चातुर्मास्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समय-समय पर विभिन्न व्रत उपवास एवं त्योहारों का पर्व मनाने की परंपरा रही है | प्रत्येक व्रत / पर्व के पीछे एक वैज्ञानिक मान्यता सनातन धर्म में देखने को मिलती है | आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है | इसका बहुत ही



सनातन धर्म की विशालता :--- आचार्य श्री अर्जुन तिवारी जी

*सनातन धर्म में चौरासी लाख योनियों का वर्णन मिलता है | देव , दानव , मानव , प्रेत , पितर , गन्धर्व , यक्ष , किन्नर , नाग आदि के अतिरिक्त भी जलचर , थलचर , नभचर आदि का वर्णन मिलता है | हमारे इतिहास - पुराणों में स्थान - स्थान पर इनका विस्तृत वर्णन भी है | आदिकाल से ही सनातन के अनुयायिओं के साथ ही सनातन



जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य

हिन्दुओं की आस्था का एक केन्द्र भगवान जगन्नाथ की जगन्नाथ पुरी है। 10वीं शताब्दी में निर्मित यह प्राचीन मन्दिर सप्त पुरियों में से एक है। आज इस लेख में हम आपको जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रोचक और अद्भुत तथ्यों के बारे में बता रहे है।1. पुरी की सबसे खास बात तो स्वयं भगवान जग



अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्मं शुभा शुभम् ;- आचार्य श्री अर्जुन तिवारी जी के बोल

संसार में कर्म ही प्रधान कर्मानुसार ही मनुष्य को सुख - दुख , मृत्यु - मोक्ष आदि प्राप्त होते हैं | कर्म की प्रधानता यहाँ तक है कि जीव को अगला जन्म किस योनि में लेना है यह भी उसके कर्म ही निर्धारित करते हैं | यद्यपि सभी जीवों को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है परंतु इन सबसे ऊपर एक परमसत्ता है द



कुलदेवता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म बहुत ही वृहद होते हुए असंख्य मान्यताओं को स्वयं को समेटे हुए है | सनातन धर्म में समय - समय पर अनेक देवी - देवताओं के साथ ग्रामदेवता , स्थानदेवता , ईष्टदेवता एवं कुलदेवता की पूजा आदिकाल से की जाती रही है | प्रत्येक कुल के एक विशेष आराध्य होते हैं जिन्हें कुलदेवी या कुलदेवता के नाम से जाना



कीर्तन क्या है और कैसे करें

सबसे पहले हम ये जाने की कीर्तन का सही अर्थ क्या है.Kirtan का सही अर्थ मैंने अभी कुछ दिन पहले सुप्रसिद्ध भागवत वाचक Goswami Shri Pundrik Ji Maharaj से जाना उनोहने जो बताया में आज आप लोगो से शेयर करती हूँ.Goswami Shri Pundrik Ji Maharaj के अनुसार हम जब किसी एक विशेष भगव



त्रिकाल संध्या :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ऋषि महर्षियों ने अपने शरीर को तपा करके एक तेज प्राप्त किया था | उस तेज के बल पर उन्होंने अनेकानेक कार्य किये जो कि मानव कल्याण के लिए उपयोगी सिद्ध हुए | सदैव से ब्राम्हण तेजस्वी माना जाता रहा है | ब्राम्हण वही तेजस्वी होता था जो शास्त्रों में बताए गए नियमानुसार नित्य त्रिकाल संध्या का अनु



श्रद्धा एवं विश्वास :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन अनेक विचित्रताओं से भरा हुआ है | मनुष्य की इच्छा इतनी प्रबल होती है कि वह इस संसार में उपलब्ध समस्त ज्ञान , सम्पदायें एवं पद प्राप्त कर लेना चाहता है | अपने दृढ़ इच्छाशक्ति एवं किसी भी विषय में श्रद्धा एवं विश्वास के बल पर मनुष्य ने सब कुछ प्राप्त भी किया है | मानव जीवन में श्रद्धा एवं वि



निर्जला एकादशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के आधारस्तम्भ एवं इसके प्रचारक हमारे ऋषि महर्षि मात्र तपस्वी एवं त्यागी ही न हो करके महान विचारक , मनस्वी एवं मवोवैज्ञानिक भी थे | सनातन धर्म में समय समय पर बताया गया समयानुकूल व्रत विधान यही सिद्ध करता है | विचार कीजिए कि जब ज्येष्ठ माह में सूर्य की तपन एवं उमस से आम जनमानस तप रहा होता



गंगा का महत्त्व :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर मनुष्य को जीवन जीने के लिए वैसे तो अनेक आवश्यक आवश्यकतायें होती हैं परंतु इन सभी आवश्यकताओं में सर्वोपरि है अन्न एवं जल | बिना अन्न के मनुष्य के जीवन की कल्पना करना व्यर्थ है और अन्न का स्रोत है जल | बिना जल के अन्न के उत्पादन के विषय में कल्पना करना वैसा ही है जैसे अर्द्धरात्रि में सू



