अबकी बार तीन सौ पार

24 नवम्बर 2019   |  दिलीप कुमार   (2351 बार पढ़ा जा चुका है)


अबकी बार,तीन सौ पार,(व्यंग्य)


"नहीं निगाह में मंजिल तो जुस्तजू ही सही

नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही "


जी नहीं ये किसी हारे या हताश राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता की पीड़ा या उन्माद नहीं है।बल्कि हाल के दिनों में तीन सौ शब्द काफी चर्चा में रहा।एक राजनैतिक दल ने तीन सौ की हुंकार के साथ चुनाव में हुंकार भरी और फिर अब वो समय पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं ,धुंधली या पक्की ये तो इतिहास ही तय करेगा।तीन सौ की संख्या ने एक बार अमीरी का हब बनते जा रहे इस देश के बारे में आश्चर्यजनक आंकड़े पेश किये हैं कि इस देश में वेतनभोगी वर्ग की में सत्तर फीसदी लोगों की मासिक आमदनी दस हजार रूपये से कम है यानी करीब करीब तीन सौ रुपयों के आस पास ।दिल्ली के उच्च शिक्षा संस्थान की रिहाइश की फीस तीन सौ रूपये होने पर मीडिया में खूब हल्ला मचा तबसे लोग दिल्ली और झुमरीतलैया के मुद्रा स्फीति का आगणन कर रहे हैं।

बशीर बद्र साहब के शेर की बड़ी मशहूर लाइन है

"लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में "


फिर तीन सौ पार की रार सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि अपने पड़ोस पाकिस्तान में टमाटर की बढ़ती कीमतों की हुंकार है ,बाजार के विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पाकिस्तान में रूपये ग्राफ गिरता जा रहा है जबकि टमाटर का श्राप बढ़ता जा रहा है ।हाल ही में एक खबर ने काफी सुर्खियां बटोरी जब पाकिस्तान की नायला इनायत नामक युवती ने अपनी शादी में जेवरात की जगह टमाटर पहने। सारे साज श्रृंगार टमाटर से लदे फंदे थे ,,,दुल्हन के सौंदर्य की लाली की तुलना टमाटर से करने वाले लोग तब पशोपेश में पड़ गए जब टमाटर जैसी उपमा के बजाय उन्हें साक्षात टमाटर ही नजर आये, दुल्हन ने बताया कि उसके वालिद ने दूल्हे को तीन पेटी टमाटर भी दिए हैं दहेज में । सुना है हाफ़िज़ सईद ने अपने जंगजू भेजे हैं कि कश्मीर के नाम पर कुछ टमाटर उस दूल्हे से सहयोग में मांगे हैं।हिंदुस्तान में तो दहेज लेना और देना प्रतिबंधित है लेकिन पाकिस्तान में दहेज खूब चलता है ।वस्तुतः जो चीज हिंदुस्तान में प्रतिबंधित हो जाती है पाकिस्तान उसे सर माथे पर चढ़ा लेता है ।अब जैसे खालिस्तान की मांग भारत में प्रतिबंधित है तो पाकिस्तान ने सबसे पहले भिंडरवाले का शिगूफा करतारपुर साहिब में छोड़ दिया ।वैष्णो देवी की यात्रा में सिद्धू की इतनी हूटिंग हुई थी कि वो पानी पानी हो गए थे ,जिस सिद्धू को टीवी चैनल वालों ने निकाल दिया ।पाकिस्तान ने सर माथे पर उसको बिठाया और तालिबान खान उर्फ़ इमरान खान नियाजी की कसीदे गढ़ने के लिए करतार पुर साहब में उसको बुला लिया ।उसने अपनी बेसुरी राग लंतरानी मुसलसल चालू रखी जिसे वो सिद्धूइज्म कहते हैं लेकिन सिद्धू की सिद्धि अब फुस्स हो गयी वो पैविलियन में हिट विकेट होकर बैठे हैं।

उस्ताद अदीब इब्न ए सफ़ी साहब ने आगाह किया था कि " पाकिस्तानियों की बात का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए "।

