दिल कमजोर

05 जुलाई 2020   |  मंजू गीत   (294 बार पढ़ा जा चुका है)

पढ़ें लिखे समझदार लोग, सांख्य, सवालों में गुम हो गए हैं। हर बात की नुक्ता चीनी में, रिश्ते दिमाग में कैद हो गये‌ है। पहले से ज्यादा भावों के अभाव हो गये है। लोगों के दिल तंग हो गये है, दिलों में अब खूबसूरत अहसास कम हो गये है। लोग बैठ अकेले, तन्हाई के मेले में खोकर , दुनिया से ही गुम हो गए हैं। प्यार, वफ़ा, वादे करके, लेकर खुद के कातिल हो गये है। हसरतों की हरारत से टूटकर चकनाचूर हो गये है। पहले लोग यार ढूंढते हैं फिर प्यार, बढ़ते वक्त की तपिश से झुंझलाकर फिर यही यार,प्यार बेकार हो जाता है। लोग दिल दिमाग में दूरियां बढ़ाने के, विचार कर सो बहाने ढूंढते हैं। लोग दिल कमजोर करके, चालाकी की धार से दिमाग तैयार रखते हैं। दूरियां बढ़ती कहां है? लोग बढ़ाने के लिए हर खार, वार ढूंढते हैं। दिल का जीना मुश्किल है, इसलिए लोग दिल में डलवाकर छल्ले, वाल, और तार जिंदगी ढूंढते हैं। जब कोई भी साथ ना हो तुम्हारे तो कांटों से याराना करों, लोग अपना कहकर, बाद में किनारा करने का इशारा करें, उससे पहले उस अपने को मुस्कुरा कर, खुद ही अलविदा कह दें।

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