कहानी

कहानी - कुऍं को बुखार

कहानी- कुंए को बुखार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश ’ अंकल ने नहाने के कपड़े बगल में दबाते हुए कहा, ‘‘ रोहन ! थर्मामीटर रख लेना। आज कुंए का बुखार नापना है ? देखते हैं कुंए को कितना बुखार चढ़ा है ?’’ ‘‘ जी अंकल ! थर्मामीटर रख लिया ,’’ रोहन ने कहा



Non Resident Bihari : पढ़िएगा जरूर, क्यूंकि मज़ा बहुत आने वाला है

शायद आपने इस किताब को पढ़ा होगा या शायद नहीं भी पढ़ा होगा | खैर मैं तो कहूँगा कि इसे एक बार तो आपको जरूर पढ़ना ही चाहिए | इस किताब की कवर पेज को देखते ही आपके मन में कौतुहल जाग जायेगा कि आखिर इस किताब में क्या है? आप बेचैन होंगे जानने के लिए और इसे पढ़ने के लिए भी |अगर आप बिहार से है, तो आप खुदको शायद



प्यार या खुदगर्जी

कहानी इसी समाज से उठायी जाती हैं बस नाम और शहर बदले जाते हैं ऐसी ही एक कहानी नहीं मैं कड़वी सच्चाई से रूबरू हुई थी मेरे पति की क्लिनिक और हमारा घर एक ही बिल्डिंग में है| एक महिला यदि उसके साथ दो बच्चे बड़ी लडक



मकर संक्रांति से जुड़ी कुछ खास अनसुनी अनजानी बातें

मकर संक्रांति भारत का एक मात्र ऐसा त्यौहार है, जिसे भारत के विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है । आज हम आपको बताते हैं इस त्यौहार से जुड़े कुछ रोचक ‘मकर संक्रांति’ का यह त्यौहार हर साल जनवरी के महीने में 14वे या 15वे दिन आता है । इस दिन सूरज धनु राशि क



लघुकथा— सुख

लघुकथा— सुख रमन ने चकित होते हुए पूछा,' उस को पास बहुत सारा पैसा था. फिर समझ में नहीं आता है उस ने यह कदम क्यों उठाया ?'' पैसा किसी सुख की गारण्टी नहीं होता है,' मोहित ने दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया.' क्यों भाई ? क्या तुम नहीं चाहते हो कि



कहानी - मौत की झांकी

शाम का समय था.चौराहे पर जाम लगा हुआ था. एक एम्बुलेंसलगातार सायरन दिए जा रही थी लेकिन उसे जगह देना कोई नही चाहता था. क्योंकि वहां पर भगवान राम की झांकी जा रही थी. येआयोजन शहर की एक सांकृतिक संस्था ने आयोजित किया था. कईनेतागण भी उसमे मौजूद थे. रईसों की तो गिनती ही नही क



... और वो सुकून से मर गये...!

बात बहुत छोटी सी है... पता नहीं, कहनी भी चाहिये या नहीं...!दरअसल, कहना-सुनना एक खास परिवेश एवं माहौल में ही अच्छा होता है। क्यूं...?इसलिए कि विद्वानों ने कहा है, ‘शब्द मूलतः सारे फसाद की जड़ है’...मगर, मामला तो यह भी है कि खामोशी भी कम फसाद नहीं करती...!चलिये, कह ही दे



अब छोड़ दिया...!

बहुत साल पहले, एक फिल्म त्रिशूल देख कर आए मेरे चचा बेहद बेहद खफा थे। बस शुरू हो गये – हद है, तहजीब गयी तेल बेचने, अब तो सिनेमा देखना ही छोड़ दूंगा।हिम्मत जुटा कर मैंने उनसे पूछा, किस बात से नाराज हैं?कहने लगे, सिनेमा में कभी भी गलत बात नही दिखानी चाहिए, सिनेमा हमारे समाज की तहजीब का हिस्सा है। समझाया



भागी हुई लड़की

सुबहका समय था. राजू सोया पड़ा था कि तभी किसी नेउसे झकझोर कर उठाया. राजू आँखे मलते हुए उठ गया. सामने मामी खड़ी थीं. मामी ने हांफते हुए कहा,“तुम्हे पता है रात छबीली घूरे के साले के साथ भाग गयी.” राजू ने आँखे मिचमिचा कर देखा कि कहीं वो सपना तो नही देख रहा है. राजू मामी से बोला, “किसने बताया आपको?”मामी



सुरों की मुकम्मलियत...!

