कहानी



तुम्हारे प्रेम के नाम-३

कहानीतुम्हारे प्रेम के नाम-3विजय कुमार तिवारीतुमने अनेकों बार कुरेदा है मुझे,"कैसे मैं अपने को बचाता रहा और कैसे इस मतलबी दुनिया की शातिर चालों को समझ पाया।"तुमसे खुलकर कहना चाहता हूँ,सच बयान करता हूँ कि यह कोई मुश्किल काम नहीं है।हर व्यक्ति को थोड़ा सजग रहना चाहिए।थो



करारा जवाब

शीला देखने में काफी सुंदर है, बड़ी बड़ी आंखे,घुंघराले बाल और दूध सी दमकती त्वचा और साथ गुणवंती भी थी, उसके ससुर को वो देखतेही भा गई तो उसने अपनी बेटे मनोज का रिश्ता उसके साथ तय कर दिया, मनोज टॉप केकॉलेज से पढ़ा लिखा था और सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करना पसंद करता था, तो वहीशीला संस्कृत में एम ए पास थ



डायबिटिज में सीनियर

शाम कोविद्यालय से घर वापिस आते ही श्रीमती जी का आदेश हुआ की कुछ जरुरी सामान लानाहै...भागते हुए बाजार गया...वापिस आते-आते रात्रि के आठ बज चुके थे...आते ही भोजनपर टूट पड़ा....अभी प्रथम निवाला ही मुंह को गया था की फोन घनघना उठा...निवालागटकते-गटकते जेब में हाथ डाला और मोबा



तुम्हारे प्रेम के नाम-२

कहानीतुम्हारे प्रेम के नाम-2विजय कुमार तिवारीदुनिया तो वही है जो सबकी होती है परन्तु मेरे लिए जैसे बिल्कुल अजनबी हो चुकी है।जो जानी-पहचानी दुनिया थी उसे मैं बहुत पीछे छोड़ आया हूँ और यह नयी जगह,नयी दुनिया जैसे मुझे आत्मसात करने को तैयार ही नहीं है।इस दृष्टि से समूची नारी जाति के प्रति मेरा मन पूरी श



खंडित मुस्कान

प्रतिमा नाम था उसका, हमेशा मुस्कुराती रहती, ऐसा लगता कि मानों ज़िंदगी बहुत आसान है उसके लिए, ना पढ़ाई को गंभीरता से लेती ना जीवन को, उसकी हमेशा की ये आदत थी सभी क्लॉस में पढ़ने वाली सभी लड़कियों से कहना कि आज पार्टी दो ना, मजबूर कर देती थी उन लड़कियों को घर से पैसे मांगने के लिए, खुद भी देती थी, हाल



खूबसूरत आँखोंवाली लड़की-६

कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-6विजय कुमार तिवारीप्रमोद बाबू दोनो महिलाओं और मोहन चन्द्र जी की भाव-भंगिमा देख दंग रह गये।सुबह दूध वाले की बातें सत्य होती प्रतीत होने लगी।उन्होंने मौन रहना ही उचित समझा।अन्दर से पत्नी भी आ गयी।मोहन चन्द्र बाबू उन दोनो महिलाओं से कुछ पूछते-बतियाते रहे।थोड़ी देर में पत्नी



खूबसूरत आँखोंवाली लड़की-४

कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-4विजय कुमार तिवारी"ऐसा नहीं कहते,"प्रमोद बाबू भावुक हो उठे,"इतना ही कह सकता हूँ कि तुम अपनी उर्जा इन सब चीजों में मत लगाओ।"थोड़ा रुककर उन्होंने कहा,"दुनिया ऐसी ही है,लोग कहेंगे ही।तुम्हें तय करना है कि स्वयं को इन वाहियात चीजों में उलझाती हो और अपने को बरबाद करती हो या ब



खूबसूरत आँखोंवाली लड़की-३

कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-3विजय कुमार तिवारी"मैं किसी से नहीं डरता,"मोहन चन्द्र पूरी बेहयायी पर उतर आये।प्रमोद बाबू ने अपने आपको रोका।सुबह की ताजी हवा में भी गर्माहट की अनुभूति हुई और दुख हुआ।हिम्मत करके उन्होंने कहा,"मोहन चन्द्र जी,दूसरों की जिन्दगी में टांग अड़ाना ठीक नहीं है।आपकी बात सही हो तब



खूबसूरत आँखोंवाली लड़की-२

कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-2विजय कुमार तिवारीप्रमोद बाबू भी इस माहौल से अछूते नहीं रहे।उनका मिलना-जुलना शुरु हो गया।कार्यालय में बहुत लोगों के काम होते जिसे बड़े ही सहृदय भाव से निबटाते और कोशिश करते कि किसी को कोई शिकायत ना हो।स्थानीय लोगों से उनकी अच्छी जान-पहचान हो गयी है।सुरक्षा बल के लोगों के



खूबसूरत आँखोंवाली लड़की-१

कहानीखूबसूरत आँखोंवाली लड़की-1विजय कुमार तिवारीसालों बाद कल रात उसने ह्वाट्सअप किया,"हाय अंकल ! कहाँ हैं आजकल?"उसने अंग्रेजी अक्षरों में "प्रणाम" लिखा और प्रणाम की मुद्रा वाली हाथ जोड़ेे तस्वीर भी भेज दी।प्रमोद को सुखद आश्चर्य हुआ और हंसी भी आयी।"कैसे याद आयी अंकल की इतने सालों बाद?"प्रमोद ने यूँ ही



जिंदगी सुखद संयोगो का खेल है .

