उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

14 जनवरी 2020   |  आलोक कौशिक   (400 बार पढ़ा जा चुका है)

उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

यह सत्य है कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा में परिस्थितियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। लेकिन खुशियों का संबंध मनुष्य की प्रकृति और उसके दृष्टिकोण से होता है। जीवन प्रतिपल परिवर्तित होता है। प्रत्येक दिन नवीन चीजें घटित होती हैं। नवीनता का बोध होना आवश्यक है। उससे भी आवश्यक है वर्तमान में जीना। खुशियों को भी किसी वस्तु में खोजने के बदले वर्तमान में खोजना चाहिए। वर्तमान में ही सुख पाया जा सकता है।


उसी प्रकार हम जब चाहें उत्सव मना सकते हैं। हम जीवित हैं, हम स्वस्थ हैं, माता-पिता का साथ है, बारिश हो रही है, पंछी कलरव कर रहे हैं, ऐसे अनगिनत कारण हो सकते हैं उत्सव मनाने के। प्रत्येक क्षण में नूतनता है और नूतनता में उत्सव। वर्तमान ही सत्य है। जीवन के प्रत्येक क्षण का आनंद लेना ही उत्सव है। हम समय के अतीत और भविष्य पर जितना अधिक केंद्रित होते हैं उतना ही अधिक हम वर्तमान को खो देते हैं, जो सबसे मूल्यवान चीज है।


राशि चक्र में परिवर्तन पृथ्वी की गति से होता है, जिसे सूर्य का परिवर्तन समझा जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु से मकर राशि में जाता है तो उसे मकर संक्रांति कहा गया है। दिन-रात तब समान होते हैं जब सूर्य विषुवत वृत्त पर आता है। इसी के दोनों ओर उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव स्थित हैं।


उत्तरायण का दिन धर्म शास्त्रों में अत्यंत पवित्र माना गया है। उत्तरायण का अर्थ है उत्तर की ओर चलना। सूर्य जब उत्तरायण में होता है तब दिन बड़ा होने लगता है और जब दक्षिणायन में होता है तब दिन छोटा होने लगता है। उत्तरायण में दिन की अधिकता के कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वीवासियों को अधिक प्राप्त होता है। इस वृद्धि को शुभ माना गया और यह शुभता उत्सव के रूप में परिवर्तित हुआ।


सूर्य पर आधारित हमारे सनातन परंपरा में मकर संक्रांति का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे वेद और पुराणों में भी इस दिन का विशेष उल्लेख मिलता है। होली, दीपावली एवं अन्य त्यौहार जो विशेष कथाओं एवं मान्यताओं पर आधारित हैं। वहीं, मकर संक्रांति एक खगोलीय घटना है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था।


महर्षि व्यास के अनुसार जब मनुष्य अच्छे विचार, विद्या, विवेक, वैराग्य, ज्ञान आदि के चिंतन में प्रवृत्त होता है, यही उत्तरायण की स्थिति है तथा जब वह काम, क्रोध में वृत्ति लगाता है, वही दक्षिणायन है।

...................


:- आलोक कौशिक


संक्षिप्त परिचय:-


नाम- आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)

पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन

साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित

पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,

अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com

अगला लेख: प्राकृतिक आपदाएं : कितनी प्राकृतिक, कितनी मानवीय



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 जनवरी 2020
आज लौटकर मिलने मुझसे मेरा यार आया हैशायद फिर से जीवन में उसके अंध्यार आया हैबचकर रहना अबकी बार चुनाव के मौसम मेंमीठी बातों से लुभाने तुम्हें रंगासियार आया हैबहुत प्यार करता है मुझसे मेरा पड़ोसीमुझे यह समझाने लेकर वो हथियार आया हैगले मिलकर गले पड़ना चाहता है दुश्मनलगता है अबकी बार बनके होशियार आया हैमे
02 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
हर दिन होली और हर रात दिवाली है जब बिहारी की महबूबा होती नेपाली है ग़र यकीं ना आये तो इश्क़ करके देखो फिर समझ जाओगे क्या होती कंगाली है जिसकी खातिर लड़ता रहा वो ज़माने से आज उसी ने कह दिया उसे तू मवाली है जरूर इज्ज़त करता होगा वो उसकी जो ज़ली
02 जनवरी 2020
29 जनवरी 2020
"धर्म की आस्था पर हम सभी एक हैं"धर्म की आस्था पर हम उड़े तो क्या हुआ ,कबूतरों के पंख इस तरह काटे नहीं जाते |यूं देखा जाय तो यह कटु सती है कि पूरा देश धर्मांधता और दुराग्रह के वातावरण की आंधी मेन फंस कर रह गया है | हाथवादियों और धर्मांध शक्तियों को खुश करने की नीति के क
29 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
प्राकृतिक आपदाएं:- कितनी प्राकृतिक कितनी मानवीय सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न माने जा सकते हैं। क्योंकि कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो, इससे पहले मनुष्य उसे रोक सकता है। सभी आपदाएं मानवीय असफलता के परिणाम हैं। मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल या व्यवस्था की असफलता मानव-निर्मित आपदा क
02 जनवरी 2020
01 जनवरी 2020
किसी की मोहब्बत में खुद को मिटाकर कभी हम भी देखेंगे अपना आशियां अपने हाथों से जलाकर कभी हम भी देखेंगे ना रांझा ना मजनूं ना महिवाल बनेंगे इश्क में किसी के महबूब बिन होती है ज़िंदगी कैसी कभी हम भी देखेंगे मधुशाला में करेंगे इबादत ज़ाम पियेंगे मस्ज़िद में क्या सच में हो जायेगा ख़ुदा नाराज़ कभी हम भी देखेंगे
01 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
प्राकृतिक आपदाएं:- कितनी प्राकृतिक कितनी मानवीय सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न माने जा सकते हैं। क्योंकि कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो, इससे पहले मनुष्य उसे रोक सकता है। सभी आपदाएं मानवीय असफलता के परिणाम हैं। मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल या व्यवस्था की असफलता मानव-निर्मित आपदा क
02 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
शेरनी भी पीछे हट गयीबछड़े की मां जब डट गयीहमारी कलम वो खरीद न सकेलेकिन स्याही उनसे पट गयीहमारे मुंह खोलने से पहलेदांतों से जीभ ही कट गयीसच बोलने लगा है अब वोसमझो उमर उसकी घट गयीगौर से देखो मेरे माथे कोबदनसीबी कैसे सट गयीकमीज तो सिला ली हमनेलेकिन अब पतलून फट गयीउसने गले से लगाया ही थाकमबख़्त नींद ही उच
02 जनवरी 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
02 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
03 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
01 जनवरी 2020
03 जनवरी 2020
02 जनवरी 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x