अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!

30 जुलाई 2020   |  एंटोनी जोसफ   (269 बार पढ़ा जा चुका है)

अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!




अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!

पहले लोन से परेशान अब कृषक प्रकृति की मार से बेबस हैं.इस बार हमारे लिये अनाज पैदा करने वालों दो तरफा या कहे तितरफा मार पड़ी है. लाकडाउन, टिड्डी दल फिर बाढ़.किसान कुदरत की इस मार को झेल ही रहे हैं कोई ठोस समाधान भी इस बारे में नहीं निकल रहा. आगे चलकर हर आम आदमी को किसानों के साथ इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा . तितरफा हमले से देश में उत्पादित होने वाले अन्न के प्रतिशत में कमी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.कोरोना और बाढ़ के बीच एक अप्रत्याशित हवाई हमला हुआ टिड्डी दल का! जिसने रही सही कसर भी पूरी कर दी. भारत-पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से प्राय: हर साल टिड्डियों का दल भारत में पहुंचता है लेकिन इस बार तो अति ही कर दी. एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 80 टिड्डी दलो ने भारत में प्रवेश कर देश के कई राज्यों में लाखों हैक्टेयर जमीन पर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया.ऐसा पहली बार हुआ जब पाकिस्तान से एक साथ 8 टिड्डी दल भारत में घुसे,जिनमें सात दल छोटे थे किन्तु एक दल तीन किलोमीटर लंबा और इतना ही चौड़ा था. देश के कई राज्यों में टिड्डी दलों द्वारा व्यापक स्तर पर फसलों को नष्ट कर देने से खाद्य असुरक्षा का माहौल है.टिड्डी दल का असर मानसून के चलते थोड़ा थमा तो बाढ़ ने देश के अनेक राज्यों में गरीब,मध्यमवर्गीय ओर हर वर्ग के लोगो को बुरी तरह घेर लिया. सरकारों को चाहिये था कि इनमे से कुछ समस्याओं के हल में शुरू से ही कोई गंभीर कदम उठाये लेकिन कुदरत के आगे सरकार भी बेबस हो गई.प्रत्येक वर्ष होने वाली इन समस्याओं का हल खोजने के लिये कोराना की वेक्सीन खोज निकालने के प्रया स की तरह का प्रयास होना चाहिये.ें जिससे आगे आने वाले वर्षो में इस समस्या से निपटा जा सकें.यह कितनी गंभीर स्थिति है कि जब लाखों टिड्डयों का दल आगे बढ़ता है तो अपने रास्ते में आने वाले सभी तरह के पौधों और फसलों को चट करता हुआ आगे बढ़ जाता है.कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मात्र 6-8 सेंटीमीटर आकार का यह कीट प्रतिदिन अपने वजन के बराबर खाना खा सकता है और जब यह समूह में होता है तो खेतों में खड़ी पूरी फसल खा जाता है. एक साथ चलने वाला टिड्डियों का एक झुंड एक वर्ग किलोमीटर से लेकर कई हजार वर्ग किलोमीटर तक फैला हो सकता है. ये अपने वजन के आधार पर अपने से कहीं भारी आम पशुओं के मुकाबले आठ गुना ज्यादा तेज रफ्तार से हरा चारा खा सकती हैं.एलडब्ल्यूओ के मुताबिक दुनियाभर में टिड्डियों की दस प्रजातियां सक्रिय हैं, जिनमें से चार प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी, बॉम्बे तथा ट्री टिड्डी भारत में देखी जाती रही हैं. इनमें रेगिस्तानी टिड्डी सबसे खतरनाक मानी जाती है. भारत में टिड्डियों की समर ब्रीडिंग शुरू हो गई है.राजस्थान में हाल ही रेतीली जमीन के नीचे टिड्डियों के अण्डे भी मिले हैं और इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही इन अण्डों से हॉपर निकले हैं. गंभीर बात तो यह है कि रेगिस्तानी टिड्डी अब मानसून के दौरान ट्रांजिशनल फेस में ही अंडे देकर प्रजनन करने लगी हैं. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक टिड्डियों की समर ब्रीडिंग के बाद इनकी बढ़ी जनसंख्या बहुत बड़ा खतरा बन सकती है.दिलचस्प व गंभीर बात तो यह है वैज्ञानिकों के इस दावे के बावजूद की टिड्डियों के उत्पन्न होने के मूल का पता लगाने के बाद भी उनके अंडों को शुरू से खत्म करने का प्रयास किसी स्तर पर क्यों नहीं किया जा रहा? अगी इन्हें इनके मूल स्थल से ही नष्ट कर दिया जाये तो इस समस्या का तो कम से कम विश्व से खात्मा हो सकता है.टिडृडी दलों के हमले के बाद सरकारे एयरक्राफ्ट, ड्रोन तथा विशेष प्रकार के दूसरे उपकरणों के जरिये कीटनाशकों का हमला करने के लिये तैयार हो जाते हैं और इसपर करोड़ों रूपये खर्च करने के बाद जब हमला खत्म हो जाता है तो शांत बैठ जाते हैं अगर टिड्डियों के पैदावार स्थल का पता लगाकर हर देश मूल से ही टिड्डियों को खत्म करें तो इस समस्या का स्थाई हल निकाला जा सकता है.छिड़काव कर टिड्डियों को नष्ट करने के प्रयास जारी हैं लेकिन ऐसा कोई स्थाई प्रबंध जरूरी है ताकि टिडिड्यों की समस्या को जड़मूल नष्ट किया जाये. सभी देश अगर इस हमले का मुकाबला संयुक्त रूप से करे तभी यह संभव हो सकता है. फरवरी माह में भी पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात इत्यादि कई राज्यों में फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया था जबकि पिछले साल राजस्थान के दर्जन भर जिलों में टिड्डी दलों ने नौ महीनों के दौरान सात लाख हैक्टेयर से अधिक इलाके में फसलों का सफाया कर दिया था. टिड्डी दल दस किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से सफर करता है और एक दिन में 150 किलोमीटर तक उडऩे की क्षमता रखता है. टिड्डियों का एक छोटा झुंड भी एक दिन में करीब 35 हजार लोगों का खाना खा जाता है और दस हाथियों या पच्चीस ऊंटों के खाने के बराबर फसलें चट कर सकता है.


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