गली गली में शोर है ...

बचपनमें हमने भी नगर पालिका वार्ड्स इत्यादि चुनाव में बिना किसी भेद भाव या राजनीति केआयाराम के जुलूस में शामिल होकर नारे लगाए थे “गली गली में शोर है गयाराम चोर है” औरगयाराम के जुलूस में शामिल होकर नारे लगाए थे “ गली गली में शोर है आयाराम



क्या आप जानते है उपभोक्ता के अधिकार?बहुत महत्वपू्र्ण हैं पांचो अधिकार

आज पूरे देश में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जा रहा है। यह उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण के लिए 15 मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत करने वाले अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी थे। उन्होने उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे पर अमेरिकी कांग्र



वर्ल्ड वाइड वेब का 30वां सालगिरह गूगल ने बनाया डूडल | 30th anniversary of the World Wide Web is Google's doodle

इंटरनेट के प्रयोग से सभी का जीवन आसान हो गया है। आज वर्ल्ड वाइड वेब के शुरुआत के 30 साल पूरे हो गए है। गूगल ने वर्ल्ड वाइड वेब के 30वें सालगिरह (30th Anniversary Of The World Wide Web) के मौके पर अपने डूडल के जरिए समर्पित कर रहा है। इसे गूगल ने बहुत बड़े स्तर पर सूचनाओं को प्राप्त करने के तकनीकी के



चुनावी वादों से आगे

जैसे-जैसे चुनाव का मौसम नजदीक आता है, राजनीतिक वर्ग के पास करने के लिए बहुत से काम होते हैं। लेकिन आम नागरिकों को अपने काम में कटौती करनी पड़ती है, क्योंकि उनके ऊपर नारों की बमबारी की जाती है। साधारण नागरिकों को अलग-अलग राजनीतिक दलों से आने वाली सूचनाओं और आख्यानों को चुपचाप नहीं सुनना चाहिए। उन्हें



गूगल ने रूसी गणितज्ञ Olga Ladyzhenskaya के 97 वें जन्मदिन पर डूडल बनाकर सम्मान दिया, जानें कौन थीं Olga Ladyzhenskaya?

रूसी गणितज्ञ ओल्गा लेडीज़ेन्काया के 97 वीं जयंती के अवसर पर आज Google ने डूडल बनाकर सम्मान दिया। लेडीज़ेन्स्काया को partial differential equations और fluid dynamics पर किये गए काम के लिए जाना जाता है। फोटो के नीचे अवकल समीकरण (Differential equation) को दिखाया गया है, जो उ



प्रश्न कीजिये

प्रश्न कीजिएविजय कुमार तिवारीबच्चा जैसे ही अपने आसपास को देखना शुरु करता है उसके मन में प्रश्न कुलबुलाने लगते हैं।वह जानना चाहता है,समझना चाहता है और पूछना चाहता है।जब तक बोलने नहीं सीख जाता,व्यक्त करने नहीं सीख जाता,उसके प्रश्न संकेतों में उभरते हैं।उसे यह धरती,यह आकाश,य



लोकतन्त्र

लोकतन्त्रलोकतन्त्र,आज़ादी, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता,संप्रदायवाद,सेकुलर ये बड़े बड़े शब्द राजनेता और राजनीतिक पार्टियों द्वारा हर दिन अनेकों बारप्रयोग किये जाते हैं। संसद में आये दिन होने वाला हँगामा और पूरे पूरे सत्र संसदन चलने देना भी लोकतन्त्र है। इसमेंबदलाव आना चाहिये। यूं तो सड़क पर भी आप को सभ्य



'दादी' के आते ही घर-आंगन से रूठा वसंत लौट आया ...

हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न



अटल बिहारी वाजपेयी बनने की राह पर मुलायम

- संजय अमान भारत का ईतिहास गवाह है सत्ता के लिए किसी भी हद तक चले जाना राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा ही नहीं ज़रूरत भी होता है परन्तु इनसब से ऊपर राष्ट्र हीत की चिंता बहुत ही कम राजनीतिज्ञों को करते हुए देखा गया है वर्त्तमान में यही दृश्य देखने को मिलता है। अब वह दिन नहीं रहे या सिर्फ क़िताबों में या पु



Valentine Day 2019: कपड़ों के रंग से जानें इंगेज्ड, सिंगल आदि रिलेशनशिप स्टेटस

वेलेन्टाइन डे के दिन यदि आप कॉलेज़, ऑफिस या बाहर जाने के लिए सोच रहे हैं तो जरा अपने आउटफिट्स के रंग पर गौर कर लें क्योंकि इस दिन पहने जाने वाले कलर्स आपका रिलेशनशिप स्टेटस बताते हैं कि आप इंगेज़्ड हैं या सिंगल ? साथ ही इस वेलेन्टाइन डे पर आपको एक ऐसी ट्रिक बतायेंगे जिससे



दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलत



कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर

कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर - संजय अमानज्यो -ज्यो लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आते जा रहे है चुनावी सरगर्मिया बढ़ती जा रही है तरह -तरह के आरोप राजनीतिक पार्टिया एक दूसरे पर लगा रही है यैसे मे



चुनाव 2019

चुनाव-2019विजय कुमार तिवारीहम वोट देने वाले हैं।वोट देना हमारा अधिकार है और कर्तव्य भी।यह बहुत संयम, धैर्य और विचार का विषय है।आज से पहले शायद कभी भी हमने इस तरह नहीं सोचा।चुनाव आयोग और हमारे संविधान ने इस विषय में बहुत से दिशा-निर्देश जारी किये हैं।हम सभी सामान्य वोटर को बहुत कुछ पता भी नहीं है।कई



अपनी प्रतिभा को कैसे पहचानें, यह आपकी रचनात्मकता को बढ़ाने में कैसे सहायक है?

प्राणी जगत में सभी लोग एक जैसे गुण वाले नहीं होते हैं। सभी की कुछ ना कुछ अलग विशेषता होती है, जो उन्हें एक दूसरे से अलग करती है। ठीक उसी तरह सभी लोगों में कुछ विशेष प्रतिभा होती है। इसी प्रतिभा विशेष को पहचानकर और इसे अपने जीवन शैली में शामिल कर कुछ लोग अपने कार्य क्षेत्र



प्रेम का मौसम

प्रेम का मौसमविजय कुमार तिवारीप्रेम का मौसम चल रहा है और बहुत से युवा,वयस्क और स्वयं को जवान मानने वाले वृद्ध खूब मस्ती में हैं।इनकी व्यस्तता देखते बनती है और इनकी दुनिया में खूब भाग-दौड़ है।प्रयास यही है कि कुछ छूट न जाय और दिल के भीतर की बातें सही ढंग से उस दिल तक पहुँच



पुरानी यादे

पुरानी यादेंविजय कुमार तिवारी1983 में 4 सितम्बर को लिखा-डायरी मेरे हाथ में है और कुछ लिखने का मन हो रहा है। आज का दिन लगभग अच्छा ही गुजरा है।ऐसी बहुत सी बातें हैं जो मुझे खुश भी करना चाहती हैं और कुछ त्रस्त भी।जब भी हमारी सक्रियता कम होगी,हम चौकन्ना नहीं होंगे तो निश्चित मानिये-हमारी हानि होगी।जब हम



अन्तर्यात्रा का रहस्य

अन्तर्यात्रा का रहस्यविजय कुमार तिवारीकर सको तो प्रेम करो।यही एक मार्ग है जिससे हमारा संसार भी सुव्यवस्थित होता है और परमार्थ भी।संसार के सारे झमेले रहेंगे।हमें स्वयं उससे निकलने का तरीका खोजना होगा।किसी का दिल हम भी दुखाये होंगे और कोई हमारा।हम तब उतना सावधान नहीं होते जब हम किसी के दुखी होने का का



भूख की आग…………

बहुत पहले की बात है किसी राज्य मे एक राजा रहता था ! राजा बहुत ही बहादुर,पराकर्मी होने के साथ-साथ घमंडी और दुष्ट प्रवृति का भी था ! उसने बहुत से राजाओं को हराकर उनके राज्य पर कब्जा कर लिया ! उसके बहादुरी और दुष्टता के किस्से दूर-दूर तक फैला हुआ था ! वो किसी भी साधु-महात्मा



वो बूढ़ी औरत…..

रोज सुबह ड्यूटी पे जाना रोज शाम लौट के रूम पे आना,ये रूटीन सा बन गया था, मोहन के लिये ! हालाँकि रूम से फैक्ट्री ज़्यादा दूर नहीं था, तकरीबन१०-१५ मिनट का रास्ता है ! मोहन उत्तर प्रदेश का रहने वाला है,करीब २ सालों से यहाँ (नोएडा) मे एक प्राइवेट फैक्ट्री मे काम कर रहा है ! र



"9:45 की लोकल"

ऑटो स्टैंड से दौड़ता हुआ , मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुँचा, पता चला 9:45 की लोकल जा चुकी है !मेरे घर से तकरीबन 9 .कि.मि. दूर पर है रेलवे स्टेशन, छोटा सा स्टेशन है,लोकल ट्रेन के अलावा 1-2 एक्शप्रेस ट्रेन की भी स्टोपीज़ है, मैं स्टेशन मास्टर के पास गया और पूछा सर बनारस के लिए कोई ट्रेन है ! स्टेशन मास



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