भारत की छुपी प्रतिभाएं

भारत एक विशाल देश है और हर एक क्षेत्र में इसने बहुत ही उन्नति करली है। हर क्षेत्र में उन्नति करने के बावजूद कुछ प्रतिभाएं अभी भी छुपी हुई हैं जो अभी तक अपना उपयुक्त स्थान पाने के लिए प्रयत्नशील हैं। उन्हीं में से कुछ प्रतिभाओं का वर्णन मैं नीचे कर रहा हूं।गत वर्ष घर के बाहर चौराहे में मैने मदारी को



10 मार्च 2015

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हार्दिक बधाई

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन हमें महिलाओं को दोयम दर्जे से मुक्ति के फलस्वरूप किय



गांधी बनाम गोडसे बनाम लोकतंत्र

आज गांधी जी की पुण्य-तिथि है। अख़बार और नेट पर भी एक दो ही सन्देश देखने को मिले। शायद महापुरुषो की महानता भी हमारी राजनीति की मोहताज है। शायद इस सरकार में गांधी को गोडसे से रेप्लेस कर दिया जाये, क्योंकि हिंदुत्व, हिन्दूदेश का नारा तो यही दे सकते हैं। संविधान के महत्वपूर्ण शब्दों में बदलाव का प्रयास



भारतीय युवा और भ्रष्टाचार का भविष्य

भारत देश एक ऐसा देश बनता जा रहा है जो कागजों में तो लोकतान्त्रिक देश कहलाता है पर वास्तविकता देखे तो कुछ और ही नजारा हमारे सामने दीखता है . कुछ तथ्य देखें : पिछले कुछ वर्षों से लगातार इन मुद्दो पे बातचीत हो रही और वर्तमान सरकार बेशर्म और नपुसंक बनकर जनता का शोषण रही है . नेता लगातार घोटाले करते



गाँधीवाद की मृत्यु (गाँधी-जयंती विशेष)

२ अक्टूबर को गाँधी -जयंती बड़ी धूमधाम से मनायी जाती है और सरकार द्वारा जनता के पैसे का खूब दुरूपयोग किया जाता है । सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात है की एक भी गाँधीवादी वर्तमान में भारतीय समाज की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत नहीं है, क्यूंकि वर्तमान की ज्यादातर समस्याएँ उनके ही गुरु भाई राजनीति



डॉ अम्बेडकर महात्मा क्यों नहीं बन पाये ?

जब हम किसी भारतीय विचारक कि चर्चा करते हैं तब दो बातों पर पूरा ध्यान देते हैं। पहली बात तो यह है कि इस विचारधारा का भारत भारत के ज्ञान के भंडार को क्या योगदान है. मतलब है, इस विचारक का भारतीय समाज से क्या सरोकार है ? इसने समाज की समस्याओं को किस तरह उठाया है और दूसरा क्या निदान दिया है। और दूसरी



भारत में नारी समस्याएं एवम सह -शिक्षा

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को देवी जैसा पद दिया गया हैं, वहाँ पर नारी का बहुत सी समस्याओं से गुजरना इसके सांस्कृतिक मूल्यों और यथार्थ के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। आज के परिवेश में जहाँ पर नारी और गरीब लोगों की सामाजिक सुरक्षा दाव पे लगी है और वहाँ के तथाकथित नेता अपने घोटालों और सुखभोग में



31 जनवरी 2015

भारत की संस्कृति

अपनी संस्कृति



भारत की आजादी ?

कितना कौतूहल होता है यह सुनकर कि "भारत तो एक स्वतंत्र देश है, और हम उस देश के वाशी हैं"। परंतु शाश्वत सत्य तो यह है कि हम अभी भी गुलाम है, अंतर तो मात्र इतना है कि पहले गोरे चमङे वालों के थे अब काले चमङे वालों के। अाखिर कब तक हम भारतीयों को इस मानसिक गुलामी के जंजीरों से अाजादी मिलेगी। आखिर कब



भारत और अमेरिका रिश्ता

भारत और अमेरिका के सुर अतीत में भले ही एक दूसरेसे मेल न खाते रहे हो परंतु आज स्थिति में वांछितबदलाव है। दोनों ही देश के प्रमुख विकास के मुद्दे परआम सहमति रखने वाले है। वैश्विक मंचो परदोनों ही देश गर्मजोशी से मिले है औरविचारधारा में भी आपसी समन्वय है। रिश्तों औरआकांक्षाओं की बात करने से पहले पूर्व मे



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