भारतीय संस्कृति का प्रतीक हिमालय

संस्कृत साहित्य में हिमालय- भारतीयसंस्कृति का प्रतीककुछदिवस पूर्व “हिमालय - अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक” शीर्षक से एक लेख सुधीजनोंके समक्ष प्रस्तुत किया था | आप सभी से प्राप्त प्रोत्साहन के कारण आज उसी लेख कोकुछ विस्तार देने का प्रयास रहे हैं जिसका भाव यही है कि ह



कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने की जरुरत है - अनिल विश्वकर्मा

कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने की जरुरत है - अनिल विश्वकर्मा मुम्बई - प्रेमा देवी एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन अनिल विश्वकर्मा पिछले कई वर्षो से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे है अपनी संस्था के माध्यम से वह नालासोपारा और पालघर जिले के अंतर्गत आने वाले सभी स्लम में अपनी संस्था '' प्रेमा देवी एजुकेशनल ट्र



प्राचीन विदेशी यात्री

अल बेरुनी प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप में ज्ञान, विज्ञान, व्यापार, धर्म और अध्यात्म का बहुत विकास हुआ. इस विकास की ख़बरें मौखिक रूप में व्यापारियों के माध्यम से फारस, ग्रीस, रोम तक पहुँच जाती थी. इसकी वजह से व्यापारी, पर्यटक, बौद्ध भिक्खु तो आते ही थे बहुत से हमलावर



यादों की ज़ंजीर

यादों की ज़ंजीर(जीवन के रंग) रात्रि का दूसरा प्रहर बीत चुका था, किन्तु विभु आँखें बंद किये करवटें बदलता रहा। एकाकी जीवन में वर्षों के कठोर श्रम,असाध्य रोग और अपनों के तिरस्कार ने उसकी खुशियों पर वर्षों पूर्व वक्र-दृष्टि क्या डाली कि वह पुनः इस दर्द से उभर नहीं सका है। फ़िर भी इन बुझी हुई आशाओं,टूटे



अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक हिमालय

हिमालय - अदम्य साधनाकी सिद्धि का प्रतीक आज देश भर में एक ही विषय पर सब लोग बात कर रहे हैं –सुशान्त सिंह मर्डर केस और कँगना रनौत तथा महाराष्ट्र सरकार के बीच वाद विवाद |सारे समाचार पत्रों और सारे न्यूज़ चैनल्स के पास केवल यही दो विषय अधिकाँश में रहगए हैं ऐसा जान पड़ता है | इन समाचारों को देखते सुनते पढ़त



समाज और देश के उत्थान में युवाओं की भूमिका

समाज और देश के उत्थान में युवाओं की भूमिकासमाज और देश के उत्थान में युवाओं की अहम भूमिका होती है। मैं युवाओं की बात को स्वामी विवेकानंद जी के उन विचारों के माध्यम से शुरू कर रहा हूँ जिनमें युवाओं को विशेष रूप से संबोधित किया गया है। स्वामीजी की मान्यता है कि भारतवर्ष का नवनिर्माण शारीरिक शक्ति से न



हिंदी अध्यापक संघ द्वारा आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह'

कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ द्वारा आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह'कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारा ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से आयोजित 'शिक्षक दिवस समारोह' दिनांक 8 सितंबर, 2020 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन ही 'शिक्षक दिवस समारोह' का आयोजन



अधिक मास

पुरुषोत्तममास अथवा अधिक मास आज पितृपक्ष की पञ्चमी तिथि है | 17 सितम्बर को पितृविसर्जनी अमावस्याहै | हर वर्ष महालया से दूसरे दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रआरम्भ हो जाते हैं | किन्तु इस वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है | इस वर्ष आश्विन मास मेंमल मास यानी अधिक मास हो रहा है | अर्थात 18 सितम्बर



इश्क़ में बहने लगा

वो मुझे कहने लगातेरे इश्क़ में बहने लगावक़्त की बात है फिर तुझसे हुई मुलाक़ात हैंकर लेंगे हम आहिस्ता आहिस्ता तुझ पर भी भरोसा अब जो उसका आश खोने लगाहम है तेरे लिए बेशक ग़ैर हैमगर हमें तो आज भी भरोसा है जैसे चाँद को तारों से इश्क़ होने लगा



शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवसकल पाँच सितम्बर है – शिक्षकदिवस से सम्बन्धित बैठकों, काव्य सन्ध्याओं, साहित्यसन्ध्याओं और अन्य प्रकार के कार्यक्रम आरम्भ हो चुके हैं | सर्वप्रथम सभी कोशिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ...जीवन में प्रगति पथ परअग्रसर होने और सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा के महत्त्व से कोई भी इन्कारनहीं कर सकता,



फेरीवाला

फेरीवाला **********(जीवन के रंग) वही अनबुझी-सी उदासी फिर से उसके मन पर छाने लगी थी। न मालूम कैसे यह उसके जीवन का हिस्सा बन गयी है कि दिन डूबते ही सताने चली आती है। बेचैनी बढ़ने पर मुसाफ़िरख़ाने से बाहर निकल वह भुनभुनाता है-- किस मनहूस घड़ी में उसका नाम रजनीश रख दिया गया है ,जबकि उसके खुद की ज़िदगी म



असहिष्णुता....

