फोन संग Alone

25 जुलाई 2020   |  मंजू गीत   (285 बार पढ़ा जा चुका है)

जब मिल जाए फोन, हम रह लेंगे Alone, फिर घर की घंटी कोई बजाए, नहीं पूछेंगे तुम कौन? चाहें दूर से चलकर भैया आए, या ड्यूटी करने सैंया जाए, आने जाने से पहले घर में करना एक मिस कॉल। खाना बनाना हों, या हो खाना हाथ से दूर रह ना पाए फ़ोन.. जब घर, बाहर में बैठे हो लोग बहुत, या नेटवर्क सिग्नल दे ना साथ तो लेके फोन ढूंढे, बेहतर कनेक्टिविटी के जोन। सुबह सवेरे, रात अंधेरे पास में रहें फोन, आंख खुलते ही वाट्स अप, फेसबुक चेक करें कि आनलाइन है कौन? जान, जानू, डार्लिंग, स्वीटहार्ट, बेबी, सोना, एक दूजे की डिपी देखें, करके बार बार ज़ूम... क्या भेजा, कब भेजा, अब तक है आनलाइन, क्यों नहीं भेजा? कब हुए आफलाइन... सब हिसाब रखें अब फोन। होंठों की लाली, नाक की बाली, माथे पर झूलती लट, चमकती बिंदी लाल, काली तिरछी नजरें, फोटो ऐप एडिट वाली, डालें रोज कपड़े बदल जगह बदल, प्रेमिका, पत्नी, जान मतवाली। जब भी दिल चाहें बात दो चार कर लें, वो अपने मन की करती है मनमानी। बस उसको चाहिए लेटेस्ट फोन, फोन देने पर रह लेती है Alone.

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