आत्मा से आत्मा का मिलान

आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र



आत्मा और पुनर्जन्म

आत्मा और पुनर्जन्मविजय कुमार तिवारी यह संसार मरणधर्मा है। जिसने जन्म लिया है,उसे एक न एक दिन मरना होगा। मृत्यु से कोई भी बच नहीं सकता। इसीलिए हर प्राणी मृत्यु से भयभीत रहता है। हमारे धर्मग्रन्थों में सौ वर्षो तक जीने की कामना की गयी है-जीवेम शरदः शतम। ईशोपनिषद में कहा गया है कि अपना कर्म करते हुए मन



परम पूज्य सचिन बाबा का जाना

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महिलाओं के प्रति अपराध

आजकल न्यूज़ पढ़ने और देखने में डर लगता है। न्यूज चैनलस खोलते ही बुरी खबरों की बारिश होने लगती हैं । नियमित आपराधिक खबरोंमें भीड़ द्वारा किसी की हत्या, सीमा पर आतंक वादियों का उत्पात, देश में कहीं न कहीं कोई गैंग रेप । और हर बात पर सरकार और विपक्ष का एकदूसरे पर हमला । और ये सब इतनी नियमितता से हो रहा है



उसने कभी निराश नहीं किया

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प्यासी लोमड़ी



नूतन बनाम पुरातन

नूतन को पुरातन से हमेशा शिकायत रही है, आज भी है। इसके बावजूद कि पुरातन से ही नूतन का उद्भव हुआ है। मजेदार बात यह है कि नूतन को यह बात पता है, इसके बावजूद भी..। बात अगर केवल शिकायत तक सीमित रहती तो भी ठीक था, बात अब दोषारोपण तक पहुंच चुकी है। दोषारोपण इसलिए क्योंक



प्रेरणास्रोत एक खोज

अपना रोल मॉडल को कहाँ ढूढें?अपने मॉडल को पाने सबसे अच्छी जगह आपके विचार से सम्बन्धित संघ है। ऐसे संगठनों में स्वयंसेवी बनना अक्सर कुछ सबसे सफल सदस्यों से मिलने के लिए रास्ते विकसित करने का एक अच्छा तरीका है। विचार से सम्बंधित सम्मेलन भी एक उत्कृष्ट जरिया हो सकता हैं। यदि



सवर्णों को इस बिहार के मांझी की चेतावनी- 15% वाला देश जला सकता है तो 85% वाला हाथ में दही लेकर नहीं बैठा

कल तक सवर्ण समाज के लिए 10 फीसदी आरक्षण की बात करने वाले बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने सवर्ण समाज के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। चेतावनी भरे लहजे में मांझी ने कहा कि अगर 15 प्रतिशत वाला देश जला सकता है तो 85 प्रतिशत वाला हाथ में दही लेकर नहीं बैठा है। इसके साथ ही मां



मेजर ध्यानचंद: हॉकी के महान खिलाड़ी

लगभग चार दशकों से आज -29 अगस्त – देश भर में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि यह तिथि महान भारतीय खिलाड़ी – हॉकी लीजेंड मेजर ध्यान चंद की जयंती है। क्रिकेट में ब्रैडमैन की तरह, अपने क्षेत्र में ध्यान चंद की प्



श्रेष्ठतम सोच

श्रेष्ठतम सोच क्या है? यह आपके जीवन पर क्या प्रभाव डालती है? नीतिगत निर्णय में यह क्या रोल प्ले करती है? आदि ऐसे सोच/विचार से सम्बंधित सवाल आपक



मेदार क पर्यावरणपर्यावरण पर्यावरण अर्सलन के लिए ज़िम्मेदार कौन

हमारे देश में बढ़ता पर्यावरण आसनसोल वास्तव में ग्रामीण और नगर वासियों की एक दूसरे की परवाह न कर के प्राकृतिक दोहन जिम्मेदार है एक तरफ शहरों में मशीनीकरण के नाम पर ढूंगा और तापमान लगातार बढ़ रहा है जबकि अनियंत्रित औद्योगिकीकरण पर्यावरण असंतुलन को पैदा करता है लेकिन शहरों के उद्योगपति सोचते हैं कि



