कहानी

सच

और फिर उस अँधेरी रात में एक चमकते हुए तारे ने दूसरे तारे से पूछा - " इस ठंडी रात में वो इंसान खुले मैदान में क्यों बैठा है ? " दूसरे तारे ने टिमटिमाते हुए कहा " वो इंसान सच जानना चाहता है - इस जगत का सत्य ! " "तो क्या इस तरह शरीर को दुःख पहुँचाने से वो सच जान जाएगा ? ' " कहते हैं पहले कई इंसानो ने



आखरी गलती

राजीव ने अपने पेन को ऊठाकरअंगूठे और उसके पास वाली उंगली से घुमाने लगा . इस तरह पेन को घुमाने की  कला हर कॉलेज़ जाने वाला स्टूडेंट को कक्षा 12वीसे ही आ जाती है. इस कला मे जैसे ही कोई छात्र माहिर हो जाता है उसे लगने लगता हैउसने जिंदगी की एक बहुत बडी पहेली हल कर ली है.पूरी कहानी पढने के लिए निचे दी हुई 



बदलता दौर

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अंग्रेजी हवा में हिन्दी की सुगंध

आजकल अंग्रेजी लिखना, पढना व बोलना सिर्फ जरूरत नहीं एक चलन बन गया है । अंग्रेजी मात्र एक भाषा न रहकर एक लिबास बन गई है, एक ऐसा लिबास जो आपके पढ़े-लिखे और बुद्धिजीवी होने का प्रमाण है पर यह भी एक भ्रम ही है ऐसे अंग्रेजी प्रेमियो का । हालाँकि आज भी हिन्दी पाठको की संख्या में और हिन्दी साहित्य, उपन्यास



सीख

अक्सर जब घर में कमाने वाला एक और खाने वाले अत्यधिक हों तो जो हाल होता है वही हाल सुधीर का था/ उसके अलावा,  परिवार में माता -पिता,एक बेरोजगार भाई, एक अविवाहित बहन और एक तलाकशुदा बहन अपने दो-दो बच्चों के साथ एक ही घर में रहते थे / सभी के खर्च का जिम्मा सुधीर ही उठाता था / पिताजी रिटायर्ड हो चुके थे और



ईद का अर्थ ख़ुशी अर्थात खुशियों का पर्व

ईद का अर्थ ख़ुशी अर्थात खुशियों का पर्व                  डॉ शोभा भारद्वाज जब भी ईद आती है मेरी स्मृति में कुछ यादें उभर जाती हैं| हम कई वर्ष परिवार सहित ईरान में रहे हैं यह शिया बाहुल्य प्रदेश है लेकिन हम खुर्दिस्तान में रहते थे खुर्द सुन्नी मुस्लिम हैं | तीस दिन तक रमजान के महीने में रोजे रखने के बा



घर वापसी...!!

अरे महाराज... कहां चल दिए। रुकिए तो ... गाड़ी कभी भी चल पड़ेगी। उस युवा साधु को छोटे से स्टेशन से आगे बढ़ता देख दूसरे साधु चिल्ला उठे। लेकिन उस  पर तो जैसे अलग ही धुन सवार थी। वह आगे बढ़ता ही जा रहा था। दूसरे साधु पीछे - पीछे चिल्लाते हुए लगभग दौड़ने लगे। महाराज , आपको कुछ भ्रम हो गया है क्या। आप कह



बरगद का पेड़

      मैं उसे अक्सर देखा करता था। दिन में न जाने कितनी बार उसका वोमासूम चेहरा मेरी नजरों की राह गुजरता था। कभी वो घर की बाहरदरी में झाड़ू लगातेनजर आती तो कभी बाहर कचरा डालने जाया करती थी। जब वो हमारे पड़ौस में रहने आई थी, तब उसकीउम्र यही कोई बारह या तेरह की होगी। अंजाने माहौल में ढलते-ढलते उसे छ: माह



दुखों की पोटली

दुखों की पोटलीएक बार एक गांव के सभी लोग अपने अपने दुखों के कारण भगवान से बहुत नाराज हो गए वह भगवान से प्रार्थना करने लगे कि उनके दुखों को दुर करें वरना वो भगवान काहे का ?लोगें की फरियाद सुन आकाश से भविष्यवाणी हुई  हे गांव वासियों ऐसा करें आज रात के तीसरे पहर में सब लोग अपने अपने दुखो को एक कागज में



सपना ...!!

जय जगन्नाथ... बोलो जय जगन्नाथ...रथ महोत्सव पर निकली यात्रा में उत्साहित बच्चों के मुंह से निकलने वालेइस जयकारे ने नुक्कड़ से मोहल्ले की ओर जाने वाली पगडंडी पर चल रही उदासमाला की तंद्रा मानो भंग कर दी।जीवन के गुजरे पल खास कर उसका अतीत किसी फिल्म के फ्लैश बैक की तरह उसकीआंखों के सामने नाचने लगा।क्योंक



समय का मोल ...

