कहानी

शौचालय का प्रेत भाग - २

उस समय जोग्शवरी रेल्वे स्टेशन मे प्लेटफार्म के आगे की तरफ से उसके कुछ मध्य भाग तक कम रोशनी हुआ करती थी और प्लेटफार्म नंबर ३ मे तो बिल्कुल ही कम रोशनी होती थी। मुझे पेशाब आई थी तो मैं उस प्लेटफार्म के एकलौते सार्वजनिक शौचालय की तरफ बढा जो प्लेटफार्म नंबर २



शौचालय का प्रेत भाग - १

ये घटना सन् २०१३ की है, मैं तब मुँबई के Posh Area लोखंडवाला के पास के ओशिवरा के FAASOS fast food chain के एक Outlet में Store Manager के रूप मे काम करता था। वहाँ



कुछ तो लोग कहेंगे

"अरे माँ तुंम कहाँ हो ?"" क्यो क्या हुआ बेटा ? थोड़ा थक गयी हू |""कितनी बार कहा है कि काम कम किया करो। तुम हो कि मानती ही नही |"" कितना कहती हू कि जल्दी से एक बहू ले आ पर तू है कि सुनता ही नही |"" अरे माँ अबचुप भी हो जाओ जब देखो शादी की रट लगाए रहती हो | और जब शादी हो जाएगी तो फिर आपकी शिक



सही तो है - एक लघुकथा

आज रिंकू को आने दो आते ही कहती हूं बेटा जल्दी ही मेरा चश्मा बदलबा दो अब आँखों से साफ नही दिखता।लो आ भी गया रिंकू आतुर होकर मैन की बात कह डाली। " अरे माँ दो मिनट चैन से बैठने भी नही देती कौन सी तुम्हे इस उम्र में कढाई सिलाई करनी है? और फ



एक अरसे बाद - एक लघु कथा

एक अरसे बाद आज मायके जाने का मौका मिला है मौसी की बेटी की शादी जो है । बस स्टैंड पर उतरी तो लगा जैसे अपना शहर आ गया ।कितने भी साल हो जाये बचपन का शहर हमेशा दिल के करीब रहता है। एक लड़के को खड़ा देखा तो पूछा " बेटा यहाँ मंगल चाचा की मिठाई की दुकान हुआ करती थी अब नही दिख रही?"उसने जबाब दिया "ऑन्टीवो



बिछिया: एक रुकी हुई माफ़ी

अनिमेश आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था । बचपन से हीं अनिमेश के पिताजी ने ये उसे ये शिक्षा प्रदान कर रखी थी कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक आदमी का योग्य होना बहुत जरुरी है। अनिमेश अपने पिता की सिखाई हुई बात का बड़ा सम्मान करता था । उसकी दैनिक दिनचर्या किताबों से शुरू होकर किता



सरहदपार वाला प्यार

सरहदपार वालाप्यारगुलज़ारसाहब ने क्या ख़ूब लिखा है... आँखों कोवीसा नहीं लगता,सपनो की सरहद नहीं होती...मेरी यहकहानी भी कुछ ऐसी ही है, इन पंक्तियों के जैसी, जिसे किसी वीसा या पासपोर्ट कीज़रूरत नहीं है आपके दिल तक पहुंचने के लिए. बस यूँ ही ख़्व



सोना के बेटे की-" हीरा" बनने की कहानी

चलिये ,सोना की कहानी को आगे बढ़ाते है और जानते है कि -कैसे उनका बेटा हीरा बन चमका और अपने माँ के जीवन में शीतलता भरी रौशनी बिखेर दी। सोना की बाते सुन माँ ने उन्हें पहले चुप कराया और फिर सारी बात बताने को कहा। सोना ने बताया कि- मेरी बहन ने मेरे बेटे को अब आगे पढ़ाने से म



कहानी सोना की

"सोना "हाँ ,यही नाम था घुंघट में लिपटी उस दुबली पतली काया का। जैसा नाम वैसा ही रूप और गुण भी। कर्म तो लौहखंड की तरह अटल था बस तक़दीर ही ख़राब थी बेचारी की। आज भी वो दिन मुझे अच्छे से याद है जब वो पहली बार हमारे घर काम करने आई थी। हाँ ,वो एक काम करने वाली बाई थी। पहली नज़र मे देख कर कोई उन्हें काम वाली



