जीवित हो अगर, तो जियो जीभरकर...

जीवित हो अगर, तो जियो जीभरकर...जीते तो सभी हैं पर सभी का जीवन जीना सार्थक नहीं है। कुछ लोग तो जिये जा रहे हैं बस यों ही… उन्हें खुद को नहीं पता है कि वे क्यों जी रहे हैं? क्या उनका जीवन जीना सही मायनें में जीवन है। आओ सबसे पहले हम जीवन को समझे और इसकी आवश्यकता को। जिससे कि हम कह सकें कि जीवित हो अगर



आत्माराम

आत्माराम उसके घर का रास्ता बनारस की जिस प्रमुख मंडी से होकर गुजरता था। वहाँ यदि जेब में पैसे हों तो गल्ला-दूध , घी-तेल, फल-सब्जी, मेवा-मिष्ठान सभी खाद्य सामग्रियाँ उपलब्ध थीं।लेकिन, इन्हीं बड़ी-बड़ी दुकानों के मध्य यदि उसकी निगाहें किसी ओर उठती,तो वह सड़क के नुक्कड़ पर स्थित विश्वनाथ साव की कचौड़



हिंदी साहित्य के धरोहर "मुंशी प्रेमचंद"

हिंदी साहित्य के धरोहर "मुंशी प्रेमचंद"जनमानस का लेखक, उपन्यासों का सम्राट और कलम का सिपाही बनना सबके बस की बात नहीं है। यह कारनामा सिर्फ मुंशी प्रेमचंद जी ने ही कर दिखाया। सादा जीवन उच्च विचार से ओतप्रोत ऐसा साहित्यकार जो साहित्य और ग्रामीण भारत की समस्याओं के ज्यादा करीब रहा। जबकि उस समय भी लिखने



तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……

तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……आए दिन हमें लोंगों की शिकायतें सुनने को मिलती है….... लोग प्रायः दुःखी होते हैं। वे उन चीजों के लिए दुःखी होते हैं जो कभी उनकी थी ही नहीं या यूँ कहें कि जिस पर उसका अधिकार नहीं है, जो उसके वश में नहीं है। कहने का मतलब यह है कि मनुष्य की आवश्यकतायें असीम हैं….… क्योंकि



क्या मृत्यु से डरना चाहिए……?

क्या मृत्यु से डरना चाहिए……?अगर हम बात मृत्यु की करते हैं तो अनायास आँखों के सामने किसी देखे हुए मृतक व्यक्ति के शव का चित्र उभरकर आ जाता है। मन भी न चाहते हुए शोकाकुल हो उठता है। आखिर ऐसी मनस्थिति के पीछे क्या वजह हो सकती है…? जबकि आज के परिवेश में घर के अंदर भी हमें दिन में ही ऐसी लाशों को देखने क



क्या कहेंगें आप...?

क्या कहेंगें आप...?हम सभी जानते हैं कि प्रकृति परिवर्तनशील है। अनिश्चितता ही निश्चित, अटल सत्य और शाश्वत है बाकी सब मिथ्या है। बिल्कुल सच है, हमें यही बताया जाता है हमनें आजतक यही सीखा है। तो मानव जीवन का परिवर्तनशील होना सहज और लाज़मी है। जीवन प्रकृति से अछूता कैसे रह सकता है…? जीवन भी परिवर्तनशील ह



कोरोना महामारी और बकरीद पर्व

पिछले चार महीनें से कोरोना वायरस का प्रकोप चारो ओर फैला हुआ है। कोरोना महामारी के कारण लोंगों का जीना मुहाल है। ऐसे में मुसलमान भाइयों के बकरीद पर्व का आगमन हो रहा है। पूरा विश्व आज कोरोना से त्राहि त्राहि कर रहा है तो ऐसे में बकरीद का पर्व इससे अछूता कैसे रह सकता है। कोरोना के चलते विश्वव्यापी मंदी



अतीत का सुख

एक बार कि बात है एक कस्बे में पति औरपत्नी रहते थे, दोनों की उम्र 25 साल थी वो दोनों ही विवाह के लिए मानसिक रुप सेतैयार नहीं थे हालांकि दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। दोनों ही सजातीय थे औरदोनों के परिवार एक ही गांव में रहते थे तो उनके परिवा



गोपालदास नीरज जी की पुण्यतिथि

अभावों और पीड़ा को गान बना देने वाले प्रेम और विरहके साधक, बादलों से सलाम लेने वाले,विभावरी, आसावरी और अंतर्ध्वनि के गायक पद्मभूषणश्री गोपालदास नीरज – जिनके गीतों, ग़ज़लों, दोहों के एक एक शब्द में – एक एक छन्द में मानों एक नशा सा भरा हुआ है...जो कभी दार्शनिक अन्दाज़ में कहते हैं... “नींद भी खुली नथी कि



