कोरोना की मार

16 जुलाई 2020   |  मंजू गीत   (312 बार पढ़ा जा चुका है)

वाह! क्या हाल और समाचार है? सावन की बौछार है। कोरोना की मार है। बनती बिगड़ती सरकार है, चुनाव कराने के लिए आयोग हर हाल में तैयार है। बाहरवी में बहुत से बच्चे 90% से पार है। वही दसवीं कक्षा का रिजल्ट पिछली बार से बेकार है। चीन, पाकिस्तान सीमा पर कर रहा वार है। इधर नेपाल भी कर रहा तकरार है। यूपी में गैंगस्टर वार है, अभी बहुत से विकास दुबे फरार है। चीन, चुनाव, छिना झपती की खबरों से भरा पड़ा अखबार है। कोरोना ने सबका किया ‌बुरा हाल है। खोकर नौकरी और लाखों बढ़ गये बेरोजगार है। बिन दावत, भोज के हो रही शादी और तेरहवीं है। अपने अपने पन वाली शाख छोड़ कर, कर रहे अपने ही हित का विचार है। कोरोना में भले ही जान पर बनी हों, पर हर हाल अपनी ड्यूटी के लिए सेवक तैयार है। कुछ चेले, चाटुकार है, अपने माई बाप बोस के लिए हां में हां मिलाते हुए, हर हाल में चेलापंथी के लिए तैयार है। कोरोना भी इन लोगों के लिए अवसर वादिता का त्योहार है। अपना कह कर साथ छोड़ दें, इसी दुनिया में दोगले यार है। कोरोना में अपने पराएं के वायरस हो रहें स्कैन है। हर जगह छाया कोरोना का प्रचार प्रसार है। मांग भरने से पहले मांग, मांग भरने के बाद मांग, यह मांग ही तो है, जो कभी करती है जिंदगी हरी, तो कभी जिंदगी जाती हार है। पीढ़ियों से, रूढ़ियों से भंग खाकर समाज एक ही आइने में सबको धकेल रहा हर बार है। समझौते की जजीरों में घोंटने को, अपना ही घर, परिवार और रिश्तेदार हैं। एक के बाद एक जमाने की नजर से तारा बन कर टूट रहे हस्तियों के सितारे है। इरफान, ऋषि, सरोज, सुशांत, जगदीप और न जाने कितने ही छुपे लोग हैं। कोरोना अमिताभ को हो रहा, घर रेखा का सील हो रहा। 70+ की उम्र में भी इनके याराने और प्यार की जोड़ी बेमिसाल है बड़ा ही गहरा दोनों का प्यार है। सावन की बौछार है। कोरोना की मार है।

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