हमारे एक चचा जान हमारी रोज बढ़ती औकात से हमेशा दो मुट्ठी ज्यादा ही रहे। इसलिए, भले ही कई मुद्दों पर उनसे हमारी मुखालफत रही पर उनकी बात का वजन हमने हमेशा ही सोलहो आने सच ही रक्खा।वो हमेशा कहते, जो भी करो, सुर में करो, बेसुरापन इंसानियत का सबसे बड़ा गुनाह है। लोग गरीब इसल



कहानी - दूसरी शादी

संतोष हरफनमौला और शौकीन किस्म का इंसान था। पिता सरकारी मास्टर थे, जिनके पैसों से वह आराम से अपने शौक पूरे करता रहता था। उसके बाकी के दो बडे भाई भी थे लेकिन वे अपने खर्चे अपनी कमाई से ही करते थे। उन दोनों का शौक संतोष की तरह नही था। लेकिन पिता की सरकारी नौकरी कब तक चलती.



किसका भारत महान? (कहानी) #ज़हन

पैंतालीस वर्षों से दुनियाभर में समाजसेवा और निष्पक्ष खोजी पत्रकारिता कर रहे कनाडा के चार्ली हैस को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई। नोबेल संस्था की आधिकारिक घोषणा के बाद से उनके निवास के बाहर पत्रकारों का तांता लगा था। अपनी दिनचर्या से समय निकाल कर उन्होंने एक प्रेस वार्ता और कुछ बड़े टीवी, र



भूतिया स्टेशन

विशेष हमेशा की तरह इस बार भी ऑफिस की तरफ से एक टूर पर था. वैसे तो उसके लिए टूर पर जाना कोई नई बात नहीं थी फिर भी इस बार उसे एक अजीब सी ख़ुशी हो रही थी. शायद इसलिए क्यूँकी इस बार टूर पर और कहीं नहीं उसे उसके अपने शहर जाना था. हमेशा की तरह उसने रिजर्वेशन सेकंड AC में किया हुआ था. स्टेशन वो टाइम पर पहुं



वो आखिरी लोकल ट्रैन - भाग 2

पिछले भाग में एक साधारण सा व्यक्ति नरेंद्र अपने घर जाने के लिए ट्रैन पकड़ता है लेकिन जब वो उठता है तब वह अतीत के नरसंहार को सामने पाता है जो अंग्रेज कर रहे थे| वो चार अंग्रेजों को मार कर नरसंहार को रोक देता है लेकिन बेहोश होते-होते बागियों के हाथ लग ज



वो आखिरी लोकल ट्रेन

शुक्रवार की वो सुनसान रात जहाँ लोग रात के ९ बजे से ही घर में दुबक जाते हैं, वहाँ रात ९ बजे से ही कब्रिस्तान जैसा सन्नाटा छा जाता है। कड़ाके की इस ठंड में हड्डियाँ तक काँपने लगती हैं, बाहर इंसान तो क्या कुत्ते का बच्चा भी नजर नहीं आता फिर भी कुत्तों के रोने की आवाज़ क



धूमिल चाँद

*धूमिलचाँद*हिन्दुस्तान भवन काहॉल पूरा भरा हुया था | हर स्टाल पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी हुई थी | कुछ पत्रकारफोटो क्लिक करने में लगे थे | मोतियों से बने सुन्दर-सुन्दर मंगलसूत्र..पायल..



स्थानीय tutors को छोर के Rahul ने कैसे अपने लिए अच्छा tutors ढूंढा

1. Finding a Local Tutor THE CRISIS & THE RESOLUTION W W W . T U T S T U . C O M2. Meet Rahul Rahul, a cheerful boy of 14, who lives in Janakpuri, New Delhi. Rahul’s father is employed and is the only earning member. Rahul's mom has been



क्या Rahul को अच्छा स्थानिय शिक्षक मिल पाया? कैसे उसने नया हल निकाला

The storyof Rahul who struggled to find a local tutor. Who would be competent enough toaid him recovering his old enthusiasm in academics. Belonging to thelower-middle-class family, Rahul's parents couldn't provide him with luxuriesbut still, they left no stone unturned w



अव्यक्त कहानी

रह गई अब अव्यक्त जो, हूँ वही इक कहानी मैं!आरम्भ नही था जिसका कोई,अन्त जिसकी कोई लिखी गई नहीं,कल्पना के कंठ में ही रुँधी रही,जिसे मैं परित्यक्त भी कह सकता नहीं। चुभ रही है मन में जो, हूँ वही इक पीर पुर



बिना निष्कर्ष की कहानी....

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