साहित्य का महाकुम्भ इस साल और भी बड़ा, और भी भव्य

'साहित्य आज तक' फिर लौट आया है. इसके साथ ही नवंबर के मध्य में राजधानी में फिर से सज रहा है साहित्य के सितारों का महाकुंभ. तीन दिनों के इस जलसे में हर दिन साहित्य और कलाप्रेमी देख और सुन सकेंगे शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी उन हस्तियों को, जिन्ह



प्रेम - परिभाषा

मानसिक अनुभूतियों की एक संज्ञातम्यक व् सर्वमान्य परिभाषाये रचना भौतिक पदार्थो और उसकी क्रियावों की परिभाषों के बनाने जितना सरल नहीं लगता है, क्योकि भौतिक परिभाषाओ के लिए स्थायी परिमंडल निश्चित है और कम भी



11 नवम्बर 2018

छठ: आस्था का पावन त्योहार त्योहार

धरा के जीवन सूर्य और प्रकृति के उपासना का सबसे बड़ा उत्सव छठ पर्व के रूप में मनाया जाता है।बिहार झारखंड एवं उत्तर प्रदेश की ओर आने वाली हर बस , ट्रेन खचाखच भरी हुई है।लोग भागते दौड़ते अपने घर आ रहे है।कुछ लोग साल में एक बार लौटते है अपने जड़ों की ओर,रिश्तों की टूट-फूट के मरम्मती के लिए,माटी की सोंध



जुबां को 'छोटी' ही रखें 'विराट'

अगर तुम 'ऐसे' हो तो देश छोड़ दो अगर तुम वैसे हो तो देश छोड़ दो!अगर तुम 'यह' खाते हो तो देश छोड़ दो अगर तुम 'वह' खाते हो तो देश छोड़ दो!अगर तुम 'अलग' तरह की सोच रखते हो तो देश छोड़ दो और अगर 'किसी खास तरह की सोच से इत्तेफाक नहीं रखते' तो देश छोडकर चले जाओ!सच कहा जाए तो देश छोड़ने की बात आज-कल इतनी कै



शब्द

अजीब विरोधाभास है शब्दों में। अजीब द्वंद्व है शब्द भरोसे में, विश्वास में, आस्था में, घृणा में, प्रेम में। दरअसल शब्दों का कार्य है एक खास तरह के विचार को प्रस्तुत करना। किसी मनःस्थिति, परिस्थिती, भाव , वस्तु , रंग, दिशा, दशा, जगह, स्थान, गुण, अवगुण इत्यादि को दर्शाना। शब



लिबरल और हिन्दू संवेदना .

टी वी पर आज पीके पिक्चर आ रही थी । पहले एकबार पूरी पिक्चर देखी थी। आज जब टी वी खोला तो शंकर भगवान के वेश में एक नाटक के कलाकारकी हीरो आमिर खान द्वारा छीछालेदार हो रही थी। हमने बहुत लिबरल होने की कोशिश की लेकिन इस पिक्चर को पूरी पचा नहीं पाया। हर धर्ममें बहुत सी अच्छी बातें बताई जातीं कई । कुछ रूढ़िया



हमें लेखक क्यों बनना चाहिए? एक लेखक का भविष्य क्या होना चाहिए?

दोस्तों आज हर व्यक्ति पढ़-लिख कर नौकरी के क्षे़त्र में एकऊंचा औदा पाना चाहता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई पुलिस, कोई वकील तो कोई इंजीनियर। लेकिनएक लेखक के पहलू पर बहुत कम लोग ही ध्यान देते हैं। लेखक बनना एक गर्व की बात है। क्योंकि यह भी एक प्रकार की कला है जो हर क



सार्थकता

आपकी उपस्थिति से क्यों व्यक्ति स्वयं के दुःख भूल जाये यही आपकी उपस्थिति के सार्थकता है/



प्यार क्या है?

प्यार दो दिलो के बीचका एक गहरा स्नेह है। जो किसी दूसरी चिजो मे ना मिले वो सुखद एहसास है। गंगा की तरह पवित्र, यमुना की तरह सुंदर और हिमालय की तरह विशाल है, जिसे तोड़ना साधारण मानव के बस की बात नही। कुदरत का दिया हुआ वोतोहफा है जिसमे खुदा



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकुल मर चुकी है ? क्या हममे सोचने- समझने की शक्ति ही नहीं बची जो हम सम



दिमाग को कैसे विकसित करें?

यह लेख मन प्रबंधन कौशल से जुड़ी हुई जानकारियाँ पर आधारित हैं, जो कि आपके ब्रेन पावर को बढ़ाने में सहायक है। इसका उद्देश्य आपके दिमाग को प्रबंधित करने के तरीके में सुधार करना है, ताकि आप अपने दिमाग को विकास के रास्ते पर अधिक शक्तिशाली और सहयो



स्वास्थय

आज के समय मैं बहुत भाग्यवान हैं वो व्यक्ति जो शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण स्वस्थ हों| प्रदूषित वातावरण और आधुनिकीकरण की वजह से कहीं न कहीं हर इंसान पूरी तरह स्वस्थ नहीं है| हालाँकि हम योगा व्यायाम आदि की तरफ फिर से जागरूक हो रहे हैं, पर कितना? क्या व



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



कद

कद बढ़ा नहीं करते "ऐड़ियां"उठाने से*,*उचाइयां तो मिलती हैं "सर" झुकाने से*



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो



भूली बिसरी पाती स्नेह भरी --[ विश्व डाक दिवस ]

विश्व डाक दिवस -- आज विश्व डाक दिवस है | इस दिन के बहाने से चिट्ठियों के उस भूले बिसरे संसार में झाँकने का मन हो आया है ,जो अब गौरवशाली अतीत बन गया है | भारत में राजा रजवाड़ों के समय में संदेशों का आदान - प्रदान विश्वसनीय सन्देशवाहकों के माध्यम से होता था जो पैदल या घोड़ों आदि के माध्यम से



जादूगर

एक होता है जादूगर और दूसरा जादू। हाँ तुम जादू हो जादू। कुछ भी इतना ख़ास पहले नहीं था जितना तुमसे बतियाने के बाद। तुमसे बातें करने पर ऐसा होता था जैसे ख़ुद को ही ख़ुद की ही बातें समझानी हो। पता है, तुम वो जादू हो जो दुनिया के सारे जादूगर सीखना चाहते हैं, पाना चाहते हैं पर सबके बस का नहीं है ये। तुमको



परिवार

जहां सूर्य की किरण हो वहीं प्रकाश होता है जहां भगवान के दर्शन हो वहीं भव पर होता है जहां संतो के वाणी हो वही उद्धार होता है जहां प्रेम की भाषा हो वहीं परिवार होता है



कामयाबी

जितना बड़ा सपना होगा उतनी बड़ी तकलीफ होगी और जितनी बड़ी तकलीफ होगी उतनी बड़ी कामयाबी होगी



पन्नों पर भी पहरे हैं

पन्नों पर भी पहरे हैं✒️ बैठ चुका हूँ लिखने को कुछ, शब्द दूर ही ठहरे हैं,ज़हन पड़ा है सूना-सूना, पन्नों पर भी पहरे हैं।प्रेम किया वर्णों सेभावों कलम डुबोयासींची संस्कृति अपनीपूरा परिचय बोया,झंकृत अब मानस हैचमक रही है स्याहीपद्य सृजन में ठहराभटका सा एक राही;उभरें नहीं विचार पृष्ठ पर, सोये वे भी गहरे



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