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लेख

लेख से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

सुषमा स्वराज- सर्वश्रेष्ठ भारतीय महिला राजनीतिज्ञ

भारत की पहली महिला विदेश मंत्री , दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीति क दल की पहली महिला प्रवक्ता ... इसमें कोई दोराय नहीं है कि सुषमा स्वराज जैसी कोई और विदेश मंत्री पहले भारत में नहीं थी ! उनकी उपलब्धि और काबिलियत उन्हें सभी से अलग बनाती



भरतबन्द का पंचनामा

अगर कोई पूछे कि आपने अपनी ज़िंदगी में सबसे क्रूर मज़ाक क्या सुना हैं तो मैं कहूँगा, "भारत का कानून सब भारतीयों के लिए एक बराबर हैं"। आरक्षण कानून, अल्पसंख्यक कानून, निजी कानून होने के बाद भी कोई दावा करे कि कानून सबके लिए एक बराबर हैं तो वो मज़ाक के अलावा कुछ हो ही नही ह



Non Resident Bihari : पढ़िएगा जरूर, क्यूंकि मज़ा बहुत आने वाला है

शायद आपने इस किताब को पढ़ा होगा या शायद नहीं भी पढ़ा होगा | खैर मैं तो कहूँगा कि इसे एक बार तो आपको जरूर पढ़ना ही चाहिए | इस किताब की कवर पेज को देखते ही आपके मन में कौतुहल जाग जायेगा कि आखिर इस किताब में क्या है? आप बेचैन होंगे जानने के लिए और इसे पढ़ने के लिए भी |अगर आप बिहार से है, तो आप खुदको शायद



‘शहनाई’ के जादूगर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान

‘शहनाई’ का जादू आज भी बरकरार है और समान्यतः हरशुभ अवसर पर उसको बजाया जाता है । 21 मार्च के दिन, उस्तादबिस्मिल्लाह खान को उनके 102वें जन्मदिन पर गूगल ने ‘डूडल’ बनाकर यादकिया गया ।सर्च इंजन गूगल ने डूडल



आपने ये तस्वीर खूब देखी होगी, लेकिन क्या ये जानते हैं कि ये आदमी कौन है?

बॉलीवुड के बारे में ख़बरों का सबसे बड़ा सोर्स – मायापुरी. लेकिन ये अब पुरानी बात है. नई बात मिलती है सोशल मीडिया पर. मैगज़ीन में छपने में देर लगती है. यहां बन्न से वायरल हो जाती है. खैर, हुआ ये कि पिछले कुछ वक़्त में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर खूब चली. एक महिला खड़ी है. वो कपड़े उतारने या पहनने का काम कर रह



शामली अधिवक्ता अनैतिक धरना-प्रदर्शन की राह पर

शामली के अधिवक्ता अनैतिक धरना-प्रदर्शन की राह पर चल पड़े हैं ,जहाँ कैराना में जिला न्यायाधीश की कोर्ट की स्थापना के लिए हाईकोर्ट व् सरकार के कदम बढ़ते हैं तभी शामली के अधिवक्ता अपना काम-काज ठप्प कर धरना प्रदर्शन करने बैठ जाते हैं , 2011 में प्रदेश सरकार न



कण कण में राम देखने वाले को क्या रामभक्त नही मानेंगे

व्हिस्की में विष्णु बसे, रम में बसे श्रीराम। जिन में माता जानकी और ठर्रे में हनुमान।।पिछले कुछ दिनों से ये पंक्तियां हर जगह छाई हुई हैं क्योंकि पिछले साल इस महान रचना को दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद में बोलकर, कुख्यात बनाने वाले सांसद नरेश अग्रवाल, मुल्ला मुलायम का साथ छोड़ राम भक्तों की टोली



इसे कहते हैं जापानियों का दिमाग, सुनामी रोकने के लिए समुद्र को ही कर दिया कैद

साल 2011 में जापान में आई टी सुनामी याद है आपको, वही जापान का काफी हिस्सा तबाह हो गया था। उस दौरान सुनामी की ऐसी ऐसी भयावह तस्वीरें मीडिया में आई थीं कि देखने वालों के होश उड़ गए थे। समुद्र की विशालकाय लहरों ने किनारे पर बनी इंसानी बस्तियों को तिनके की तरह बहा दिया था।समुद्र से उठी लहरों का जोर ऐसा



जातिगत आरक्षण

सामान्य वर्ग की व्यथा पर कुछ पंक्तिया . मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए..1.मेरी माँ का सपना है बेटा सरकारी अफसर बने,पिता दिन-रात मेहनत करके उस सपने को बुने, मेरे मात-पिता के सपनो को यू ना जलाइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्ष



इच्छामृत्यु की ये शर्तें जानकर तो मृत्यु की इच्छा ही खत्म हो जाए

वर्ष 2001 में सब टीवी का एक कार्यक्रम ऑफिस ऑफिस बहुत लोकप्रिय हुआ था। सरकारी दफ्तरों में ऊपर से नीचे तक फैली हुई कामचोरी और रिश्वतखोरी के ऊपर बने इस कार्यक्रम में एक किरदार सरकारी कर्मचारी पटेल का था जो आम आदमी को दो बातों के लॉजिक के स



जीवन का मर्म बस इतना है कि दाल में नमक कितना है...