सफलता प्राप्ति के लिए क्या करें

सफलताप्राप्ति के लिए क्या करेंअक्सर लोग इस बात पर मार्गदर्शन के लिए आते हैं कि उन्हें अपने कार्यों मेंसफलता प्राप्त नहीं होती, क्या करें इसके लिए ? कई बार लोग कहते हैं किहमारी जन्मपत्री देखकर कोई उपाय बताइये | हम उन सबसे यही कहते हैं कि भाईजन्मपत्री अपनी जगह है, प्रयास तो आपको स्वयं ही करना होगा |अन



कल्पना

ये वो काल है जो लोगों को उसकी वास्तविकता से अवगत कराया है ! कल्पना की उड़ान बहुत ऊँची होती है और ये इतनी ऊँची होती है कि लोगों का सोच उसी मनोदशा में जीना सीख लेती है ! जब कभी कल्पनाओं का आसमान उनके ऊपर से हट जाता है तो वो वास्तविकता को ढूंढने लग जाते



"सत्याग्रही हिंदी और विकास "

"सत्याग्रही हिंदी और विकास "हिंदी बढती लो बिंदी चढती और हमें सिखाती |समूह बना बोलियाँ मिलाती औ बाजार बढ़ाती ||हिंदी पर बात हो, भाषा पर विचार हो ऐसे में बाल गंगाधर तिलक को कौन भूल सकता है | उनहोंने कहा है कि-'मैं उन लोगों में से हूँ जिनका विचार है और जो चाहते हैं कि हिंदी ही राष्ट्र भाषा हो सकती है



हत्या या एनकाउंटर

🔴संजय चाणक्य " कलम सत्य की शक्तिपीठ है बोलेगी सच बोलेगी। वर्तमान के अपराधो को समय तुला पर तोलेगी।। पांचाली के चीरहरण पर जो चुप पाये जायेगे। इतिहास के पन्नों पर वो सब कायर कहलायेगे।।"देश के सबसे बडे सूबे मे कानपुर के डिप्टी एसपी सहित आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा व पांच लाख का इनामी गैगेस्टर



अपनी भूलों से घबराएँ नहीं, उनसे शिक्षा लें

अपनी भूलों से घबराएँ नहीं, उनसे शिक्षालेंहमारे पास किसी समस्या से त्रस्त होकर कंसल्टेशन के लिए जो लोग आते हैं तोकई बार वे प्रश्न कर बैठते हैं कि डॉ पूर्णिमा, हमने तो जीवन में कभी कोईभूल नहीं की – कभी कोई अपराध नहीं किया – फिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? कलभी कुछ ऐसा ही हुआ | किन्हीं सज्जन से फोन



भारत भ्रमण - हुमायूँ का मक़बरा

Humayun’s TombFriends!from today on WOW India channel, we are going to start a new program – भारत भ्रमण – tour of India –with an executive member of WOW India, Sunanda Srivastava, who was an officerin archaeological department of India. Through this program we will give youthe information about vari



गुरु पर्व - गुरु पूर्णिमा

अज्ञान्तिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकयाचक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमःआजगुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है | कल प्रातः 11:35 के लगभग पूर्णिमा तिथि का आगमन हुआथा | जो आज सवा दस बजे तक रहेगी | उदया तिथि होने के कारण गुरु पूजा का पर्व आज हीमनाया जाएगा | पूर्णिमा काव्रत क



देवशयनी एकादशी

देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी, विष्णु एकादशी,पद्मनाभा एकादशी हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है| प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमेंसे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | साथ ही आषाढ़ मास में होने के कारण इसे आषाढ़



Yovo app से एक महीने में कोई व्यक्ति कितना कमा सकता है?

कितना कमा सकते हैं योवो पर जीत कर



Sketches from life: घर में योग 2020

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है. हर साल इस 'त्यौहार' की कोई ना कोई थीम रख दी जाती है और इस बार अर्थात 2020 की थीम है 'घर में योग'. कोरोना के साइड इफ़ेक्ट कहाँ नहीं पहुंचे!पिछले बरसों में क्रम यूँ था:योग दिवस 2015 की थीम थी - सामंजस्य और शांति,योग दिवस 2016



मानसिक असन्तुष्टि और अशान्ति

मानसिक असन्तुष्टि और अशान्तिहमारा मन वास्तव में स्वयं को किसी न किसी रूप में अपूर्ण - अधूरा -असन्तुष्ट मानने के लिए स्वतन्त्र है । लेकिन क्या डिप्रेस होकर - स्वयं से अथवासमाज या व्यवस्था की ओर से निराश होकर आत्महत्या कर लेना ही इस समस्या का समाधानहै ? संसारतो पहले से ही नाशवान है, स्वयं उस दिशा में



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