कहानी



दी सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ़ एरियरीटी : फिल्म समीक्षा ( एनिमेशन )

वैसे तो मुझे एनिमेशन फिल्मे देखना कुछ ख़ास पसंद नहीं है , इसके बावजूद मैंने अब तक ढेर सारी एनिमेशन फिल्मे देखि है ! जिनमे से सिर्फ गिनी चुनी फिल्मे ही उल्लेखनीय है !यह फिल्म भी उन्ही यादगार और प्यारी फिल्मो में से एक है , मैंने किसी के आग्रह पर यह फिल्म देखि थी ,वैसे मै बहुत कम फिल्मे अंग्रेजी में दे



विधि मंत्री की विकलाँग विधा

(यह लेख हमने कुछ वर्ष पूर्व लिखा था और कई स्थानों पर प्रकाशित हुआ था, परंतु भारत देश में घोटाले, घोटालेबाज व घोटालागाथाएँ, धर्म की भांति सनातन हैं, अतः यह लेख आज भी सामयिक है, सुधी पाठकों की सेवा में इस वेबसाईट पर भी समर्पित)कुछ समय प



'क्या आपने कभी किसी औरत को जिंदा जलते देखा है?'

गोलिये की बहू के मरने की ख़बर मिली दोपहर को. स्कूल से आए और बैग फेंका. और पता चला गोलिये की बहू मर गई थी. नाम याद नहीं है उसका. गांव में सब गोलिये के बहू ही कहते थे.पांचवी क्लास में थी उस वक़्त. पर इतना पता था की गोलिये की बहू बड़ी दिलदार औरत है. मम्मी से कहा करती थी कि कुछ भी हो जाए अपने छोटे बेटे को



"पल्लवी का पल्लू"

"पल्लवी का पल्लू"  यूँ तो कई बसंत देख चुकी है पल्लवी, पर एक भी बसंत उसके जीवन में उत्साह न भर सका। आज वह पैंतीस के चौपाल पर खड़ी है। शायद खुद से पूछ रही है की मेरा बसंत कहाँ है और खुद को जबाब नहीं दे पा रही है। बला की खूबसूरती लिए हुए, हर पल-कुपल को जबाबदारी के साथ सरका रह



कसूरवार कौन ?

बात तब की है जब मै सिर्फ १२ साल का था | मै अपने जन्म स्थान, उत्तरप्रदेश के भदोही जिले में अपने माता-पिता के साथ रहता था | वही भदोही जो अपने कालीन निर्यात के लिए विश्व विख्यात है | मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है, जहाँ मेरे दादाजी अपने दो भाइयों और उनके पुरे परिवार के साथ रहते है | और मै खुद को इसील



मेरा घर

जैसा की मैंने आपको बताया, मेरा जन्म भदोही जिले के एक छोटे से गांव मोहनपुर में हुआ, जो बहुत ही सुंदर और प्रकृति से भरा है। मेरे गाँव की भौगोलिक संरचना कुछ ऐसी है की यह भदोही और इलाहबाद जिले के बिच में है | इलाहाबाद कुछ ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यह जगह प्रयाग कुंभ मेला और कई  अन्य सांस्कृतिक विरास



मेरा परिवार

आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेर



मेरा गाँव

मेरा गाँव मोहनपुर, कालीन नगरी भदोही जनपद का एक छोटा सा गाँव है, क्षेत्रफल की दृष्टी से यह बड़ा तो नहीं है, लेकिन जनसँख्या की दृष्टी से बड़ा है | लेकिन अब नहीं रहा क्योकी आधी से ज्यादा आबादी तो रोजगार की आशा में मुंबई जैसे महानगरो की और पलायन कर चुका है | गाँव के बीचोबीच ही सारी आबादी बसी हुई है और चार



गुलाबी फ्रॉक

मुन्नी ख़ुशी से उछल रही थी। माँ  ने आखिर आज उसकी गुलाबी फ्रॉक जो बना दी थी। बस इस्त्री होते ही पहन कर सारी सहेलियों को दिखा कर आएगी। पुरानी, पैबंद लगी फ्रॉक के लिए सब मज़ाक उड़ाते थे। अब कोई नहीं उड़ाएगा।  फ्रॉक इस्त्री हो गयी और मुन्नी उसको पहनकर इठलाती हुयी खेलने चली गयी। अगले दिन सुबह कचरे वाला गुलाब



