आओं लौट चले

10 अक्तूबर 2019   |  जानू नागर   (5626 बार पढ़ा जा चुका है)

आओं लौट चले

तिनका तिनका जोड़कर, चिड़ियाँ बना लेती हैं बबूर मे घोसला |

उड़कर-उड़कर पंख पसार, करती नदी सागर घर आँगन पार |

पर ना जाने क्यो? चुँगने उड़ने के बाद, घर को वापस आती हैं |

भर चोंच मे दाना लिए ऊँची उड़ान, लौट आती हैं बच्चो के लिए |

भोर भई चहचाई चिड़ियाँ अपनी डाली मे, अब तो जागो रे मनवा |

खुली आँख किसान की, हर कांधे चले बैल सरपट गलियारे मे |

होत सबेरे हर घर आँगन मे, बहूँ बेटियो का चूल्हा जलने लगा |

चढ़ सूरज तपने लगा, ले किसान हर बैल घर को लौटने लगा |

कर स्कूल पढ़ाई भाई बहन, लै तख्ती झोरा अपने घर को भागे|

कर जवान प्रदेश कमाई, हर त्योहार लौटे अपने शहर गाँव को |

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