हैप्पी बर्थ डे

03 नवम्बर 2019   |  दिलीप कुमार   (3085 बार पढ़ा जा चुका है)


"हैप्पी बर्थ डे ",,(व्यंग्य)


"बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का

जो काटा तो कतरा ए लहू तक ना निकला "

ऐसा ही कुछ रहा ,इस हफ्ते,,जब कश्मीर का नया जन्म हुआ ।धमकी,ब्लैकमेलिंग,और सुविधा की राजनीति करके उसे इंसानियत,कश्मीरियत,जम्हूरियत का मुलम्मा चढ़ाने वालों के दिन अब लद गये।अब अलगाववादी को पलकों पर नहीं बिठाया जाएगा बल्कि उनकी आँखों के बिनाई भी खींच ली जायेगी।

चंदे और लूट खसोट पर जीने वाले लोग ,जो अब तक रुपयों की रबड़ी,मलाई,चाशनी काटते रहे हैं और अब अचानक से बेरोजगार और महत्वहीन हो चले हैं।अब चुनिंदा लोगों के अच्छे दिन जाते रहे तो कश्मीर की अवाम के अच्छे दिन आ गये।

अपना साम्राज्य खोने वाले लोग अब कश्मीर में ठंडी साँसे भर रहे हैं और कहते हैं-

"थे बड़े बेदर्द लम्हे खत्मे दर्दे ए इश्क़ के ,

थी बड़ी बेमेहर सुबहें, मेहरबां रातों के बाद "।


कश्मीर के नए जन्म ने दुनिया में कितने लोगों को बेरोजगार और महत्वहीन कर दिया है ये बात खासी दिलचस्प है।कश्मीर पर मलेशिया के 94 वर्षीय प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने भारत के जबरदस्ती कब्जे वाला बयान क्या दिया ,उन्होंने बैठे बिठाये आफत मोल ले ली।इधर बम्बई के पॉम ऑयल व्यापारियों ने बहिष्कार का बिगुल बजा दिया ।ये बिगुल इतनी तेज आवाज में बजा कि मलेशिया के ऐंठने वाले नेताओं के कानों से खून निकलने लगा ।चंद रोज पहले तो भारत के भगोड़े जाकिर नाइक को पलकों पर बिठाये हुए था मलेशिया और अब भारत की दीवाली को मलेशिया अपना महत्वपूर्ण इवेंट बताते नहीं थक रहा है।ये इसलिये हुआ है क्योंकि भारत के व्यापरिक बहिष्कार से मलेशिया की जीडीपी में 3 फीसदी कमी आने के आसार हैं ,,,इसे ही भारत में कहा जाता है

"घर में नहीं दाने ,अम्मा चलीं भुनाने "।


महातिर मियां को किसी ने नहीं समझाया कि शीशे के घरों में रहने वाले लोग पत्थर नहीं फेंका करते ,,,अब भारतीय नेतृत्व मलेशिया और थाईलैंड के सीमा विवाद में काफी दिलचस्पी ले रहा है।महातिर की इस गलती को वहां की सरकार के सहयोगी दल ने "एक बूढ़े आदमी के जुबान की फिसलन "करार दिया है ।ये फिसलन इतनी महंगी पड़ेगी मलेशिया वालों को किसी को अंदाज़ा था ,,काश किसी जाकिर नाइक के पिट्ठू ने उसे ये भारतीय सबक सिखाया होता कि

