कद

कद बढ़ा नहीं करते "ऐड़ियां"उठाने से*,*उचाइयां तो मिलती हैं "सर" झुकाने से*



प्रतिभाशाली गधे

आज दिल्ली में गर्मी आपने उफान पे थी। अपनी गाड़ी की सर्विस कराने के लिए मै ओखला सर्विस सेंटर गया था। गाड़ी छोड़ने के बाद वहां से लौटने के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढने लगा। थोड़ी ही देर में एक ऑटो रिक्शा वाला मिल गया। मैंने उसे बदरपुर चलने को कहा। उसने कहा ठीक है साब कितना दे दो



भूली बिसरी पाती स्नेह भरी --[ विश्व डाक दिवस ]

विश्व डाक दिवस -- आज विश्व डाक दिवस है | इस दिन के बहाने से चिट्ठियों के उस भूले बिसरे संसार में झाँकने का मन हो आया है ,जो अब गौरवशाली अतीत बन गया है | भारत में राजा रजवाड़ों के समय में संदेशों का आदान - प्रदान विश्वसनीय सन्देशवाहकों के माध्यम से होता था जो पैदल या घोड़ों आदि के माध्यम से



जादूगर

एक होता है जादूगर और दूसरा जादू। हाँ तुम जादू हो जादू। कुछ भी इतना ख़ास पहले नहीं था जितना तुमसे बतियाने के बाद। तुमसे बातें करने पर ऐसा होता था जैसे ख़ुद को ही ख़ुद की ही बातें समझानी हो। पता है, तुम वो जादू हो जो दुनिया के सारे जादूगर सीखना चाहते हैं, पाना चाहते हैं पर सबके बस का नहीं है ये। तुमको



परिवार

जहां सूर्य की किरण हो वहीं प्रकाश होता है जहां भगवान के दर्शन हो वहीं भव पर होता है जहां संतो के वाणी हो वही उद्धार होता है जहां प्रेम की भाषा हो वहीं परिवार होता है



कामयाबी

जितना बड़ा सपना होगा उतनी बड़ी तकलीफ होगी और जितनी बड़ी तकलीफ होगी उतनी बड़ी कामयाबी होगी



पन्नों पर भी पहरे हैं

पन्नों पर भी पहरे हैं✒️ बैठ चुका हूँ लिखने को कुछ, शब्द दूर ही ठहरे हैं,ज़हन पड़ा है सूना-सूना, पन्नों पर भी पहरे हैं।प्रेम किया वर्णों सेभावों कलम डुबोयासींची संस्कृति अपनीपूरा परिचय बोया,झंकृत अब मानस हैचमक रही है स्याहीपद्य सृजन में ठहराभटका सा एक राही;उभरें नहीं विचार पृष्ठ पर, सोये वे भी गहरे



" बृद्धाआश्रम "बनाम "सेकेण्ड इनिंग होम "

" बृद्धाआश्रम "ये शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते है। कितना डरावना है ये शब्द और कितनी डरावनी है इस घर यानि "आश्रम" की कल्पना। अपनी भागती दौड़ती ज़िन्दगी में दो पल ढहरे और सोचे, आप भी 60 -65 साल के हो चुके है ,अपनी नौकरी और घर की ज़िम्मेदारियों से आज़ाद हो चुके है। आप के



हमारी प्यारी बेटियाँ

"बेटियाँ "कहते है बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती है ,घर की रौनक होती है। ये बात सतप्रतिस्त सही है। इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता कि बेटियाँ ही इस संसार का मूल स्त



आत्मा से आत्मा का मिलान

आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र



आत्मा और पुनर्जन्म

आत्मा और पुनर्जन्मविजय कुमार तिवारी यह संसार मरणधर्मा है। जिसने जन्म लिया है,उसे एक न एक दिन मरना होगा। मृत्यु से कोई भी बच नहीं सकता। इसीलिए हर प्राणी मृत्यु से भयभीत रहता है। हमारे धर्मग्रन्थों में सौ वर्षो तक जीने की कामना की गयी है-जीवेम शरदः शतम। ईशोपनिषद में कहा गया है कि अपना कर्म करते हुए मन



परम पूज्य सचिन बाबा का जाना

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महिलाओं के प्रति अपराध

आजकल न्यूज़ पढ़ने और देखने में डर लगता है। न्यूज चैनलस खोलते ही बुरी खबरों की बारिश होने लगती हैं । नियमित आपराधिक खबरोंमें भीड़ द्वारा किसी की हत्या, सीमा पर आतंक वादियों का उत्पात, देश में कहीं न कहीं कोई गैंग रेप । और हर बात पर सरकार और विपक्ष का एकदूसरे पर हमला । और ये सब इतनी नियमितता से हो रहा है



उसने कभी निराश नहीं किया

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प्यासी लोमड़ी



नूतन बनाम पुरातन

नूतन को पुरातन से हमेशा शिकायत रही है, आज भी है। इसके बावजूद कि पुरातन से ही नूतन का उद्भव हुआ है। मजेदार बात यह है कि नूतन को यह बात पता है, इसके बावजूद भी..। बात अगर केवल शिकायत तक सीमित रहती तो भी ठीक था, बात अब दोषारोपण तक पहुंच चुकी है। दोषारोपण इसलिए क्योंक



प्रेरणास्रोत एक खोज

अपना रोल मॉडल को कहाँ ढूढें?अपने मॉडल को पाने सबसे अच्छी जगह आपके विचार से सम्बन्धित संघ है। ऐसे संगठनों में स्वयंसेवी बनना अक्सर कुछ सबसे सफल सदस्यों से मिलने के लिए रास्ते विकसित करने का एक अच्छा तरीका है। विचार से सम्बंधित सम्मेलन भी एक उत्कृष्ट जरिया हो सकता हैं। यदि



सवर्णों को इस बिहार के मांझी की चेतावनी- 15% वाला देश जला सकता है तो 85% वाला हाथ में दही लेकर नहीं बैठा

कल तक सवर्ण समाज के लिए 10 फीसदी आरक्षण की बात करने वाले बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने सवर्ण समाज के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। चेतावनी भरे लहजे में मांझी ने कहा कि अगर 15 प्रतिशत वाला देश जला सकता है तो 85 प्रतिशत वाला हाथ में दही लेकर नहीं बैठा है। इसके साथ ही मां



मेजर ध्यानचंद: हॉकी के महान खिलाड़ी

लगभग चार दशकों से आज -29 अगस्त – देश भर में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि यह तिथि महान भारतीय खिलाड़ी – हॉकी लीजेंड मेजर ध्यान चंद की जयंती है। क्रिकेट में ब्रैडमैन की तरह, अपने क्षेत्र में ध्यान चंद की प्



श्रेष्ठतम सोच

श्रेष्ठतम सोच क्या है? यह आपके जीवन पर क्या प्रभाव डालती है? नीतिगत निर्णय में यह क्या रोल प्ले करती है? आदि ऐसे सोच/विचार से सम्बंधित सवाल आपक



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