कहानी

अधूरा सर्वे

(टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है। )" बहु देखना कौन है? " सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा। माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है



पत्थर दिल

नीरजा और उसकी फॅमिली को आज पुरे आठ दिन हुआ था इस फ्लैट में आये, तक़रीबन सभी पड़ोसियों से बातचीत होने लगी थी।बस अब तक सामने वाले ग्राउंड एरिया के दामोदर जी और उनकी पत्नी से परिचय नहीं हुआ था,उनके घर अब तक किसी पड़ोसी को ना आते-जाते देखा ना बात करते बस हर रोज़ खिड़की से कभी



दोस्ती

दिल्ली का टू बीएचके प्लैट। जहां तीन दोस्त रहते हैं। संजीव, राकेश और राजेश। कॉलेज में तीनों मिले और अब तक साथ हैं। तीनों ही बैचलर। करियर की जदोजहद, पैसे की तंगी और कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए। संजीव और राकेश प्राइवेट कंपनी में काम करते ह



सुलासा और सत्तुका- कहानी

यह उस समय की बात है जब ब्रह्मदत्त बनारस राज्य पर शाषण करते थे. उस राज्य में सुलासा नामक एक सुंदर वेश्या रहती थी. इसके अलावे उस क्षेत्र में सत्तुका नामक एक बलशाली डाकू भी रहता था, जो रात में अमीर लोगों के घरों में घुसकर लूटपाट करता था. एक दिन उस डाकू को पकड़ लिया गया. सुला



आप

आप अजीब शब्द लगता है मुझे क्यूंकि जब लोग मिलते हैं तो अजनबी होते हैं तो आप बोलते हैं. . मगर तुम जब गुस्सा होते थे तब बोला करते , या फिर तब जब बहुत प्यार से बात करनी होती



अभिमान से अपमान : एक बाल कथा

सलोना भालू फुलवारी वन का एक प्रतिभावान खिलाड़ी सलोना भालू किशोरावस्था में ही वह अपनी उम्र से बड़े और अनुभवी खिलाडियों को नाकों चने चबवा देता था। जल्द ही उसका नाम फुलवारी वन और उसके आस-पास के इलाकों में भी फ़ैल गया। केवल एक खेल नहीं बल्कि भाला फेंक, शॉट पुट, 400/800 मीटर



बताओ ना मां क्या मैं सुंदर नहीं हूं ?

मैं सुन्दर नहीं हूँ 'आज घंटों से आइने में खुद को निहार रही थी अंशिका, कभी अपनी आँखों को देखती, कभी अपने गालों को, कभी होंठो को तो कभी नाक को। 'अरे! क्या घंटों से आइने में निहार रही हो अंशी', माँ ने जोर से आवाज लगायी। अंशिका माँ के



"गुलज़ार गली" Part-1

"गुलज़ार गली" भाग-१ hindi poem"तुम्हे जाना तो खुद पे हमें तरस आ गया,तमाम उम्र यूँही हम खुद को कोसते रहें"............"गुलज़ार गली" यही नाम था उस गली का....मैने कभी देखा नहीं था बस सुना था, हर किसी के ज़ुबान पे बस उसी गली की चर्चा रहती "गुलज़ार गली" |तकरीबन डेढ़ महीन



Sketches from Life: एक सुंदर जोड़ी

चंद्रा और मिसेज़ चंद्रा की जोड़ी चंद्रा साब ने गौर से अपना चौखटा शीशे में देखा. ओफ्फो मूंछ सही तरीके से काली नहीं हुई. एक बार फिर काली स्याही का ब्रश लगाया तो तसल्ली हुई. अब ठीक है. सर पर गिनती के बाल बचे हुए थे जिन्हें चंद्रा साब पहले ही का