अजनबी - भाग 1

काफीसमय बाद वह घर आया था बड़ी बहन की शादी में। घर में गहमा गहमी का माहौल था। काफीचहल पहल थी। ढेर सारे रिश्तेदार, गाना बजाना, नाचना लगा हुआ था। कहीं मेहंदी लग रही है, कहीं साड़ी में गोटा।कहीं दर्जी नाप ले रहा है, कोई हलवाई को मिठाइयों के नाम लिखवा रहा है। एक तरफ फूलमाला वाले की गुहार, एक तरफ बैंड-बाजा



सुबह

शाम के किस किस रंग को चखा है इसनेसुबहा हर रंग के बादल नजर आते है ... है ना कहानी इसमें !! 



राजा और सितार

राजा ने कहा - " सितार मंगवाओ ! " दरबार में सितार लाया गया । राजा का अगला आदेश था - " जो इस सितार को बिना स्पर्श किए बजा देगा , उसे सबसे बड़े संगीतकार का ओहदा मिलेगा ।" तमाम संगीतकार दरबार में आये । सबने अपना - अपना हुनर आजमाया । पर, कोई भी बिना स्पर्श किए सितार को नहीं बजा पाया । राजा थोडा सनकी था ।



सबसे बड़ा चित्रकार

सबसे बड़ा चित्रकार एक था राजा । और राजा की एक ही थी बिटिया - राजकुमारी । राजकुमारी को शौक चढ़ा - सीखनी है चित्रकारी ! अब राजा की बेटी को कोई ऐरा - गैरा तो चित्रकला सिखा नहीं सकता । सो, राजा ने फरमान जारी किया की राज्य के सबसे बड़े चित्रकार को हाजिर किया जाए । वही राजकुमारी को चित्रकला सिखाएगा । राज्य



भक्ति

आज से लगभग चालीस साल पहले, ना तो गाँव शहर की चमक दमक पर जुगनू से दीवाने थे, ना शहर गाँव को लीलने घात लगाये बढ़ रहे थे. शहर से गाँव का संपर्क साँप जैसी टेढ़ीमेढ़ी काली सी सड़क से होता था, जिससे गाँव का कच्चा रास्ता जुड़कर असहज ही अनुभव करता था. गाँव की ओर आने वाली सड़क कच्ची व ग्राम्यसहज पथरीला अनगढ़



सच

और फिर उस अँधेरी रात में एक चमकते हुए तारे ने दूसरे तारे से पूछा - " इस ठंडी रात में वो इंसान खुले मैदान में क्यों बैठा है ? " दूसरे तारे ने टिमटिमाते हुए कहा " वो इंसान सच जानना चाहता है - इस जगत का सत्य ! " "तो क्या इस तरह शरीर को दुःख पहुँचाने से वो सच जान जाएगा ? ' " कहते हैं पहले कई इंसानो ने



आखरी गलती

राजीव ने अपने पेन को ऊठाकरअंगूठे और उसके पास वाली उंगली से घुमाने लगा . इस तरह पेन को घुमाने की  कला हर कॉलेज़ जाने वाला स्टूडेंट को कक्षा 12वीसे ही आ जाती है. इस कला मे जैसे ही कोई छात्र माहिर हो जाता है उसे लगने लगता हैउसने जिंदगी की एक बहुत बडी पहेली हल कर ली है.पूरी कहानी पढने के लिए निचे दी हुई 



बदलता दौर

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अंग्रेजी हवा में हिन्दी की सुगंध

आजकल अंग्रेजी लिखना, पढना व बोलना सिर्फ जरूरत नहीं एक चलन बन गया है । अंग्रेजी मात्र एक भाषा न रहकर एक लिबास बन गई है, एक ऐसा लिबास जो आपके पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी होने का प्रमाण है पर यह भी एक भ्रम ही है ऐसे अंग्रेजी प्रेमियो का । हालाँकि आज भी हिन्दी पाठको की संख्या में और हिन्दी साहित्य, उपन्यास



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