कोरोना



कोरोना का सच भाग 1

कोरोना का नाम बहुत सुना था। लेकिन 25 मार्च के बाद हमें समझ में आया क्या चीज है आखिर वह। लॉक डाउन के बाद हम सभी एक दूसरे को शक की निगाह से देखने लगे। वॉट्सएप पर मैसेज डराने के लिए आने लगे।पुरानी फिल्मों के सीन दिखाकर बहुत डराया लोगों ने वॉट्सएप पर।मुंह पर मास्क लगा झोल



एक जुलाई , डाक्टर्स डे प्रमुख कोरोना योद्धा

एक जुलाई ' डाक्टर्स डे ,प्रमुख कोरोना योद्धा' डॉ शोभा भारद्वाजएक जुलाई 1991 , भारत में डाक्टर्स डे की शुरुआत देश के महान चकित्सक भारत रत्न से सम्मानित पश्चिमी बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा०बी .सीे राय को उनके जन्म दिवस के अवसर पर सम्मानं एवं श्रद्धांजली देने केलिए डाक्टर्स डे मनाया जाता है इनके



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



कोरोना का काबू।

कोरोना का काबू।कोरोना --- कोई रोजगार नही।कोरोना --- कोई रोकथाम नही।कोरोना --- कोई रोए ना।कोरोना --- कोई रोकड़ा नही।कोरोना --- कोई रोल नही।कोरोना --- कोई रोको ना।



महामारी के बाद के विश्व में भारतीय विदेश नीति

कोरोना वायरस के प्रकोप से विश्व व्यवस्था व्यापक परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। इन परिवर्तनों की व्यापकता सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों के साथ ही मानव के



कोरोना काल के कुछ तथ्य

लॉकडाउन के 22 March ,२० से 31 May ,२० के दौरान, इन 71 दिनों के कोरोना काल में कुछ तथ्य -1- भारत के 28 राज्यों व् 8 केंद्र शासित प्रदेशों में बसी 135 करोड़ जनसख्या मेंगावों से शहरों की ओर देश की कुल आबादी में से एक तिहाई ने अर्थात 45 करोड़आबादी ने अपने मूल स्थान से रोजगार या अन्य कारणों से पलायनकिया



वैश्विक पटल पर कोरोना द्वारा उत्पन्न जनवादी संघर्ष

कोरोना कोविड 19 वैश्विक महामारी जिसने आज भागती दुनिया के चक्र की गति को धीमा कर दिया है। इस गति के अनुपात को लिखना ठीक वैसे ही होगा जैसे किसी जटिल इतिहास को 'किताब में लिखना' अगर हम वर्तमान परिस्थितियों की तुलना पूर्व परिस्थितियों से करें तो आज हमें बदलावो के अनुपात में बढ़ोतरी दिखती है। निश्चित है ब



अणु कोरोना हार चलेगा

हाहाकार मचा है जग मेंकैसे बेड़ा पार लगेगामन में आशा आस जगाएजीवन का ये पुष्प खिलेगालाशों के अंबार लगे हैंबिछड़ रहे अपनों से अपनेसाँसों की टूटी डोरी मेंटूट रहें हैं सपने कितनेबंदी जीवन भय का घेरालेकिन सुख का सूर्य उगेगामन में आशा आस जगाएजीवन का ये पुष्प खिलेगा।।काल कठोर भयंकर भारीनिर्धन को अब भूख निगल



ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है - दिनेश डाक्टर

ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ? दिनेश डाक्टर बीते दिनों में एक विचार बार बार मन में उभरता रहा है कि आने वाली दुनिया पता नही अच्छी होगी या बुरी पर जीवन उतना अच्छा नही रहेगा । बहुत सारी बंदिशें होंगी, ढेर सारे डर होंगे, हर वक़्त लोगों को लेकर मन में वहम होंगे । ये खाऊं के न खाऊं, वहां जाऊं कि



#कोरोना त्रासदी । #मजदूरों का #पलायन #मोदी_सरकार_की_विफलता

#कोरोना त्रासदी । #मजदूरों का #पलायन#मोदी_सरकार_की_विफलता#निष्पक्ष व सटीक #विश्लेषणसंविधान की शक्तियों का उपयोग करें।नागरिकों की जान माल स्वास्थ्य व कोरोना की राष्ट्रीय त्रासदी में सुप्रीम कोर्ट व जनता कि नाराजगी कोई मोल लेने का दुस्साहस नहीं करेगा किंतु इच्छाशक्ति तो मोदी साहिब को ही दिखानी होगी।वि



कोरोना का कहर

मनुष्य पर छाई है छिपी अंधेरा, रूप धारण कर वाईरस कोरोना ।इसका अर्थ है मनुष्य पर भारी , क्योंकि है ये महामारी ।अब मानव की दशा क्या होगी ?क्या कोरोना की विदाई होगी ?देख दृश्य मन विचलित हो उठता, क्या यही है सभ्य की कृपा ।क्या यह , मानव जीवन सिहर उठेगा ?या संसार पुनः हिलस उठेगा ?