कहानी अपराधबोध



दलाल

दलाल एक कहानी - लेखन डॉ दिनेश शर्माजून की दोपहरी में मंत्री जी के लम्बा चौड़ेड्राइंग रूम का दृश्य है |घुसते ही बांयी तरफ दीवार से सटे बड़े सोफे परठीक पंखे के नीचे और एयर कंडीशनर के सामने खर्राटे मारती अस्त व्यस्त भगवें कपड़ोमें लिपटी मझौले शरीर वाली एक आकृति लेटी है | पास वाली मेज पर भगवें रंग का एक



पंचतंत्र की कहानी: चूहे की शादी

प्राचीन समय की बात है, नदी में एक ऋषि स्नान कर रहे थे। तभी वहां से एक बाज गुजर रहा था, जो अपने पंजों में एक चूहे को पकड़े हुए था। अचानक उस बाज के पंजे से वह चूहा छूट गया और ऋषि के हाथों पर आ गिरा। ऋषि को डर हुआ कि अगर वह चूहे को अकेला छोड़ देता, तो वह उसके शरीर पर उछलेगा,



जीजिविषा



दम तोड़ती भावनायें

"क्या ,आज भी तुम बाहर जा रहे हो ??तंग आ गई हूँ मैं तुम्हारे इस रोज रोज के टूर और मिटिंग से ,कभी हमारे लिए भी वक़्त निकल लिया करो। " जैसे ही उस आलिशान बँगले के दरवाज़े पर हम पहुंचे और नौकर ने दरवाज़ा खोला ,अंदर से एक तेज़ आवाज़ कानो में पड़ी ,हमारे कदम वही ठिठक गये। लेकिन तभी बड़ी शालीनता के साथ नौकर न



डिजिटल भी और सिंगल भी

पबजी गेममें उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधेघंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेबल 30 पार कर हीं लिया। डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद उसने पबजी गेम का 30 वां लेबल पार कर लिया था



Sketches from Life: नकली मूर्ती

शादी में जाने की तैयारी पूरी हो चुकी थी. और लो टैक्सी भी आ गई. सामान गाड़ी में डाल दिया और दोनों पिछली सीट पर बैठ गए. चंद्रू ड्राईवर से बोला,- चलो भई स्टार्ट!गाड़ी गीयर बदलते हुए हाईवे पर आ गई और देहरादून की चार घंटे की यात्रा शुरू हो गई. उसके साथ ही मन में विचारों की गाड़ी



मन का प्रेत

मन का प्रेतरामा को इस समय पैर बड़े भारी लग रहे थे। हर कदम मन भर का लगता था। बाबा सुबह से खेतों में काम कर रहे थे, दोपहर का खाना तो माँ दे आई थी लेकिन रात का खाना रामा को लेकर जाना था। माँ ने खाना रामा के हाथ में देकर सात बजे ही रवाना कर दिया ताकि वो जल्दी ही बाबा को खाना पहुंचा कर वापस आ जाए। मगर राम



मि. ख़ का शहर

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उधार

पूरे दिन बरसकर मेघराज सांस लेने के लिए थम गए थे। अब कीड़े-मकोड़ो के लिए उत्सव का समय था। ढलता हुआ सूरज किसी खुशहाल किसान की तरह सीना फुलाए अपने घर की तरफ एक खूबसूरत गीत गुनगुनाता हुआ बढ़ रहा था। बादल रहने से अंधेरा ज्यादा जल्दी होता हुआ प्रतीत होता था। श्याम के 6 बजे थे। मगर मुझे घर जाने की कोई जल्दी न



आतंकवादी चूहा

मासूमियतका असली मतलबआप किसी भीबच्चे या जानवर कीनजरों से नजरेंमिलाकर पता करसकते हैं। शायदइसी सच्चाई से प्रेरितहोकर हमारे पूर्वजोंने इंसान काशरीर और जानवरोंकी गर्दनों को जोड़करभगवानों की कल्पनाकी थी। इसीके चलते हमेंये भगवान बड़े भातेहैं जैसे - गणेशजी। मगर इनकेवाहन मूषक राज कोभगवान की मोहरलगने के बादभी स



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