"बातहिं हाथी पाइये, बातहिं हाथी पाँव "।

कश्मीर के ये जन्मदिन का केक इसी रास्ते तुर्की पहुंचा जहाँ अब ये केक तुर्की वालों का हाजमा बिगाड़ रहा है वहाँ के प्रधानमंत्री एर्दोगेन की बदजुबानी के सबब। डेढ़ लाख भारतीय ,जो हर साल तुर्की घूमने जाते हैं और जो तुर्की की बहुसंख्य आबादी की रोजी रोटी का आधार हैं।अब कश्मीर पर तुर्की के नेता की बदजुबानी ने तुर्की में नया स्यापा खड़ा कर दिया है।तमाम होटलों और टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स पर भारतीयों के बहिष्कार से खासे आर्थिक नुकसान की संभावना है ।अच्छा ही है अब भारत के लोग कश्मीर जाएँ और यहां के लोगों को पर्यटन से रोजी रोटी मिले ना कि तुर्की के लोगों को ।वो कश्मीर का राग वैसे ही अलापते रहें जैसे हुर्रियत के लोग अपनी सुविधाओं के ना होने का दुखड़ा रोते रहते हैं ,हुर्रियत को भी कश्मीर के नए जन्मदिन का केक खिलाना चाहिये भले ही वो गले गले तक चंदा खाकर अघाये हों।

कश्मीर ने क्या क्या गुल ना खिलाये ,दिन रात कश्मीर का आलाप करने वाले इमरान खान नियाजी की कुर्सी जाने को है ,लोग उनसे कहते हैं कि कश्मीर भूल जाओ,मुजफ्फराबाद,इस्लामाबाद बचाओ ,पाकिस्तान बचाओ ,किसी ने सच ही कहा है -

"वतन की फ़िक्र कर नादां कयामत आने वाली है

तेरी बर्बादियों के चर्चे हैं आसमानों में"


बड़े भाई कश्मीर का हैप्पी बर्थडे हुआ तो छोटा भाई लद्दाख पीछे रहे ,,उसका भी जन्मदिन धूम धाम से हुआ ।कश्मीर और लद्दाख पर हमेशा ज्ञान देने वाले कश्मीर ने इस साल दिवाली पर चीन की कश्मीर पर बदजुबानी के बाद चीनी मोबाइल और झालरों की बिक्री 80 फीसदी तक घट गयी।चीन इस आर्थिक नुकसान से बिलबिलाया हुआ है लेकिन चीनियों को अब इस देश से चीनी कम वाली ही चाय मिलेगी।यहाँ ये बताना बेहद जरूरी है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने बगदादी की मौत की खबर इंडिया टीवी के रजत शर्मा से कंफर्म करने के बाद ही ऑफिसियल घोषणा की थी । सूना है कुछ भारतीय टीवी चैनलों ने बगदादी पर जो प्रोग्रम बना रखे थे और अब उनका टेलीकास्ट ना हो पाने पर अमेरिका ने मुआवजा देने की पेशकश की है।भारतीय चैनलों के बहुत मनुहार और प्रलोभनों के बावजूद अमेरिका ने बगदादी के कच्छे के बारे में फुटेज देने से मना कर दिया है ।बाज़ार विशेषज्ञों ने एक अनुमान लगाया है कि यदि भारतीय टीवी चैनलों को बगदादी का कच्छा मिल जाता तो ये अमेरिका का भारत की मीडिया इंडस्ट्री में सबसे बड़ा निवेश होता ,,ये निवेश कितना होता ,,इसका आकलन जारी है।

इसी बीच भारत के तमाम भू भाग को अपने नक़्शे में अपना हिस्सा बताने वाले चीन की गुगली पर भारत ने अपना मास्टर स्ट्रोक मार दिया है ।भारत वर्ष ने अपना नया नक्शा जारी कर दिया है जिसमे 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित राज्यों से सुसज्जित भारत ने अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया है ,,,इसी ही "टिट फॉर टैट"कहा जाता है डिप्लोमेसी में।

भारत के इस नए नक्शे पर एक वामी मित्र ने पूछा कि

" अब आपको नये कश्मीर और नये लद्दाख पर क्या कहना है "।

भारत के नए नक्शे को देखते हुए मैंने हँसते हुए कहा-

"हैप्पी बर्थ डे टू बोथ ऑफ़ यू "।

😊💐,,,समाप्त,,,कृते ,,दिलीप कुमार


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