प्रिय कोरोना,

चार दिन के मेहमान, कहा ठहरे? तुमने तो जीना मुहाल कर दिया, कब छोड़ोगे हमारा साथ?दिल बेबस होकर पूछे ये सवाल। घरबंदी कर दी तुमने हमारी, दोस्तों से दूरियां बढ़ा दी, हमने तुम्हारा अत्याचार बढ़ता पाया, बाहर का खाना भी तुमने छुड़वाया। तेरे नाम का ख़ौफ़ दूर-दूर तक फैला, तेरे कारन रुक गई हैं सबकी ज़िंदगियाँ, व्



कोरोना वायरस

Covid-19 coronavirus Disease-2019 कोरोना वायरस के कहर से हम भलीभाँति अवगत हैं देश का मीडिया पल पल की खबर आप तक पहुँच



अहसास आजादी का !

कोरोना माहमारी , जिसे चीनी वाइरस भीबोला जाने लगा है, के कहर के चलते लगभग 8 अरब (7.70 अरब) की दुनिया में 2 लाख से अधिकलोग अकाल मृत्यु की गोद में समा चुके हैं। रोज कीतरह ही आज 29 April ,20 को भी न्यूज़ पेपर्स में मेरी नजर मौतों की इन्हींआंकड़ों पर पडी। संपन्न व् अन्य देशों में जैसे अमेर



कोरोना से मिली सीख

कोरोना, एक ऐसी बीमारी जो मात्र छूने से फैल रही है, जिसने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है । विश्व में कई देश इस महामारी के चलते लॉक डाउन हैं। इसके कारण पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई है। दुनियाभर में लाखों लोग इस बीमारी के शिकार



अल्पविराम

कभी ऐसा भी वक्त आता है जब रुकता है सब कामबस समझ लो तुम, यह है जीवन का अल्पविरामजो अब बंद है, वह चल पड़ेगाअंदर जो भी है, वह निकल पड़ेगाबढ़ती हुई रफ्तार को मिल गया आरामबस समझ लो तुम, यह है जीवन का अल्पविरामअटकते हैं कम ताकि सांस ले पाएपीछे छूटे वक्त को हम पास ले पाएदेर होगी हमको छूने के लिए मुकामबस सम



जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन: इस कोरोनावायरस महामारी के बीच घर से काम करने के सम्बन्ध में

दूर दराज केक्षेत्रो से COVID-19 महामारी केदौरान में कार्यकरना पहले सेकहीं अधिक महत्वपूर्णहो गया हैऔर ऐसा लगताहै कि 9-5 ऑफिसके दिन अबसमाप्त हो गएहैं क्योंकि COVID-19 महामारीने हम मेंसे अधिकांश कोघर पर कामकरने के लिएमजबूर कर दियाहै। सामाजिक गड़बड़ीने हम मेंसे कई कोभविष्य के लिएघर पर रहनेके लिए मजबूरकि



अब की धुन

कैसे कहाँ से आया कोरोना..? अपने भी अपनो से दूर रहने लगे। ये जो कड़ी है, मुश्किल की घड़ी है। सामाजिक दूरी सहनी पड़ी है, बंद है हर कोई, अपने घरों में। कैसे कहाँ से आया कोरोना..? बहती जहरीली हवाओ के डर से, सभी के मुँह में मास्क लगने लगे। एक दूजे को हक़ करने से डरने लगे, कैसे कहाँ से आया कोरोना..? ख़ोज करने



कोरोना के दौर मे भी सहयोग न करने वाले लोग

कोरोना संक्रमण के फैलने के खतरों के इस भयावह दौर मे भी......गुड़गांव के एक "मुस्लिम" गार्ड पर निज़ामुद्दीन मरकज़ मे जाने की बात छुपाने और एक ही परिवार के तीन सदस्यों को कोरोना संक्रमित करने का आरोप लगा...बात फैला दी गयी......बाद मे पता चला न वह गार्ड कभी मरकज़ गया और न उसे कभी कोरोना संक्रमण हुआ....



जिंदगी का सफर

लॉक डाउन बढ़े नही ! कोरोना से कोई मरे नही।हाथ कभी मिलाए नही, सामाजिक दूरी बनाए रहे।नजर कभी झुके नहीं, रिस्ते कभी टूटे नही।सैनिक तुम बढ़े चलो! डॉक्टर तुम बढ़े चलो!सफाई कर्मचारियों से अनुरोध है,कोरोना से डरे नहीं गली,मकान को सेनेटाइज करते रहो। मास्क ग्लब्स हटाना नही।लॉकडाउन अब बढ़े नही , कोरोना से कोई



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