गंगा दशहरा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*विशाल देश भारत में सनातन धर्म का उद्भव हुआ | सनातन धर्म भिन्न-भिन्न रूपों में समस्त पृथ्वीमंडल पर फैला हुआ है , इसका मुख्य कारण यह है कि सनातन धर्म के पहले कोई धर्म था ही नहीं | आज इस पृथ्वी मंडल पर जितने भी धर्म विद्यमान हैं वह सभी कहीं न कहीं से सनातन धर्म की शाखाएं हैं | सनातन धर्म इतना व्यापक



महेश नवमी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक अंग किसी न किसी मान्यता व परम्परा से जुड़ा हुआ है | चाहे जड़ हो या चेतन , पर्व हो या त्यौहार , यहाँ तक कि समाज का वर्गीकरण भी पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं से ही सम्बन्धित है | आज ज्येष्ठ शुक्लपक्ष की नवमी को "महेश नवमी" के नाम से जाना जाता है



2019 के चुनाव अभियान में मर्यादाएं तार तार

2019 के इलेक्शन संपन्न हुए-गणतांत्रिक प्रक्रियाका एक मील का पत्थर. सारी गहमा-गहमी, उत्तेजना, भाषण, सभाएं इत्यादि कीअभी के लिए तो इति हुई.परन्तु गणतंत्र में चुनाव तो आम बात है और फिरचुनाव होंगे और होते रहेंगे. सभी (आम नागरिक) इस बात से सहमत होंगे किप्रतिस्पर्धता जो गणतंत्र में एक स्वस्थ घटना होनी चाह



प्रकृति और मानव के अटूट प्रेम का पर्व :- वट सावित्री

इस मतलबी सी ,क्रूर दुनिया में,जहाँ लोग प्यासे हैं पानी नहीं,लहू के ।उसी दुनिया का एक खूबसूरत सा चेहरा भी है ,जहाँ किसी और की उम्र बढ़ाने को,व्रत कोई और रखता है ।जी हां उसी चेहरे को हिंदुस्तान कहते हैं ।। ज



पाकिस्तान में हिंदी पाठशाला - दुर्लभ और दिलचस्प लेकिन धार्मिक कट्टरता

भारत और पाकिस्तान सांस्कृतिक एवं भाषाई सभ्यताओं से आज भी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. बंटवारे के बाद भारत ने अपनी प्राचीन सभ्यता को बनाए रख कर एक बेहतर लोकशाही बनने की ओर कदम बढाएं वहीँ पाकिस्तान ने हर वो कदम उठाया कि जिससे वह भारत से खुद को अलग बता सके.दुःख की बात है, सैंतालीस के पहले रावलपिंडी, लाहौर



भगवान कच्छप :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के अनुसार इस महान सृष्टि का संचालन करने के लिए भिन्न-भिन्न जिम्मेदारियों के साथ ब्रह्मा , विष्णु , महेश एवं तैंतीस करोड़ देवी - देवताओं की मान्यताएं दी गई हैं | जहां ब्रह्मा जी को सृष्टि का सृजनकर्ता तो विष्णु जी को पालनकर्ता एवं भगवान शिव को संहारकर्ता कहा गया है | उत्पत्ति , पालन एवं स



अधजल गगरी छलकत जाय :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर जन्म लेने के बाद मनुष्य को कई कर्तव्यों का पालन करना पड़ता है , इन्हीं कर्तव्यों में एक मुख्य कर्तव्य बताया गया है ज्ञान लेना एवं ज्ञान देना | सर्वप्रथम मनुष्य को किसी भी विषय में विधिवत ज्ञान प्राप्त करना चाहिए | उस विषय में पारंगत हो जाने के बाद कि मनुष्य को उस विषय की चर्चा करते हुए क



छल कपट एक दुर्गुण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धरा धाम पर मनुष्य अपने कर्मों के माध्यम से सफलता एवं विफलता प्राप्त करता रहा है | किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम मनुष्य को छलहीन एवं निष्कपट होना परम आवश्यक है | मनुष्य कुछ देर के लिए सफल होकर अपनी सफलता पर प्रसन्न तो हो सकता है परंतु उसकी प्रसन्नता चिरस्थाई नह



निराभिनता का उदाहरण हनुमान जी -- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस समस्त विश्व में जन जन के मनोमस्तिष्क में भारतीयता , बुद्धिमत्ता , वीरता , दासता , कुशलता एवं चातुर्य का प्रतीक माने जाने वाले पवनपुत्र , केशरीनन्दन , रामदूत बजरंगबली का चित्र अवश्य अंकित होगा | यदि निराभिमानता (अभिमान रहित) का उदाहरण भारतीय ग्रंथों में ढूँढ़ा जाय तो एक ही चरित्र उभर कर सामने आता



हनुमान जन्मोत्सव :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन हिन्दू धर्म के चरित्रों का यदि अवलोकन करके आत्मसात करने का प्रयास कर लिया जाय तो शायद इस संसार में न तो कोई समस्या रहे और न ही कोई संशय | हमारे महान आदर्शों में पवनपुत्र , रामदूत , भगवत्कथाओं के परम रसिया अनन्त बलवन्त हनुमन्तलाल जी का जीवन दर्शन दर्शनीय है | हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने में य



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