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एक कलाकार जिसका कद समय के साथ ऊंचा ही होता गया

फिल्मों का शौक शुरू से रहा हैं पर गोविंदा वाली पीढ़ी में जन्म लेने के कारण कभी भी मनमोहन देसाई के ज़माने की फिल्में देखना अच्छा नही लगा। गुरुदत्त, राज कपूर की फिल्में तो जैसे किसी और ही दुनियां की लगती थी। राजेन्द्र कुमार, दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, जितेंद्र, विनोद खन्ना, शत्रुघन सिन्हा, धर्मेंद्र, विन



क्या नारीशक्ति यथार्थ है

नारी सशक्त हो रही है .इंटर में लड़कियां आगे ,हाईस्कूल में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ा ,आसमान छूती लड़कियां ,झंडे गाडती लड़कियां जैसी अनेक युक्तियाँ ,उपाधियाँ रोज़ हमें सुनने को मिलती हैं .किन्तु क्या इन पर वास्तव में खुश हुआ जा सकता है ?क्या इसे सशक्तिकरण कहा जा सकता है ? नहीं .....................



शादीशुदा दासी नहीं

आज जैसे जैसे महिला सशक्तिकरण की मांग जोर पकड़ रही है वैसे ही एक धारणा और भी बलवती होती जा रही है वह यह कि विवाह करने से नारी गुलाम हो जाती है ,पति की दासी हो जाती है और इसका परिचायक है बहुत सी स्वावलंबी महिलाओं का विवाह से दूर रहना . यदि हम सशक्तिकरण की परिभाषा में जाते हैं तो यही पाते हैं कि ''स



नारी शक्ति सिरमौर - कोई माने या न माने

''कुछ लोग वक़्त के सांचों में ढल जाते हैं ,कुछ लोग वक़्त के सांचों को ही बदल जाते हैं ,माना कि वक़्त माफ़ नहीं करता किसी कोपर क्या कर लोगे उनका जो वक़्त से आगे निकल जाते हैं .'' नारी शक्ति को लेकर ये पंक्तियाँ एकदम सटीक उतरती हैं क्योंकि न



बेटी की माँ

बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग जितने भी लोग बेटी के जन्म पर उपस्थित होते हैं सभी के चेहरे पर मुर्दनी सी ही छा जाती है.सबसे ज्यादा आश्



हाय रे औरतों की बीमारी

कवि शायर कह कह कर मर गए-''इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा,''''न कजरे की धार,न मोतियों के हार, न कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुन्दर हो,तुम कितनी सुन्दर हो.'' पर क्या करें आज की महिलाओं के दिमाग का जो बाहरी सुन्दरता को ही सबसे ज्



नारी क्यूं बनती है बेचारी

दुष्कर्म आज ही नहीं सदियों से नारी जीवन के लिए त्रासदी रहा है .कभी इक्का-दुक्का ही सुनाई पड़ने वाली ये घटनाएँ आज सूचना-संचार क्रांति के कारण एक सुनामी की तरह नज़र आ रही हैं और नारी जीवन पर बरपाये कहर का वास्तविक परिदृश्य दिखा रही हैं . भारतीय दंड सहिंता में दुष्कर्म ये है - भारतीय दंड संहिता १



मासूम बच्चों से यौन अपराध -जिम्मेदारी आधुनिक नारीकी?

''आंधी ने तिनका तिनका नशेमन का कर दिया , पलभर में एक परिंदे की मेहनत बिखर गयी .'' फखरुल आलम का यह शेर उजागर कर गया मेरे मन में उन हालातों को जिनमे गलत कुछ भी हो जिम्मेदार नारी को ठहराया जाता है जिसका सम्पूर्ण जीवन अपने परिवार के लिए त्याग और समर्पण पर आधारित रहता है .



संभल जा रे नारी .....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपना नाम बताया ,अच्छा लगा ,कई वर्षों बाद अपनी सहपाठी से बात कर रही हूँ ,पर आश्चर्य हुआ कि आखिर उसे मेरा नंबर कैसे मिला ,क्योंकि आज जो फोन नंबर की स्थिति



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