लहर

22 मई 2020   |  मंजू गीत   (416 बार पढ़ा जा चुका है)

हौसला होता नहीं, जुटाना पड़ता है। पैर उठता नहीं, उठाना पड़ता है। दुनियां जरूरत की है, बिन जरूरत के बोल मिलता नहीं, मिलाना पड़ता है। काम, नाम होता नहीं, मेहनत से बनाया जाता है। हमेशा अच्छा मिलता नहीं, समझौता करना पड़ता है। मुश्किल वक्त जब भी आता है। चहेतों के सच्चे चेहरे लेकर आता है। आशियाना बनता नहीं घर, उसे घर बनाना पड़ता है। कोरोना जीते जागते, जीवन में प्रलय है। इस समय में जिंदगी हार रही है, धन धान्य, रोजगार, शिक्षा, पैसा, सुख समृद्धि के अभाव में, मानव जीवन है ये, यहां सहर्ष सब सबको मिलता नहीं, संघर्ष करना पड़ता है। अर्थ, तजुर्बा कड़वा ही सही, पर अपने नसीब से दो चार होना ही पड़ता है। झूठ, फरेब के पर्दे देर सवेर ही सही उठें, लेकिन सच से वास्ता होकर ही रहता है। जब चलना आसान ना हो, तो जीने के लिए रेंगना भी पड़ता है। जीवन सुख दुःख के उतार चढ़ाव की आंधी है, यहां वक्त ठहरता नहीं, चलते चले रहने की सीख है जीवन धारा। बहती मौजों और किनारों से आतीं जाती लहरों की बाजी है। जीवन धारा। जीवन के बदलाव की कहानी है। हौसला होता नहीं, रखना पड़ता है। अच्छा होता नहीं, बनाना पड़ता है।

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