“दोहा”

“दोहा” आर पार की खेलते, शेष रही जो खेल लुक्का छिप्पी हो गयी, मन में पाके मैल॥ सौ सुनार की ठुकठुकी, इक लुहार का छैल आभा आभूषण घटे, फलित नहीं यह गैल॥ देख नमूना आँख से, आर पार का सार,तहस नहस किसका हुआ, चाल हुई बेकार।। बदले में जलते रहे, तेरे भी घर बार मंशा न नापाक करो, कायर



“दोहा”

“दोहा” आर पार की खेलते, शेष रही जो खेल लुक्का छिप्पी हो गई, मन में लाये मैल॥ सौ सुनार की ठुकठुकी, इक लुहार के हाथ आभा आभूषण घटे, फलित नहीं यह साथ॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



दोहा

दोहा मन में ऐसी लालसा, मिलना हो हर रोज समय नहीं मिलता सखे, ए टी एम की खोज।। होने देती है नहीं, पहर हमारी भेंट कभी खड़े है लाइना, कभी पछाड़े नेट।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



“दोहा मुक्तक”

“दोहा मुक्तक” कली कली कहने लगी, मत जा मुझको छोड़ कल तो मैं भी खिलूंगी, पुष्प बनूँगी दौड़ नाहक न परेशान हो, डाली डाली मौर महक उठूँगी बाग में, लग जाएगी होड़॥ महातम मिश्रा, गौतम गोरखपुरी



"दोहा"

दोहा अपने आप में, रखता सुंदर भाव जागरूक करता सदा, लेकर मोहक चाव।। छोटी छोटी बात से, मन को लेता मोह चकित करे हर मोड़ पे, वरे न बैर बिछोह।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



दोहा-छंद :

दोहा-छंद : गहमा गहमी खूब है, कहीं नमक औ नोट। शोर मचाएँ मतलबी, जिनकी मंशा खोट।। वक्त तख्त के लालची, देते सबको चोट। कर देते गुमराह वे , झपट लेत है वोट।। महातम मिश्रा, गौतम गोरखपुरी



“दोहावली”

“दोहावली” लिखने बैठा वयखता, किसका लिया उधार पूछा माँ से तूँ बता, कैसे हौं उद्धार॥-1 बोली जननी लाड़ले, तूँ तो खाटी मूर जा औरों से पूछ ले, देख रहे सब घूर॥-2 बोले पिता तपाक से, दे दे मेरा सूद गिनती करिकरि थक गया, बैठा आँखें मूद॥-3 भैया भाभी सो गए, बंद किए किरदार हिस्सा किस्सा चातु



नर पिशाच



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x