अब कल तक पाकिस्तान आर्मी की विष कन्या माने जानी वाली राबी पीरजादा ने जहरीले सांप से कटवाने,अजगर और घड़ियाल से निगलवाने की धमकी भारतीय नेतृत्व को वो दे रही थीं अगर कश्मीर से 370 नहीं हटाया तो ,लेकिन उन्हें क्या इल्म था कि जुल्म की जहराब पर पला बढ़ा विश्वासघात का बिच्छु उनको ही डंक मार जायेगा।

अदाकार और गुलूकार जब नफरत की अंधी गलियों में जाकर कुत्सित योजनाओं का हिस्सा बनते हैं तब अंजाम यही होता है ,कल तक जिस राबी पीरजादा की सुरीली आवाज इंटरनेट पर कूक रही थी ,आज पाकिस्तान के कुछ नालायक लोगों की वजह से उस गुलकारा की अश्लील वीडियोज समाज में गंदगी फैलाने की बायस बन रहे हैं ,उस पर तुर्रा ये है कि कल तक खुलेआम धमकियां देने वाली , खुद चरमपंथियों की धमकी से डरी डरी है और बिलख बिलख कर माफ़ी मांग रही है और अपनी जान की अमान भी -

'किससे कहें कि छत की मुंडेरों से गिर पड़े

हमने ही तो ये पतंग उड़ायी थी शौकिया "

अब तो डिप्लोमेसी का आलम ये हो गया है कि जो काम बंदूक से निकली गोली नहीं कर पाती वो काम पड़ोसी मुल्क के सब्ज़ी की खाली होती झोली कर देती है ।भारत के टमाटरों ने पाकिस्तान ना जाकर वो तबाही मचायी कि तौबा तौबा पूछिये मत ।पाकिस्तान भारत की मिसाइलों के मुकाबले गौरी और गजनवी मिसाइलें तो बना सकता है तो मगर टमाटर पैदा नहीं कर सकता ।

यही हाल दूसरे पड़ोसी बांग्लादेश का भी है ,भले ही अपने अवैध नागरिकों को वो हमसे स्थल मार्ग से भी लेने को तैयार नहीं मगर भारत का प्याज उसने आनन फानन में हवाई मार्ग से मंगा लिया ।भारत जब उन्हें अवैध घुसपैठिये सौंपता है तब तो वो उन्हें वापस लेने में दुनियाभर की आनाकानी करते हैं और 1971 का संधिपत्र खोजने लगते हैं ,लेकिन भारत को ये उलाहना देने से बाज नहीं आते कि उसने बिना बताए प्याज की अचानक डिलीवरी रोक दी ।इन बांग्लादेशियों का रवैया भी राजधानी के एक उच्च शिक्षा संस्थान के कुछ भटके हुए नौजवानों जैसा है जिन्हें छः लाख पंचानबे हजार की प्रति विद्यार्थी की सब्सिडी कम पड़ रही है । खुद को लोकतंत्र का सजग प्रहरी कहने वालों को काश ये पता होता कि प्रति बीघे पराली जलाने के लिये सौ रूपये की सब्सिडी जुटाने को सरकार प्रयासरत है ।जहाँ कभी लाइट नहीं जाती उन्हें क्या पता कि मिट्टी के तेल की सब्सिडी बहुत कम हो गयी है जिससे इस देश के तमाम बच्चों के पढ़ने की अवधि कम हो गयी है । देश ने इन होनहारों को बड़ी उम्मीद से पढ़ने के लिये भेजा है ,गुरुओं ,शिक्षिकाओ से तू तू ,मैं मैं,झुमा झटकी करने के लिये नहीं ।सिर्फ लेनिन और चे-ग्वारा ही नहीं अपने लोगों की भी इज्जत करना सीखें ।

एक उस्ताद शायर ने शाद फरमाया है कि

"तस्वीरें तो घर में सजा लीं

और मुसव्विर दर दर हैं ,

फन की इज्जत करने वालों

कद्र करो फनकारों की "

समय का फेर है कि ममता बनर्जी ने हैदराबाद के एक फायरब्रांड नेता और खुद को कौम विशेष का ही खिदमतगार कहने वाले नेता पर अल्पसंख्यक तुष्टि करण का आरोप लगाया है ,

ये बात सच है ,चुनाव पूर्व हुए गठबंधन की कसम ।😊,

समाप्त ,कृते,,, दिलीप कुमार






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