कहानी



किताब का हक

मनीषा का ब्याह स्कूल पास होते ही हो गया था,वो पढ़ने में बहुत तेज थी, लेकिन उसकी सुनता कौन?12 वीं पास होते हीउसके हाथ पीले कर दिये गए, वजह थी कि उसके गांव में कोई कॉलेजनहीं था, उसकी सभी दूर की बहनें शहर में रहती थी, तो उससे ज्यादा पढ़-लिखगई। अब उसकी उम्र 32 साल हो चुकी थी।



सुनैना

वो देख नहीं सकती थी लेकिन अहसास पढ़ सकती थी, पांच साल तक उसकी आंखों की रोशनी ठीक ठाक थी, लेकिन एक बीमारी ने उसकी आंखों की रोशनी छीन ली। तभी उसका सार्थक सा नाम सुनैना उसके माता पिता को ना जाने क्यों अर्थहीन लगने लगा। कभी वो अपने भाग्य को कोसते तो कभी सुनैना की किस्मत को तो कभी कभी सुनैना को ही। सुन



कम्मो

बात पिछले बरस की है... इसीकोरोना के चलते देश भर में लॉकडाउन घोषित हो गया था... हर कोई जैसे अपने अपने घरोंमें कैद होकर रह गया था... ऐसे में प्रवासी मजदूर – जो रोज़ कुआँ खोदकर पानी पीतेहैं – जिन्हें आम भाषा में “दिहाड़ी मजदूर” कहा जाता है - दिल्ली में या और भी जिनशहरों में थे उन सभी को चिन्ता सतानी स्वा



जहां चाह वहां राह

मानसीको दिल्ली आए हुए 6 महीने ही हुए थे, अभी उसके पति का मुंबई से दिल्ली ट्रांसफरहुआ था, जो कि एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। मानसी पूरा दिन घर पर अकेलामहसूस करती थी, हालांकी खाना वो खुद ही पकाती थी फिर भी बचे हुए वक्त में क्या करे? ये



असली मर्द

सीमा और मनोज एक हीगांव में पले-बढ़े थे। आज पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर मनोज अपने दोस्त संग पंजालड़ा रहा था। तभी सीमा अपनी सहेली संग वहां आ पहुंची, बगल वाले पेड़ से बेरतोड़ने, एक-एक करके उसने बेर अपने दुप्पटे में लपेट कर बांध लिए।तभी पड़ोस की चंदाकाकी भी आ पहुंचीऔर बोली “अर



प्यार की अमर कहानी

आज अदिती बेहद उदास थी तो सुमित ने उससे पूछा “क्या बात हैतुम्हारा मिज़ाज आज बदला-बदला सा क्यों है ?”“मैंने एक प्रेम कहानी पढ़ ली जिसमें नायिका नायकके चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं।” अदिती ने कहा।“तो नहीं पढ़नी चाहिए थी।” सुमित ने कहा।“बहुत मशहूर थी और बेस्टसेलर भ



क्या आप जानते हैं महर्षि वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ ?

क्या आप जानते हैं महर्षि वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ ? vedvyas kon the in Hindiक्या आप जानते हैं महर्षि वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ ?=========================================================अक्‍सर हमसे पूछा जाता है कि महाभारत किसने लिखी? तो हम यह सुनकर तपाक से जवाब दे देत



चांद के पार चलो।

आज नवीन की पेटिंग ने एक मशहूर कॉम्पीटिशन में पहला स्थान पाया था, आज मेल बॉक्स खोलकर देखा तो वो हैरान हो गया ऐसी तो किसी कॉम्पीटिशन में उसने भाग ही नहीं लिया था, तो फिर ऐसा कैसा हुआ। तभी उसने वहां फोन लगाया तो



घरेलू अतिक्रमण...जब पौधों ने दी इंसान को गाली #ज़हन

कई सालों तक जीतोड़ मेहनत करने के बाद, विशाल का घर बनाने का सपना आखिरकार साकार हो रहा था। ठेकेदार मुख्य जगह के अलावा घर में बगीचा बनाने की बातें कर रहा था।विशाल - "अरे वह कहाँ हो पाएगा, घर में बड़ी कार के अलावा, 2 बाइक, साइकल सब हैं, कैसे पार्क करेंगे?"ठेकेदार - "अरे आप तो परदेसी जैसी बात कर रहे हो, जै



मेरी कहानी

मेरे पास आ कर कभीमेरी कहानी भी सुनो,मैं भी दिल के बहलाने कोक्या क्या स्वाँग रचाता हूँ,आप ही दुख का भेस बदलकरउन को ढूँडने जाता हूँ,सायों के झुरमुट में बैठासुख की सेज सजाता हूँ......-अश्विनी कुमार मिश्रा