एक चिट्ठी ,भाई के नाम

भाई तुम्हे याद है जब तुम महज 11 साल के थे और मैं 13 साल की ा तुम बहूत बीमार थे ा तुम्हारा ऑपरेशन हुआ था ा ऑपरेशन के बाद मैं तुम्हे देखने तुम्हारे वार्ड में गयी ा उस टाइम पर भी तुम पर दवाइओं का असर था और तुम ढंग से होश में नहीं आये थे ा मैं तुम्हे देखकर वार्ड से बाहर आ रही थी तो तुमने कसकर मेरा ह



सावन के महीने का महत्व

सावन का नाम ध्यान में आते ही बरसात के 80 महीने की छवि उभरती है जिसमें बरसात की छोटी-छोटी बूंदें रिमझिम करती हुई साकार होती है सावन मानसून के मई मौसम का दूसरा महीना है इसलिए इस महीने में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है इसलिए इस पूरे महीने में त्यौहार मनाए जाते हैं सनातन धर्म में भगवान शि



रक्षाबंधन -" कमजोर धागे का मजबूत बंधन "

सावन का रिमझिम महीना हिन्दुओ के लिए पवन महीना होता है। आखिर हो भी क्यों न ये देवो के देव महादेव का महीना जो होता है। और इसी महीने के आखिरी दिन यानि पूर्णिमा को रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम को अभिवयक्त करने का एक जश्न है। जिसे आम बोल चाल में राखी कहते है। सुबह सुबह



महिला जागरूकता

आधुनिक समय में महिला जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है एक समय था जब महिलाएं अपने किसी भी प्रकार के फैसले को लेने के लिए अपने परिवार और संरक्षण पर निर्भर थी आज वह सभी प्रकार के फैसले खुद ले रही हैं शिक्षा में भी वह पुरुषों से आगे ही हैं आधुनिक युग में महिलाओं का हर क्षेत्र में दखल है वह सामान्य



फुर्सत के चंद लम्हे -"एक मुलाकात खुद से "

फुर्सत के चंद लम्हे जो मैं खुद के साथ बिता रही हूँ। घर से दूर,काम -धंधे,दोस्त - रिस्तेदार से दूर,अकेली सिर्फ और सिर्फ मैं। हां,आस बहरी दुनिया है कुछ लड़के - लड़किया जो मस्ती में डूबे है,कुछ बुजुर्ग जो अपने पोते - पोतियो के साथ खेल रहे है,कुछ और लोग है जो शायद मेरी तरह बेकार है या किसी का इंतज़ार कर रहे



इंसानियत को ताक पर रखते तेज़ाब के हमले - मयंक बाजपेई

चिड़िया बचाइए उससे अच्छा कार्य क्या होगा!!..परन्तु पहले अपनें आंगन की उस चिड़िया का ख्याल कर लीजिये😢 जो इस सम्पूर्ण समाज की आधारशिला रखती है, हमारे आंगन में जिसके फुदकने मात्र से सारा वातावरण संगीतमय हो जाता है, जो इस समाज की अन्नपूर्णा कही जाती है, और तो और समाज में दो प



युद्ध की चेतावनी है अमेरिका का स्पेस फ़ोर्स की घोषणा करना(Space Focre USA)

समस्त संसार में जब-जब अशांति फैली है उसका एक प्रमुख कारण सामनें आया है युद्ध का कारण | हालांकि आज के युग में युद्ध कई तरीके से लड़ा जाता है कहीं आर्थिक नीतियों द्वारा, सामरिक नीतियों द्वारा, कूटनीतियों द्वारा या फिर सेनाओं द्वारा | भले ही विश्व के कई मानवतावादी संगठन शांति के हिमायती हों लेकिन अभी भी



महिलाएं बनाम स्वतंत्रता



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