कहानीजिन्दगी सुखद संयोगों का खेल है।विजय कुमार तिवारीरमणी बाबू को भगवान में बहुत श्रद्धा है।उसके मन मेंं यह बात गहरे उतर गयी है कि अच्छे दिन अवश्य आयेंगे।अक्सर वे सुहाने दिनों की कल्पना में खो जाते हैं और वर्तमान की छोटी-छोटी जरुरतों की लिस्ट बनाते रहते हैं।गाँव के लड़के स्कूल साईकिल पर जाते थे तो व



कोरोना और स्त्री

करोना और स्त्रीविजय कुमार तिवारीकल प्रधानमन्त्री ने देश मेंं कोरोना के चलते ईक्कीस दिनों के"लाॅकडाउन"की घोषणा की है।सभी को अपने-अपने घरों में रहना है।बाहर जाने का सवाल ही नहीं उठता।घर मेंं चौबिसों घण्टे पत्नी के साथ रह पाना,सोचकर ही मन भारी हो जाता है।किसी साधु-सन्त के पास इससे बचाव का उपाय नहीं है।



एक आधुनिक पौराणिक कहानी

एक “आधुनिक” पौराणिक कहानीआप सभी नेपौराणिक कहानियों मेंपढ़ा हीहोगा किदेवताओं औरदानवों काबार बारयुद्ध होताथा, औरबार बारदेवता हारतेहुए, भगवान् (अर्थात भगवान् विष्णु ) के दरबारमें गुहारलगते थे–त्राहि माम,त्राहि माम.भगवान् फिरकिसी नएदेवी यादेवता कीरचना करकेदेवताओं कोशक्ति प्रदानकरते थे.देवता विजयीहोते थेऔ



पापा ‘आफ’ हो गए : दिनेश डाक्टर

आज काफी समय के बाद डॉ दिनेश शर्मा की लिखी एक बड़ीमार्मिक कहानी पढने को मिली “पापा ‘आफ’ हो गए”...प्रस्तुत है आपके लिए...पापा ‘आफ’ हो गए : दिनेश डाक्टरश्रीनाथ के बड़े लड़के ने दिवाकर को फोन पर सूचना दी कि पापा ‘आफ’ हो गए | पहले तो दिवाकर को कुछ समझ में नहीं पड़ा कि लड़का क्या कह रहा है पर जब उसने लड़के की अ



पापा ऑफ हो गए : दिनेश डाक्टर

पापा ‘आफ’ हो गए : दिनेश डाक्टर श्रीनाथ के बड़े लड़के ने दिवाकर को फोन पर सूचना दी कि पापा ‘आफ’ हो गए | पहले तो दिवाकर को कुछ समझ में नहीं पड़ा कि लड़का क्या कह रहा है पर जब उसने लड़के की अंग्रेजी भाषा की योग्यता पर गौर किया तो सारी बात समझ में आ गयी कि श्रीनाथ चल बसा |दिवाकर को दरअसल इस समाचार का बहु



लाल छतरी वाली लड़की : दिनेश डाक्टर

लाल छतरी वाली लड़की : सबसे पहले मैने उसे शाम के समय सड़क के किनारे बने मंदिर की सीढ़ियों के पास देखा था । हाथ में फूल, अगरबत्ती लिए वह अपने आराध्य की प्रतिमा के सामने आंख बन्द किये बड़े श्रद्धा भाव से चुपचाप कुछ फुसफुसा रही थी । मैं लंबी वाक से होटल की तरफ लौट रहा था । थोड़ा थक गया था । मंदिर के पास बन



सदमा

दो महीने हो गये। शांति देवी की हालत में कुछ भी सुधार ना हुआ। पुरुषोत्तम बाबू को उनके मित्रों और रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि एक बार अपनी पत्नी को मनोचिकित्सक से दिखवा लें। पुरुषोत्तम बाबू को सुझाव सही लगा। अगले ही दिन अपने बड़े पुत्र सौरभ एवं पुत्रवधू संध्या के साथ अप



आनन्द स्कौलर शिप

आनन्द स्कौलरशिपडॉ शोभा भारद्वाज नौएडा नया नया बसा था छोटे बच्चों के लिए स्कूलों की जरूरत थी हमारे परिवार का प्राईमरी तक स्कूल था | एक नेपाली, गोरे चिट्टे नेपाली लड़के को साथ लाया आपको स्कूल में काम करने के लिए किसी की जरूरत होगी यह लड़का ढाबे में काम करता मझे मिला लेकिन वहाँ बहुत दुखी था अत : आपके



31 दिसम्बर 2019

अनजान डगर

सौम्या यही नाम था उसका,हमारे पड़ोस में रहने वाले तिवारी जी की बेटी थी।आज उसे घर लाया जा रहा था, कहां से? कहीं बाहर गई थी क्या सौम्या? हां, पिछले कई दिनों से दिखी भी नहीं थी।मैंने पूछा भी था,तो टाल-मटोल वाला जबाव मिला था, लेकिन आज सारी कहानी सामने थी। आठवीं में ही पढ़ती थीसौम्या! बड़ी चुलबुली और प्या



माँ ! एक सवाल मैं करूँ ? ( जीवन की पाठशाला )

माँ ! एक सवाल मैं करूँ ? ( जीवन की पाठशाला )*************************** इस सामाजिक व्यवस्था के उन ठेकेदारों से यह पूछो न माँ - " बेटा-बेटी एक समान हैं , तो दो- दो बेटियों के रहते बाबा की मौत किसी भिक्षुक जैसी स्थिति में क्यों हुई.. क्रिसमस की उस भयावह रात के पश्चात हमदोनों के जीवन में उजाला क्यों



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