उद्गम कहानी का।

उद्गम कहानी का।कहानी समाज से पैदा होने वाली बीज हैं।जो उन्ही के दरम्यान रहकर उन्हीं के बीच दफन हो जाती हैं।पर अपनी अभिब्यक्ति से एक नए इतिहास की रचना करती हैं, उसे बदलती नहीं हैं उसके अधूरेपन मे भराव करती हैं। अगर वह ऐसा नहीं करती तो समझो, वह बदलाव के नाम पर इतिहास को नहीं, उसके पात्र को नष्ट करती



कहानी

कहानी ही तो थीख़त्म तो होनी ही थीशुरू हुए थे जो अल्फ़ाज़उन्हें विराम तो लगना थ-अश्विनी कुमार मिश्रा



नौकरी का भूत

[12/09/2020 ]*नौकरी का भूत* (व्यंग्य-कविता)पढ़ लिख के मैं बड़ा हुआ जब, ये मन में मैने ठाना ।जिन सब का था कर्ज पिता पर, वो मुझको जल्द चुकाना ।नौकरी की आस को लेकर, निकला घर से मतवाला ।सफल सफर करके भैया मैं, पहुच गया हूँ अम्बाला।***दो महिनें तक करी नौकरी , मन को थी कुछ ना भायी ।पता चला कुछ भर्ती निकली



मैडम जी कहानी

मैडम जीकुछ देर खामोशकहीं खोई सी बैठी रहीं नीलिमा जी... फिर एक लम्बी साँस भरकर बोलीं “ये बाहर जातेथे तो मैं यहाँ देहरादून आ जाती थी | बेटी भी बाहर ही पढ़ रही थी न, तो मैं अकेलीबम्बई में क्या करती ? अब ये जितने भी हाइली एजुकेटेड लोग होते हैं उनकी तोमीटिंग्स विदेशों में होती ही रहती हैं | आप भी जाती हों



कहानी (चटोरी जिव्हा को साधु का दंड)

कहानी - "चटोरी जिव्हा को महात्मा का दंड"घने जंगल में, एक छोटी सी झोपड़ी जो चारों ओर से विशाल वृक्षों से घिरी हुई थी।मन्त्रोच्चारण से उस शांत वन में संगीत की लहरें-सी उठती रहती थी और जिसे सुनकर पशु-पक्षी भी अपना सुर भूल जाते थे।ऐंस



मोक्ष

मोक्ष*****(जीवन के रंग) बचपन से ही वह सुनता आ रहा है कि जैसा कर्म करोगे-वैसा फल मिलेगा , किन्तु अब जाकर इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि पाप-पुण्य की परिभाषा सदैव एक-सी नहीं होती है। बहुधा उदारमना व्यक्ति को भी कर्म की इसी पाठशाला में ऐसा भयावह दंड मिलता है कि उसकी अंतर्रात्मा यह कह चीत्कार कर उठती है



वो काटा

एक कहानी - वो काटा“मेम आठ मार्च में दो महीनेसे भी कम का समय बचा है, हमें अपनी रिहर्सल वगैरा शुरू कर देनी चाहिए…”डॉ सुजाता International Women’s Day के प्रोग्राम की बात कर रही थीं |‘जी डॉ, आप फ़िक्र मत कीजिए, आराम से हो जाएगा… आप बस अगले हफ्ते एक मीटिंग बुला लीजिये, बात करते हैं सबसे…” मोबाइल पर बात क



देखने का नजरिया* !!

!! *देखने का नजरिया* !!-----------------------------------------------एक दिन एक अमीर व्यक्ति अपने बेटे को एक गाँव की यात्रा पर ले गया | वह अपने बेटे को यह बताना चाहता था वे कितने अमीर और भाग्यशाली है जबकि गाँवों के लोग कितने गरीब है | उन्होंने कुछ दिन एक गरीब के खेत पर बिताए और फिर अपने घर वाप



नौकरानी

नौकरानी********** समीप के देवी मंदिर में कोलाहल मचा हुआ था। मुहल्ले की सुहागिन महिलाएँ पौ फटते ही पूजा का थाल सजाये घरों से निकल पड़ी थीं। उनके पीछे- पीछे बच्चे भी दौड़ पड़े थे। उधर,आकाँक्षा इन सबसे से अंजान सिर झुकाए नित्य की तरह घर के बाहर गली में मार्निंग वॉक कर रही थी । वह भूल चुकी थी कि



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