआइई) के तहत इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट पर काम किया।


साथ ही आमिर के पिता शमशाद अली बताते है कि “बचपन से ही आमिर इलेक्ट्रिक उपकरणों से जुड़े सवाल पूछता था। मैं सवालों का जवाब नहीं दे पाता था लेकिन आज मुझे बहुत खुशी है कि मेरे बेटे को अच्छी नौकरी मिल गयी उसका सपना पूरा हो गया।”


इसी के साथ आज आमिर ने बता दिया की लक्ष्य तक पहुँचने में मुश्किलें आती है लेकिन अगर इरादा मजबूत हो तो तमाम मुश्किलों के बाद भी सफलता की राहें पाना असंभव नहीं हैं।




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