कहानी

एकल-युगल-पागल (कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन

“जी सर! मैंने चक्कू घोंप दिया ससुरे की टांगों में अब आपका जीतना पक्का।”टेनिस एकल प्रतिस्पर्धा में स्टीव जो एक जाना-पहचाना नाम था, जिसके नाम कुछ टाइटल थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान वह सफलता से दूर ही रहा। फिटनेस के हिसाब से उसमे 2-3 सीजन का खेल बचा था और इस बीच वह अधिक से अधिक टाइटल अर्जित क



मेरा पहला प्रयास मेरा प्रथम उपन्यास

नमस्कार दोस्तों, मुंबई मेरे लिए किसी चाय की ग्लास की भांति है | एक मिश्रित संस्कृति एक मिश्रित जीवनशैली | यह मेरा सौभाग्य ही है कि मेरा जन्म इस नगरी में हुआ जिसे सपनो का शहर कहते है | लेखन का कौशल या लेखन मे रूची तो सदैव से ही थी पर इसे कभी जीवनयापन  का साधन भी बनाऊंगा यह सोचा नहीं था | वैसे भी हमने



अपना अपना विश्वास

एक बार की बात है कि सभी ग्रामवासियों ने यह निर्णय लिया कि वर्षा के लिए प्रार्थना करेंगे। प्रार्थना के दिन सभी ग्रामवासी पूजास्थल पर एकत्र हुए। उनमें से एक बालक छाता लेकर उपस्थित हुआ।एक वर्ष के बच्चे की भावना का उदाहरण इससे अच्छा नहीं हो सकता है कि जब उसे गोद मे उठाकर हवा में उछालते हैं तो वह हंसता ह



अधिकार किसका

बस दलपतपुर आकर रुक गई। सवारियों का आवागमन चरम सीमा पर था। बस ठसाठस भरी थी। लेकिन फिर भी कंडक्टर का आवाज दे-देकर यात्रियों को बुलाना वातावरण में कोलाहल पैदा कर रहा था।  एक बूढ़ी औरत के बस के पायदान पर पैर रखते ही कंडक्टर ने सीटी दे दी। कंपकंपाते हाथों से बुढि़या की पोटली सड़क पर ही गिर पड़ी। ‘रुकके भ



स्वर बंधन (लघुकथा) - मोहित शर्मा ज़हन

आलीशान बंगले में एक अंधी महिला ने प्रवेश किया। स्टाफ मे नई सेविका ने उत्सुकतावश हेड से पूछा। "ये कौन है?"स्टाफ हेड - "मैडम के बच्चे चीकू की देखभाल के लिए..."सेविका - "पर ये तो देख नहीं सकती? क्या मैडम या साहब को दया आ गई इस बेचारी पर और कहने भर को काम दे दिया?"स्टाफ हेड - "तुझे साहब लोग धर्मशाला वाल



साहित्य (कविता ,कहानी ,)पतन की ओर

आजकल हमारे देश में नौजवानो के लिए साहित्य से लगाव ही नहीं |कविता,कहानी क्या है जानते ही नहीं |न लेखक को पहचानते हैं न कवि को |साहित्य से दूर ही रहते हैं वो तो आजकल अश्लील वीडियो ,अश्लील मूवीज एंव भोजपुरी के अश्लील गाने एंव फिल्मो को देखना पसंद करते हैं इन सबका हमारे देश मे तेजी से वृद्धि भी हो रहा ह



समोसे की भारत पहुंचने की कहानी #प्रतीक सिंह

आप समोसे को भले ही 'स्ट्रीट फूड' मानें लेकिन ये सिर्फ स्ट्रीट फूड नहीं है, उससे बहुत बढ़कर है.समोसा इस बात का सबूत है कि ग्लोबलाइजेशन कोई नई चीज़ नहीं है, समोसा खाने के बाद आपको समझ जाना चाहिए कि किसी चीज़ की पहचान देश की सीमा से तय नहीं होती है| ज्यादातर लोग मानते हैं कि समोसा एक भारतीय नमकीन पकवान



यही है अच्छे दिन !

एक सुखद और सकारात्मक खबर जो अक्सर नहीं बन पाती है हैडलाइन !बात बात पर ५६ इंच नापने वाले ,टमाटर-दाल तौलने वाले और 15 लाख गिनने का इंतज़ार करने वालों के लिए यह खबर शायद महत्व्पूर्ण नहीं ! मगर इसका महत्व उनसे पूछो जो अपने घर से दशकों तक विस्थापित रहे ! कैराना आदि के लिए संघर्ष करने वालों के लिए इसमें सन



दहेज़ से महंगी बेटी (कहानी) - राम लखारा 'विपुल'

बड़ी धूूमधाम से दीपिका की शादी हुई थी। इतने मेहमान आए थे कि पूरे समाज में इस शादी की मिसाल दी जाने लगी थी। पिताजी बड़े अफसर थे, सो जो भी मेहमान आए महंगे गिफ्ट लेकर आए थे दीपिका के लिए।लेकिन दीपिका की शादी होने के बाद से ही उसका पति दहेज के लिए ताने देता रहता था। दीपिका के पिता ने शादी में सब कुछ दिया