कालिदास और कालीभक्त

इस कथा के दो पात्र है . एक भक्ति रस का उपासक तो दूजा श्रृंगार रस का उपासक है. दोनों के बीच द्वंद्व का होना लाजिमी है. ये कथा भक्ति रस के उपासक और श्रृंगार रस के उपासक मित्रों के बीच विवाद को दिखाते हुए लिखा गया है.ऑफिस से काम निपटा के दो मित्र कार से घर की ओर जा रहे थे



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो



काटो नहीं फुफकारो

गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक गांव के पास से गुजरे। गांव के बच्चों को एक खेल के मैदान में सहम कर खड़े हुए देखा। गौतम बुद्ध ने बच्चों से पूछा कि किस बात से वे डरे हुए हैं?बच्चों ने गौतम बुद्ध को बताया कि यहां पर वो सारे गेंद से खेल रहे थे। लेकिन वह गेंद उस बरगद के पेड़ के नीचे चली गई है। अब वह अ



उसने कभी निराश नही किया -1

कहानी उसने कभी निराश नहीं किया-1विजय कुमार तिवारी"अब मैं कभी भी ईश्वर को परखना नहीं चाहता और ना ही कुछ माँगना चाहता हूँ। ऐसा नहीं है कि मैंने पहले कभी याचना नहीं की है और परखने की हिम्मत भी। हर बार मैं बौना साबित हुआ हूँ और हर बार उसने मुझे निहाल किया है।दावे से कहता हूँ-गिरते हम हैं,हम पतित होते है



उसने कभी निराश नही किया -2

कहानीउसने कभी निराश नहीं किया-2विजय कुमार तिवारीसौम्या शरीर से कमजोर थी परन्तु मन से बहुत मजबूत और उत्साहित। प्रवर जानता था कि ऐसे में बहुत सावधानी की जरुरत है। जरा सी भी लापरवाही परेशानी में डाल सकती है। पहले सौम्या ने अपनी अधूरी पढ़ायी पूरी की और मेहनत से आगे की तैयारी



उसने कभी निराश नही किया -3

कहानीउसने कभी निराश नही किया-3विजय कुमार तिवारीजिस प्रोफेसर के पथ-प्रदर्शन में शोधकार्य चल रहा था,वे बहुत ही अच्छे इंसान के साथ-साथ देश के मूर्धन्य विद्वानों में से एक थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की निर्धारित तिथि के पूर्व शोध का प्रारुप विश्वविद्यालय मे जमा करना था। मात्र तीन दिन बचे थे।विभागाध्य



उसने कभी निराश नही किया

कहानीउसने कभी निराश नहीं किया-4विजय कुमार तिवारीप्रेम में जादू होता है और कोई खींचा चला जाता है। सौम्या को महसूस हो रहा है,यदि आज प्रवर इतनी मेहनत नहीं करता तो शायद कुछ भी नहीं होता। सब किये धरे पर पानी फिर जाता। भीतर से प्रेम उमड़ने लगा। उसने खूब मन से खाना बनाया। प्रवर की थकान कम नहीं हुई थी परन्



उसे कोई नहीं समझता

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गांव की लड़की का अर्थशास्त्र

कहानीगाँव की लड़की का अर्थशास्त्रविजय कुमार तिवारीगाँव में पहुँचे हुए अभी कुछ घंटे ही बीते थे और घर में सभी से मिलना-जुलना चल ही रहा था कि मुख्यदरवाजे से एक लड़की ने प्रवेश किया और चरण स्पर्श की। तुरन्त पहचान नहीं सका तो भाभी की ओर प्रश्न-सूचक निगाहों से देखा। "लगता है,चाचा पहचान नहीं पाये,"थोड़ी मु



Sketches from Life: जीवन धारा

गुड़िया का नाम श्वेता जरूर था पर रंग थोड़ा सांवला ही था. तीन साल की श्वेता सारे कमरों में उछलती कूदती रहती थी. उसकी दोस्ती महतो से ज्यादा थी जो उसे किचन से कुछ ना कुछ खाने के लिए देता या फिर रोती तो दूध की बोतल तैयार कर के दे देता था. शाम की दोस्ती दादी से थी जो उससे धीमी ध



हमसे प्यार करले तू (Humse Pyaar Karle Tu )- तेरी मेरी कहानी

Humse Pyaar Karle Tu Lyrics of Teri Meri Kahaani (2012): This is a lovely song from Teri Meri Kahaani starring Shahid Kapoor and Priyanka Chopra. It is sung by Mika Singh, Shreya Ghoshal, Wajid Khan, Aftab Sabri and Shabab Sabri and composed by Sajid-Wajid.तेरी मेरी कहानी (Teri Meri Kahaani )हमसे प्



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