उम्मीद कोई मुस्कुरा रहा



फिर जागते हुए रात क्यों कटी ?



सूरज की अपार ज्योति हूँ !



एक चिट्ठी ,भाई के नाम



कल की रात



कविताओं में सिमट गया



हमारे दिलों में जयजयकार बनके



दुर्दशा नारी की



ऐ बादल इतना क्यों बरस रहे हो ?



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