माँ मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ

"माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूं। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन, आपने उसके बारे में सुना है?" वासु ने पूछा। उसकी मां उसके पास बैठी और मुस्कुराकर बोली, “मैं डार्विन के बारे में जानती हूं, वासु। मैं यह भी जानती हूं कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो



तम्बाकू नहीं हमारे पास भैया कैसे कटेगी रात

कभी गांव में जब रामलीला होती और उसमें राम वनवास प्रसंग के दौरान केवट और उसके साथी रात में नदी के किनारे ठंड से ठिठुरते हुए आपस में हुक्का गुड़गुड़ाकर बारी-बारी से एक-एक करके-“ तम्बाकू नहीं हमारे पास भैया कैसे कटेगी रात, भैया कैसे कटेगी रात, भैया............ तम्बाकू ऐसी मोहिनी जिसके लम्बे-चौड़े पात, भैय



हास्य कहानी

एक दिन एक कुत्ता जंगल में रास्ता भटक गया..तभी उसने देखा, एक शेर उसकी तरफ आ रहा है..।कुत्ते की सांस रूक गयी.."आज तो काम तमाम मेरा..!" उसने सोचा..Management ka lesson yaad aa gaya aurफिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ पड़ी देखि..वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा..और ज



कहानी : पंच परमेश्वर / प्रेमचंद

जुम्मनशेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भीसाझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खाना-पाना काव्यवहार था, न धर्म का नाता; केवल विचा



फ़रिश्ता

||| फ़रिश्ता ||| बहुत साल पहले की ये बात है. मुझे कुछ काम से मुंबई से सूरत जाना था. मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था. सुबह के करीब ६ बजे थे. मैं स्टेशन में मौजूद बुक्स शॉप के खुलने का इन्तजार कर रहा था ताकि सफ़र के लिए कुछ किताबे और पेपर खरीद लूं. अचानक एक छोटा सा बच्चा ज



फ़रिश्ता

||| फ़रिश्ता ||| बहुत साल पहले की ये बात है. मुझे कुछ काम से मुंबई से सूरत जाना था. मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था. सुबह के करीब ६ बजे थे. मैं स्टेशन में मौजूद बुक्स शॉप के खुलने का इन्तजार कर रहा था ताकि सफ़र के लिए कुछ किताबे और पेपर खरीद लूं. अचानक एक छोटा सा बच्चा ज



तीन बच्चे

तीन बच्चेनवगांव की सीमा पर एक तालाब है और उसके पास धोबियों की बस्ती। कपडे धोने के काम में तालाब का प्रयोग होता है। तालाब के पास रेल की पटरी है। रेल गाड़ियों की आवाजावी रात दिन होती है। सवारी गाड़ियां दिन में चार और रात को दो आती हैं, बाकी कुछ मालगाड़ियां आती जाती हैं। गर्मियों के दिन थे। सुबह कुछ धोबी



"शब्द"बड़ा ही क़ीमती

"शब्द"बड़ा ही क़ीमती एक समय एक व्यापारी की एक दिन अपने दोस्त से किसी बात पर ख़ूब जमकर लड़ाई हुई, और व्यापारी ने बड़े अपशब्दों का प्रयोग किया। उसके बाद जब कुछ समय बीत गया, और उस व्यापारी को अपनी ग़लती का अहसास हुआ तो उसे ख़ुद पर बड़ी ही शर्म आई। वह इतना शर्मसार हुआ कि एक साधु के पास पहुँचा, और पुछा



बलात्कारी..पति ?-कहानी

पंचायत अपना फैसला सुना चुकी थी .नीला के बापू -अम्मा , छोटे भाई-बहन बिरादरी के आगे घुटने टेककर पंचायत का निर्णय मानने को विवश हो चुके थे .निर्णय की जानकारी होते ही नीला ने उस बंद -दमघोंटू कोठरी की दीवार पर अपना सिर दे मारा था और फिर तड़प उठी थी उसके असहनीय दर्द से .चार दिन पहले तक उसका जीवन कितनी आ



14 अप्रैल 2015

शुभ-अशुभ या अपनी-अपनी सोच......

बहुत पहले की बात है। एक नगर मे भिखु नाम का मजदुर रहता था। दिन भर मेहनत करके अपना और परिवार का पेट पालता था। लेकिन भिखु के बारे मे एक अफवाह तेजी से नगर मे फैल रही थी। कुछ लोगो का मानना था की सुबह-सुबह भिखु का मुख देख लेने मात्र से उनका सारा काम बिगड़ जाता है तो कुछ लोगो का मानना था कि उनके साथ कुछ-न-



बलात्कार एक बङी समस्या

 ! एक लङकी थी रात को आँफिस से वापस लोट रही थी तो देर भी हो गई थी पहली बार ऐसा हुआ ओर काम भी ज्यादा था तो टाइम का पता ही नही चला वो सीधे बस स्टेशन पहुँची वहाँ एक लङका खङा था वो लङकी उसे देखकर डर गई की कही उल्टा सीधा ना हो जाए तभी वो लङका पास आया ओर कहा बहन तू मौका नही जिम्मेदारी हे मेरी ओर जब तक तुझ



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