आत्मा लूट

07 अगस्त 2020   |  मंजू गीत   (399 बार पढ़ा जा चुका है)

भूख पर लिखने से कागज भलें ही भर जाएं, पर किसी का पेट नहीं.. लोगों को लोगों की जरूरत नहीं रहती है, पर लोगों की जरूरतें रहतीं हैं... भरोसा, विश्वास अपने पन के खंजर है, मारने वाले झूठ फरेब से, पीठ में ही नहीं सीने में भी मिठास के साथ उतार देते हैं। बचना ऐसे लोगों से, जो आपको चाहने का छलावा करते हैं। लोग अपना जमीर मारकर आत्मा लूटने कर व्यापार करते हैं। दुनिया में सब कुछ है, पहले सुना था, समझा नहीं। बात समझ आई तो तजुर्बा महंगा पड़ा। नाम के रिश्ते, नाम के दोस्त निकले, इन नाम के अपनों को अपना करके जब भी हम थोड़े से बेपरवाह हुए। तो खुद को हमने खाक पर बिछे नुकिले पत्थरों पर पाया। अब इस दुनिया में सब कुछ अच्छा लगता है, सिवाय लोगों के। रिश्तों, दोस्तों, करीब आने वालों के, प्यार से बोलने, प्यार जताने वालों से ज्यादा जहर अब दुनिया में कोई रह नहीं गया। सच कहूं तो हवा बन, पानी बन, पर किसी की धरती किसी का आकाश ना बन।

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