कहानी------------समय का मोल...!!अमितेश कुमार ओझाकड़ाके की ठंड में झोपड़ी के पास रिक्शे की खड़खड़ाहट से भोला की पत्नी और बेटा चौंक उठे। अनायास ही उन्हें कुछ  प्रतिकूलता का भान हुआ। क्योंकि भोला को और देर से घर पहुंचना था। लेकिन अपेक्षा से काफी पहले ही वह घर लौट आया था। जरूर कुछ गड़बड़ हुई.... भोला की



एकल-युगल-पागल (कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन

“जी सर! मैंने चक्कू घोंप दिया ससुरे की टांगों में अब आपका जीतना पक्का।”टेनिस एकल प्रतिस्पर्धा में स्टीव जो एक जाना-पहचाना नाम था, जिसके नाम कुछ टाइटल थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान वह सफलता से दूर ही रहा। फिटनेस के हिसाब से उसमे 2-3 सीजन का खेल बचा था और इस बीच वह अधिक से अधिक टाइटल अर्जित क



मेरा पहला प्रयास मेरा प्रथम उपन्यास

नमस्कार दोस्तों, मुंबई मेरे लिए किसी चाय की ग्लास की भांति है | एक मिश्रित संस्कृति एक मिश्रित जीवनशैली | यह मेरा सौभाग्य ही है कि मेरा जन्म इस नगरी में हुआ जिसे सपनो का शहर कहते है | लेखन का कौशल या लेखन मे रूची तो सदैव से ही थी पर इसे कभी जीवनयापन  का साधन भी बनाऊंगा यह सोचा नहीं था | वैसे भी हमने



अपना अपना विश्वास

एक बार की बात है कि सभी ग्रामवासियों ने यह निर्णय लिया कि वर्षा के लिए प्रार्थना करेंगे। प्रार्थना के दिन सभी ग्रामवासी पूजास्थल पर एकत्र हुए। उनमें से एक बालक छाता लेकर उपस्थित हुआ।एक वर्ष के बच्चे की भावना का उदाहरण इससे अच्छा नहीं हो सकता है कि जब उसे गोद मे उठाकर हवा में उछालते हैं तो वह हंसता ह



अधिकार किसका

बस दलपतपुर आकर रुक गई। सवारियों का आवागमन चरम सीमा पर था। बस ठसाठस भरी थी। लेकिन फिर भी कंडक्टर का आवाज दे-देकर यात्रियों को बुलाना वातावरण में कोलाहल पैदा कर रहा था।  एक बूढ़ी औरत के बस के पायदान पर पैर रखते ही कंडक्टर ने सीटी दे दी। कंपकंपाते हाथों से बुढि़या की पोटली सड़क पर ही गिर पड़ी। ‘रुकके भ



स्वर बंधन (लघुकथा) - मोहित शर्मा ज़हन

आलीशान बंगले में एक अंधी महिला ने प्रवेश किया। स्टाफ मे नई सेविका ने उत्सुकतावश हेड से पूछा। "ये कौन है?"स्टाफ हेड - "मैडम के बच्चे चीकू की देखभाल के लिए..."सेविका - "पर ये तो देख नहीं सकती? क्या मैडम या साहब को दया आ गई इस बेचारी पर और कहने भर को काम दे दिया?"स्टाफ हेड - "तुझे साहब लोग धर्मशाला वाल



साहित्य (कविता ,कहानी ,)पतन की ओर

आजकल हमारे देश में नौजवानो के लिए साहित्य से लगाव ही नहीं |कविता,कहानी क्या है जानते ही नहीं |न लेखक को पहचानते हैं न कवि को |साहित्य से दूर ही रहते हैं वो तो आजकल अश्लील वीडियो ,अश्लील मूवीज एंव भोजपुरी के अश्लील गाने एंव फिल्मो को देखना पसंद करते हैं इन सबका हमारे देश मे तेजी से वृद्धि भी हो रहा ह



समोसे की भारत पहुंचने की कहानी #प्रतीक सिंह

आप समोसे को भले ही 'स्ट्रीट फूड' मानें लेकिन ये सिर्फ स्ट्रीट फूड नहीं है, उससे बहुत बढ़कर है.समोसा इस बात का सबूत है कि ग्लोबलाइजेशन कोई नई चीज़ नहीं है, समोसा खाने के बाद आपको समझ जाना चाहिए कि किसी चीज़ की पहचान देश की सीमा से तय नहीं होती है| ज्यादातर लोग मानते हैं कि समोसा एक भारतीय नमकीन पकवान



यही है अच्छे दिन !

एक सुखद और सकारात्मक खबर जो अक्सर नहीं बन पाती है हैडलाइन !बात बात पर ५६ इंच नापने वाले ,टमाटर-दाल तौलने वाले और 15 लाख गिनने का इंतज़ार करने वालों के लिए यह खबर शायद महत्व्पूर्ण नहीं ! मगर इसका महत्व उनसे पूछो जो अपने घर से दशकों तक विस्थापित रहे ! कैराना आदि के लिए संघर्ष करने वालों के लिए इसमें सन



दहेज़ से महंगी बेटी (कहानी) - राम लखारा 'विपुल'

बड़ी धूूमधाम से दीपिका की शादी हुई थी। इतने मेहमान आए थे कि पूरे समाज में इस शादी की मिसाल दी जाने लगी थी। पिताजी बड़े अफसर थे, सो जो भी मेहमान आए महंगे गिफ्ट लेकर आए थे दीपिका के लिए।लेकिन दीपिका की शादी होने के बाद से ही उसका पति दहेज के लिए ताने देता रहता था। दीपिका के पिता ने शादी में सब कुछ दिया



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