दबी जुबान

01 अगस्त 2019   |  जानू नागर   (407 बार पढ़ा जा चुका है)

दबी जुबान

पास होगा सबकुछ पास होगा चाहत जो इतनी है।

दबीजुबा से कुछ कह न सके अपनो से।

लिखने की वर्तनी का कुछ असर नही कलम जो इतना डरती है।

राहुल बजाज की अभिब्यक्ति से पता चला, इलेक्ट्रिक कार तो अभी सपना है।

सरकार की चाहत को रख पास में अपनी ब्यथा को कहते है।

तीन तलाक भी कानून बन गया इज्जत और आबरू का।

शिक्षा लटकी है अभी अधरों में, स्वस्थ बना चुनैती है।

बादल तो ढेर है आसमाँ में, जमी बूंदों को तरसे।

बाढ़ के प्रकोप से लाखों बेघर हो गए यह दबी जुबा से कहते है।

रेप बहन बेटियों के हो रहे रोज, यह कह पीट रहे हथौड़ा कानून वाले भैया।

यह दबी जुबा में सब कहते है। पास हुआ निर्भया कांड कानून, स्वाति जी कहती है।

पास करो और क्या पास करोगे? कानून से कितना छेड़खानी करोगे यह दबी जुबां में कहते है।

आएगी प्रलय एक दिन बद्रीनाथ की तरह, कानून वही रह जाएगा।

बह जाएंगी सारी कुरीतियाँ, यह दबी जुबां में कहते है।

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