ईश्वर की शरण में ही सच्चा सुख मिलता है :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद कोई भी प्राणी दुख नहीं पाना चाहता | चाहे वह अच्छे कर्म करने वाला हो या बुरे कर्म करने वाला | अच्छे बुरे सभी लोग सुख ही पाना चाहते हैं क्योंकि सुख ही , आनंद की आत्मा का मूल स्वभाव है | इस सुख को प्राप्त करने के लिए कोई दान , पुण्य , परोपकार आदि अच्छे कर्म करता है और को



करि पूजा नैवेद्य चढ़ावा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में भक्तजन सदैव से निर्गुण निराकार एवं सगुण साका की आराधना करते आये हैं | कोई निराकार ब्रह्म की पूजा करता है तो कोई साकार की | साकार को जाने बिना निराकार को नहीं जाना जा सकता है | जो प्रेम , भाव एवं लीला का अनुभव सगुण साकार में हो सकता है वह निर्गुण निराकार में शायद ही हो पाये | कुछ लोग कह



भावसाध्य साधन :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में अनेक प्रकार की जिज्ञासा उत्पन्न होती रहती हैं इन जिज्ञासाओं को शांत करने का सुगम उपाय है सत्संग करना | बिना सत्संग के मनुष्य का विवेक जागृत नहीं होता परंतु सत्संग करना भी कोई सरल बात नहीं है | यह भी एक साधना है | बिना साधना के कुछ भी नहीं प्राप्त किया जा सकता | बिना साधन के कोई भी साध



स्वधर्म एवं परधर्म :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों ग्रंथ मानव जीवन में मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं | इन्हीं ग्रंथों का मार्गदर्शन प्राप्त करके मनुष्य अपने सामाजिक , आध्यात्मिक एवं पारिवारिक जीवन का विस्तार करता है | वैसे तो सनातन धर्म का प्रत्येक ग्रंथ एक उदाहरण प्रस्तुत करता है परंतु इन सभी ग्रंथों में परमपूज्यपाद , कविकुलश



अकाल मृत्यु क्या है ? :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेने के पहले मनुष्य के जीवन एवं मृत्यु का निर्धारण हो जाता है | परमात्मा ने एक निश्चित आयु देकर सभी जीवो को इस धरा धाम पर भेजा है | कलयुग में मनुष्य की आयु १०० वर्ष की निर्धारित की गई है परंतु जब इसके पहले मनुष्य की मृत्यु हो जाती है तो उसे अकाल मृ



भगवान का कच्छप अवतार :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस विशाल सृष्टि की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के द्वारा हुई , इसका पालन भगवान श्री हरि नारायण करते हैं और संहार करने का भार भगवान शिव के ऊपर है | सनातन धर्म में उत्पत्ति अर्थात सृजन कर्ता , पालक एवं संहारक त्रिदेव को माना जाता है | सृजन एवं संहार के बीच में पालन करने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य भगवान विष्णु



भगवान नरसिंह का अवतार :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस समस्त सृष्टि में ईश्वर कण कण में समाया हुआ है | कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां ईश्वर की उपस्थिति ना हो | संसार में समस्त जड़ चेतन की रचना ईश्वर ने ही की है | ईश्वर के लिए सभी समान है इसीलिए भी ईश्वर को समदर्शी कहा गया है | ईश्वर कभी भी भेदभाव नहीं करता बल्कि सबको समान रूप से वायु , सूर्य का प्रक



मंथरा के ऋणी….. श्रीराम

‘मंथरा’ येशब्द सुनते ही हमारे सामने एक अधेड़ उम्र की कुरूप,घृणित किन्तु रामायण की अत्यंत महत्वपूर्ण स्त्री की छवि बन जाती है जिसकानाम था ‘मंथरा’। इस पात्र ने हमारे मन मस्तिष्क पर इतना गहरा प्रभाव छोड़ा है कि आजभी जब हम किसी नकारात्मक स्वभाव वाली महिला को देखते हैं तो के



भगवन्नाम ही श्रेष्ठ साधन :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर आकर मनुष्य का परम उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति ही होता है | *ईश्वर को प्राप्त करने के लिए मनुष्य अनेकों प्रकार के साधन करता है , भिन्न-भिन्न उपाय करके वह भगवान को रिझाना चाहता है | *भगवान को प्राप्त करने के चार मुख्य साधन हमारे शास्त्रों में बताए गए हैं जिन्हें "साधन चतुष्टय" कहा जाता है



सनातन में सनातन क्या है ?:- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में अनादिकाल से जो धर्म स्थित है उसे सनातन धर्म कहा जाता है | सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो | जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है | जैसे सत्य सनातन है , ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है , मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर



सनातन के रहस्स :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर आदिकाल से स्थापित एकमात्र धर्म सनातन धर्म को माना गया है , धीरे-धीरे सनातन धर्म से भी अनेकों शाखाएं निकली जिन्हें लोगों ने अपने अनुसार नाम देकर धर्म बता दिया | सनातन धर्म इतना अलौकिक एवं दिव्य है कि इसे जान पाना , समझ पाना किसी साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं है | वैसे तो कहा जाता



सर्वभूत हितो रत: :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य भगवान को प्राप्त करने का अनेकों साधन साधता है | भगवान को प्राप्त करने के अनेक मार्ग हमारे सनातन धर्म में बताये गये है परंतु इन सभी साधनों में प्रधान साधन है "सर्वभूत हित "अर्थात जीव मात्र में परमात्मा का दर्शन करते हुए उनका हित करना | भगवान जीव मात्र में स्थित ह



अपने मान का हनन करके बने हनुमान :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में आदिकाल से लेकर आज तक अनेक भक्त हुए ! अनेकों भक्तों को तो भक्त शिरोमणि तक की उपाधि दे दी गई परंतु भगवान राम का प्रिय दास होने का सौभाग्य मात्र हनुमान जी को ही प्राप्त हुआ | हनुमान जी के अनेकों नाम इस संसार में विख्यात है परंतु सबसे लोकप्रिय हनुमान ही हुआ | हनुमान जी क्या है ? इसको बताते



‘कौमी एकता’ उर्फ़ "राष्ट्रीय एकता"

एकतामें बड़ी शक्ति होती हैं । वह परिवार, समाज, देशबहुत ज्यादा तरक्की करता हैं जहाँ एकता होती हैं. एकता हमें एक दूसरे का मान-सम्मानकरना सिखाती हैं । एकता हमें बुराइयों के खिलाफ़ लड़ने की ताकत देती हैं । एकता हीमानव जाति की पहचान हैं ।‘कौमी एकता’ मुख्यतः राष्ट्रीय एकता की



अभिलाष

जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे?सब कहते तुम व्याप्त मही हो,पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो?नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ,इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि को तुम रचते हो।कहते कण कण में बसते हो,फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ?सक्त हुआ मन निरासक्त पे,अभिव



भक्ति स्वतंत्र सकल गुन खानी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में भक्ति का बहुत बड़ा महत्व है | भक्ति क्या है ? इसका विश्लेषण हमारे शास्त्रों में बहुत ही विधिवत किया गया है | वैसे तो भक्ति नौ पिरकार की कही गयी है परंतु मुख्यत: भक्ति दो प्रकार की बताई गई हैं :- साध्य भक्ति एवं साधन भक्ति | साध्य भक्ति क्या है ? इसके व



उत्पन्ना एकादशी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों व्रत उपवास बताए गए है जो मनुष्य को भौतिकता से कुछ क्षण के लिए उबार कर सात्त्विकता की ओर अग्रसर करते हैं | अपनी संस्कृति एवं संस्कार को.जानने का सशक्त साधन हैं समय समय पर पड़ने वाले हमारे व्रत एवं उपवास | वैसे तो सनातन धर्म में व्रत उपवासों की वृहद श्रृंखला है परंतु कुछ व्पत वि



अन्नदाताओं का मसला है।

अन्नदाताओं का मसला है। कानून घिर गया।ठंड़ीयो से खेलेंगे, दिल्ली बॉर्डर को घेरेंगे।कोरोना को डंडा-लाठियों से किसान पिटेंगे।दिल्ली में घुसने की देरी है, अब किसानों की बारी है।काला कानून वापस लेने की तैयारी है। जय किसान।जिसको आना है बॉर्डर आओ, बुराड़ी को न जाना है।कोरोना मर गया। दिल्ली में फस गया।कोरोना



कर्तिक पूर्णिमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धरा धाम पर प्रतिष्ठित होने वाला एकमात्र धर्म सनातन धर्म मानव मात्र का धर्म है क्योंकि सनातन धर्म ही ऐसा दिव्य है जो मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हुए एक दूसरे को पर्व त्योहारों के माध्यम से समीप लाने का कार्य करता है | सनातन धर्म में वर्ष के प्रत्येक माह में कुछ ना कुछ पर्व ऐसे मन



तुलसी विवाह एवं पंचकोसी परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक कार्य शुभ कर्म करके तब प्रारंभ करने की परंपरा रही है | विगत चार महीनों से सभी शुभ कार्य चातुर्मास्य के कारण बंद पड़े थे , आज देवोत्थानी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के जागृत होने पर सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे | शुभ कार्य प्रारंभ होने से पहले मनुष्य के द्वारा कुछ अ



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