असहिष्णुता….मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व और सोच-विचार पर खान-पान व रहन-सहन का बहुत असर पड़ता है। कहा जाता है जैसा खान-पान, वैसा अचार-विचार। अर्थात सादा जीवन, सादा भोजन - उच्च विचार। जिस तरह से फसल को समय-समय से सींचा जाता है, खाद-पानी दिया जाता है तो उसका समुचित विकास होता है। जिसका उचित देखभाल



श्राद्ध पक्ष में पाँच ग्रास निकालने का महत्त्व

श्राद्ध पक्ष में पाँच ग्रास निकालने का महत्त्वश्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ - जोश्रद्धापूर्वक किया जाए वह श्राद्ध है | यद्यपि इस वाक्य की व्याख्या बहुत विशद हो सकतीहै – क्योंकि श्रद्धा तो किसी भी के प्रति हो सकती है | किन्तु यहाँ हम श्राद्धपक्ष के सन्दर्भ में बात कर रहे हैं कि अपने दिवंगत पूर्वजों के निमि



अनन्त चतुर्दशी

अनन्त चतुर्दशीअनंन्तसागरमहासमुद्रेमग्नान्समभ्युद्धरवासुदेव । अनंतरूपेविनियोजितात्माह्यनन्तरूपायनमोनमस्ते || भाद्रपदमास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है । इस वर्ष सोमवार 31 अगस्त को प्रातः 8:49 के लगभग चतुर्दशी तिथि का आगमनहोगा जो पहली सितम्बर को प्रातः 9:38 तक विद्यमान रहेगी और



श्राद्ध पर्व

श्रद्धाऔर भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्वभाद्रपदशुक्ल चतुर्दशी यानी पहली सितम्बर को क्षमावाणी – अपने द्वारा जाने अनजाने किये गएछोटे से अपराध के लिए भी हृदय से क्षमायाचना तथा दूसरे के पहाड़ से अपराध को भी हृदयसे क्षमा कर देना – के साथ जैन मतावलम्बियों के दशलाक्षण पर्व का समापन होगा |वास्तव में कितनी उदात्त



Sketches from life: प्राचीन विदेशी यात्री 1/3

भारतीय इतिहास को क्रोनोलॉजी याने कालक्रम के अनुसार मोटे तौर पर चार भागों में बांटा गया है - प्राचीन काल, मध्य काल, आधुनिक काल और 1947 के बाद स्वतंत्र भारत का इतिहास. प्राचीन इतिहास लगभग सात हज़ार ईसापूर्व से सात सौ ईसवी तक माना जाता है. इतने पुराने समय के हालात जानने के लि



पर्यूषण पर्व

पर्यूषण पर्वभाद्रपद कृष्ण एकादशी – जिसे अजा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है – यानी15 अगस्त से आरम्भ हुएश्वेताम्बर जैन मतावलम्बियों के अष्ट दिवसीय पर्यूषण पर्व का कल सम्वत्सरी के साथसमापन हो चुका है और आज भाद्रपदशुक्ल पञ्चमी से दिगम्बर जैन समुदाय के दश दिवसीय पर्यूषण पर्व का आरम्भ हो रहा है| जैन पर्



विश्व पटलपर हिंदी साहित्य

सुखमंगल सिंहविश्व पटलपर हिंदी साहित्य-सुखमंगल सिंह हिंदी साहित्य के व्यापक इतिहासों में विशेष कर हिंदी साहित्य का इतिहास आचार्य रामचंद्र शुक्ल,हिंदी साहित्य का बृहद इतिहाससोलह भाग,मिश्रबंधु विनोद,हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास जैसे ग्रंथों में मान्यता प्राप्त कर स



कालिदास सदा सम सामयिक

कालिदास सदा सम सामयिकआषाढ़शुक्ल प्रतिपदा – जो की इस वर्ष 21 जून को थी – को महाकवि कालिदास के जन्मदिवस के रूप में कुछ लोग मानते हैं| अभी पिछले दिनों एक मित्र इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे कि कोरोना संकट के कारणमहाकवि की जयन्ती नहीं मनाई जा सकी | मैं कालिदासकी अध्येता हूँ और वे हमारे प्रिय कवि हैं, सो उन



पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है....

पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है…..मनुष्य स्वभाव से ही बहुत लालची और महत्त्वाकांक्षी होता है। अर्थ, काम, क्रोध, लोभ और माया के बीच इस तरह फँसता है कि बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह उस दलदल के समान है जिसमें से जितना ही बाहर निकलने का प्रयास किया जाता इंसान उस दलदल में और फँसता जाता है। इस सं



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