उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

14 जनवरी 2020   |  आलोक कौशिक   (368 बार पढ़ा जा चुका है)

उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

यह सत्य है कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा में परिस्थितियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। लेकिन खुशियों का संबंध मनुष्य की प्रकृति और उसके दृष्टिकोण से होता है। जीवन प्रतिपल परिवर्तित होता है। प्रत्येक दिन नवीन चीजें घटित होती हैं। नवीनता का बोध होना आवश्यक है। उससे भी आवश्यक है वर्तमान में जीना। खुशियों को भी किसी वस्तु में खोजने के बदले वर्तमान में खोजना चाहिए। वर्तमान में ही सुख पाया जा सकता है।


उसी प्रकार हम जब चाहें उत्सव मना सकते हैं। हम जीवित हैं, हम स्वस्थ हैं, माता-पिता का साथ है, बारिश हो रही है, पंछी कलरव कर रहे हैं, ऐसे अनगिनत कारण हो सकते हैं उत्सव मनाने के। प्रत्येक क्षण में नूतनता है और नूतनता में उत्सव। वर्तमान ही सत्य है। जीवन के प्रत्येक क्षण का आनंद लेना ही उत्सव है। हम समय के अतीत और भविष्य पर जितना अधिक केंद्रित होते हैं उतना ही अधिक हम वर्तमान को खो देते हैं, जो सबसे मूल्यवान चीज है।


राशि चक्र में परिवर्तन पृथ्वी की गति से होता है, जिसे सूर्य का परिवर्तन समझा जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु से मकर राशि में जाता है तो उसे मकर संक्रांति कहा गया है। दिन-रात तब समान होते हैं जब सूर्य विषुवत वृत्त पर आता है। इसी के दोनों ओर उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव स्थित हैं।


उत्तरायण का दिन धर्म शास्त्रों में अत्यंत पवित्र माना गया है। उत्तरायण का अर्थ है उत्तर की ओर चलना। सूर्य जब उत्तरायण में होता है तब दिन बड़ा होने लगता है और जब दक्षिणायन में होता है तब दिन छोटा होने लगता है। उत्तरायण में दिन की अधिकता के कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वीवासियों को अधिक प्राप्त होता है। इस वृद्धि को शुभ माना गया और यह शुभता उत्सव के रूप में परिवर्तित हुआ।


सूर्य पर आधारित हमारे सनातन परंपरा में मकर संक्रांति का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे वेद और पुराणों में भी इस दिन का विशेष उल्लेख मिलता है। होली, दीपावली एवं अन्य त्यौहार जो विशेष कथाओं एवं मान्यताओं पर आधारित हैं। वहीं, मकर संक्रांति एक खगोलीय घटना है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था।


महर्षि व्यास के अनुसार जब मनुष्य अच्छे विचार, विद्या, विवेक, वैराग्य, ज्ञान आदि के चिंतन में प्रवृत्त होता है, यही उत्तरायण की स्थिति है तथा जब वह काम, क्रोध में वृत्ति लगाता है, वही दक्षिणायन है।

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:- आलोक कौशिक


संक्षिप्त परिचय:-


नाम- आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)

पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन

साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित

पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,

अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com

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