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विजय प्रकाश के बारे में

बस एक आम आदमी हूँ . पढ़ने का शौक़ीन और संगीत का दीवाना आवाज़ से खुश करने की कोशिश करता हूँ लोगों के होटों पर हसी लेन की एक छोटी सी कोशिश हमेशा करता हुँ,बस एक आम आदमी हूँ . पढ़ने का शौक़ीन और संगीत का दीवाना आवाज़ से खुश करने की कोशिश करता हूँ लोगों के होटों पर हसी लेन की एक छोटी सी कोशिश हमेशा करता हुँ

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विजय प्रकाश के लेख

कुछ शब्द वीरो के नाम

1 मार्च 2017
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उस वीर गति की लाज बचाने चले है हम सब साथ यहीसर कट जाये गम न होगा, मगर ना झुके ये शीश कभी || प्रेम डगर की राह छोड़ दी, पानी है अब वीर गति देश के खातिर दिल और धडकन कर दू न्योछावर जान अभी || हिन्दू मुस्लिम दंगो से अब ना होगा अनाथ कोई देश के ठेके दरों का आब कर देना है न

मर्द को दर्द नहीं होता एक मिथ्या ...

7 जून 2016
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काफी दिनों से हर लड़की और हर कही अमिताभ बच्चन जी का एक dialog है जो हर जगह, हर बार, हर मर्द को सुन्ना पड़ता है, जिसने हम मर्दो की ज़िन्दगी बदल दी " मर्द को दर्द नहीं होता " तो मेने सोच की इसी तथ्य पर एक कविता की रचना करू  तो पेश है हम मर्दो की व्यथा की हमे कब दर्द होता है हर मर्द को दर्द होता है जभी को

हर मानव की यही कहानी

10 मई 2016
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प्रेम रूप है शीतल जल का जो प्यासे की प्यास भुजा प्रेम रूप उस बड़े वृक्ष का जो मीठे फल बरसाए प्रेम रूप है मृध वर्षा का को किसान को रह दिखाए प्रेम रूप तो माँ में बस्ता जो अंचल में अपने छुपाए प्रेम रूप बरसता 

सब रावण के वंशज है

9 मई 2016
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रहता हूँ इस देश में जी में जहां रहते ह सब दानवकिस किस का में नाम लिखू में रहते है सब ही रावण मनुष्य के रूप में रहते है सब दानव और भक्षक भेद खोल दू इन दानव का तो सब कहते ह भोला सुच पूछो मुझसे तो कहदु सब रावण के है वंशज एक तरफ करते है पूजा दुर्गा सती , श्री राधे की कही 

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