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कहानी

कहानी से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

तत त्वम् असि

तत त्वं असि रोज की तरह सब काम काज समेट ऑफिस से घर पहुचा कि चलो भाई इस व्यस्त भागदौड़ की जिंदगी का एक और दिन गुजर गया,अब श्रीमती जी के साथ एक कप चाय हो जाये तो जिंदगी और श्रीमती जी दोनों पर एहसान हो जाये।खैर ख्यालों से बाहर भी नही आ पाया था कि श्रीमती जी का मधुर स्वर अचानक


अब पछताये क्या होत -कहानी

विनय के घर आज हाहाकार मचा था .विनय के पिता का कल रात ही लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया .विनय के पिता चलने फिरने में कठिनाई अनुभव करते थे .सब जानते थे कि वे बेचारे किसी तरह जिंदगी के दिन काट रहे थे और सभी अन्दर ही अन्दर मौत की असली वजह भी जानते थे किन्तु अपने मन को समझाने के लिए सभी बीमारी को ही


हास्य कहानी

एक दिन एक कुत्ता जंगल में रास्ता भटक गया..तभी उसने देखा, एक शेर उसकी तरफ आ रहा है..।कुत्ते की सांस रूक गयी.."आज तो काम तमाम मेरा..!" उसने सोचा..Management ka lesson yaad aa gaya aurफिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ पड़ी देखि..वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा..और ज


आप जिसने प्यार करते है | हो सकता है वो आप से धोखा कर रहा हो .......

www.allrpcapp.comएक बार एक लड़के ने एक सांप पाला , वो सांप से बहुत प्यार करता था उसके साथ ही घर में रहता .. एक बार वो सांप बीमार जैसा हो गया उसने खाना खाना भी छोड़ दिया था , यहाँ तक कई दिनों तक उसने कुछ नहीं खाया तो वो लड़का परेशान हुआ और उसे वेटरिनरी डॉ के यहाँ ले के गया .... डॉ ने सांप का चैक अप किया


"रुबिया"

"रुबिया" रुबिया के आँखों में आंसू रुकने के नाम नहीं ले रहे थे। हबस-हबस कर रोये जा रही थी और आंसुओं की धार को अपने दुपट्टे में समेटते जा रही थी। कोई चारा भी तो नहीं था, अपना घर होता तो अबतक कइयों की पुचकार से अघा गई होती। कइयों के कंधे का सहारा मिल गया होता, और उसके आंसू


इंसानी परी (पेरीफेरल एंजल) कॉमिक

नीरजा भनोट को काव्य कॉमिक के रूप में श्रद्धांजलि देने की कोशिश की है . अब यह आप बताइये इसमें कितना सफल रही मेरी टीम .Available (Online read or download):Readwhere, Scribd, Author Stream, ISSUU, Freelease, Slideshare, Archives, Fliiby, Google Books, Play store, Daily H


मतलबी मंशा

वह रात भी एक रात थी, जिसके आगोश में कितनों के अरमान डोली चढ़कर जनवासे की झालर की तरह झूम रहे थे तो कितनों की हाथों में पिया की मेंहदी लाल ठस्स होकर अटखेलियां कर रही थी। कहीं शादी की शहनाई तो कहीं बैंड की बांसुरी अपने अपने सुर पर लोगों को नाचने पर मजबूर कर रही थी। कभी गर्मी और बैसाख का महीना अमूमन शा


प्रेरक है भारतीय गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का जीवन

बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गाँव में 2 अप्रैल 1942 को जन्मे डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह गणित के असंख्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत और देश का गौरव हैं। उन्होंने बिहार में ही रहकर मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वह बचपन से ही पढाई में बहुत तेज़ थे। कहा जाता है कि पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाई के द


सनूबर : एक

(धारावाहिक उपन्यास : पहली किश्त)लोग मुझसे अक्सर पूछते हैं कि फिर सनूबर का क्या हुआ... आपने उपन्यास लिखा और उसमें यूनुस को तो भरपूर जीवन दिया. यूनुस के अलावा सारे पात्रों के साथ भी कमोबेश न्याय किया. उनके जीवन संघर्ष को बखूबी दिखाया लेकिन उस खूबसूरत प्यारी सी किशोरी सनूबर के किस्से को अधबीच ही छोड़ दि


"कचकच और कलरव"

"कचकच और कलरव" बैंक पुरानी नोट लेने के लिए नई नोट देने को तैयार है, सरकार भी साथ है, दूध वाला उधार देने को राजी है, सब्जी नगद, राशन कुछ तो है घर में, पुराने नोट से पेट्रोल मिल ही रहा है। अब तुम्हें क्या चाहिये, चिल्ल पो मत मचाओ, जो भी बन जाय बना लो, खा लेंगे। बिना पैसे क


शाकिर उर्फ....

एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाकर ही वह जनरल-बोगी के अंदर घुस पाया। थोड़ी भी कमी रहती तो बोगी से निकलते यात्री उसे वापस प्लेटफार्म पर ठेल देते। पूरी ईमानदारी से दम लगाने में वह हांफने लगा, लेकिन अभी जंग अधूरी ही है, जब तक बैठने का ठीहा न मिल जाए। बोगी ठसाठस भरी थी। साईड वाली दो सी


पहचान : उपन्यास अंश

यहकोतमा और उस जैसे नगर-कस्बों में यह प्रथा जाने कब से चली आ रही है कि जैसे ही किसी लड़के के पर उगे नहीं कि वह नगर के गली-कूचों को ‘टा-टा’ कहके ‘परदेस’ उड़ जाता है।कहते हैं कि ‘परदेस’ मे सैकड़ों ऐसे ठिकाने हैं जहां नौजवानों की बेहद ज़रूरत है। जहां हिन्दुस्तान के सभी प्रान्त के युवक काम की तलाश में आते है


नरगिस

पता नहीं नरगिस नाम क्यों रखा गया था उसका। सांवली सूरत, कटीले नक्श और बड़ी अधखुली आंखों के कारण ही नरगिस नाम रखा गया होगा। नरगिस बानो। बिना बानो के जैसे नाम में कोई जान पैदा न होती हो। नाम कितना भी अच्छा क्यों न हो तक़दीर भी अच्छी हो ये ज़रूरी नहीं। नरगिस अपने नाम के मिठास और खुश्बू से तो वाकिफ़ थी लेकि


प्रणय पात्र

रोहित का मोबाईल फिर बजा. अब तक न जाने कितनी बार बज चुका था. इतनी बार बजने पर उसे लगा कि कोई तो किसी गंभीर परेशानी में होगा अन्यथा इतने बार फोन न करता. अनमना सा हारकर रोहित ने इस बार फोन उठा ही लिया. संबोधन किया हलो..उधर से आवाज आई...भाई साहब नमस्कार, गोपाल बोल रहा हूँ. बह


उपहार

एक विप्र का मित्र किसी महात्मा का शिष्य बन गया। विप्र को यह बात अच्छी नहीं लगी। वह उस महात्मा के पास जाकर उनको गालियां देने लगा। JYOTISH NIKETAN: उपहार


“दीया और माँटी”

“दीया और माँटी” राम राम झिनकू काका, कैसे हैं आप.......सब खैरियत तो है न......... कब पधारे बबुआ, बहुत दिन बाद गांव याद आया...........ठीक हूँ बचवा, अब क्या हाल और क्या चाल, न चाक में दम रहा न इन बाजुवों में। मैं मॉंटी और मेहनत सब के सब बूढ़े हो गए। अब तो दीये पर लाली भी नही


"भागवत की कजरी"

कहानी....... आज कजरी बहुत खुश है मैके जाने का उसका सपना पूरा होने वाला है। है न अजीब बात, किसी लड़की को मैके जाने का सपना देखना पड़े यह कम हैरत की बात नहीं है। झिनकू भैया की लाड़ली कजरी, केवल उनकी ही बेटी नहीं बरन पूरे गाँव की दुलारी बेटी है। गरीबी तब खटक जाती है जब वह कि


द्वंद ... जारी है.

द्वंद ... जारी है. राजस्थान के चाँदा गाँव में स्नेहल एक घरेलू जाना पहचाना नाम था. गाँव के कान्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली स्नेहल पढ़ाई में अव्वल थी. मजाल कि उसके रहते कोई कक्षा में प्रथम आने की सोच भी लेता. इसके साथ वह थी भी बला की खूबसूरत. घर- बाहर सब उसे प्यार करते थे,


तुम्हारे बाद

खबर आयी कि 'बाबा' का अस्पताल में देहांत हो गया है | खबर ऐसी कि कानो को विश्वास न हो | पर सत्य सामने था, जिसपर अविश्वास नहीं किया जा सकता था | सभी लोग अस्पताल की तरफ भागे जहां 'बाबा' ने अंतिम साँसे ली थी | अस्पताल की साड़ी औपचारिकताएं ख़त्म कर रात बारह बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके घर लाया गया | कड़


समय का उधार (कहानी) #मोहितपन

पणजी स्थित निजी पर्यटन कंपनी में सेल्स मैनेजर आनंद कुमार एक अरसे बाद कुछ दिनों की छुट्टियों पर अपने घर अलीगढ आया था। पहले कभी कॉलेज हॉस्टल से छुट्टियों में घर लौटकर जो हफ़्तों की बेफिक्री रहती थी वो इस अवकाश में नहीं थी। रास्ते में ही आनंद को काम में कुछ अधूरे प्रोजेक्ट्स की बेचैनी सता रही थी। माँ, प


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