सत अभिशप्त

धर्म धर्म का उफान उठा है, मानव धर्म कोई ना निभाएं। चील, कव्वे, गिध, गधा, कुत्तों का नाम लेकर एक इंसान दूजे को कोसे, पर खुद के अंदर झांकने का इरादा ना पाए। बेटी पिता को बिठा साइकिल पर मीलों सफर कर, अपने गांव घर ले आए। पढ़ें लिखे लोगों के बीच भूख से व्याकुल हथिनी, खानें के नाम पर धोखा खाएं। कदमों के छ



न छेड़ प्रकृति को।

न छेड़ प्रकृति को।गर्मी से झल्लाउ, ठंडी से घबराऊँ।डर वर्षा की बूँदों से छिप जाऊ।गिरते पतझड़ के पत्तो से शरमाऊं। बहे बयार तूफानी गति से आँखे भी अंधी हो जाए। जितना प्यार करु प्रकृति से, उतना ही थर्राऊ।कर प्रकृति का विनाश, महामारी को फैलाया।जब-जब आई महामारी से, हर मानव हरि-हरि चिल्लाया।न छेड़ प्रकृति को व



आना ही है।

त्रासदी और मौत बिना रास्ते और पते के ही अपने मुक़ाम तक पहुँच जाती है। पानी, आँग, हवा इनके साथी।मानव मथुरा जाये चाहे काशी।<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_200508_053321_893.sdoc-->



पत्रकारिता का चतुर्थ स्तंभ

स्वतंत्रता मिलने के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। प्रकारांतर में अखबारों की भूमिका लोकतंत्र के प्रहरी की हो गई और इसे कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका के बाद लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाने लगा। कालांतर में ऐसी स्थितियाँ बनीं कि खोजी खबरें अब होती



मानव की मुट्ठी

छीटा से मुट्टी-मुठ्ठी भर दाना जोते खेत मे फेको दाना खड़ा गिरे, तिरक्षा गिरे, पेड़ सीधा ही खड़ा होगा। यह खेत की भुरभुरी मिट्टी की ताकत। फिर यह मानव जीवन मे टेड़ा पन कहाँ से पनपता जा रहा है। सबकुछ है तो मानव की मुठ्ठी से। फिर मानव एक दूसरे को नीचा दिखाने में क्यो अड़ता जा रहा है। अपने, अपने को ही नही समझ



मैं......... क्यों ?

मैं......... क्यों ?हम सबमें कहीं सशक्त है ‘मैं’,कहीं छिपी है, तो कहीं विकराल है। मूल्यों और भावनाओं को तोड़ती ,असंतुष्ट , स्वार्थी और संवेदनहीन बनाती ‘मैं ‘रिश्तों में फैलती, संक्रमण की तरह ,अहसासों को लगती दीमक की तरह , मय में अंधा, मर्यादाओं को लाँघ रहा है। खोकर इ



सुर संगीत।

सुर संगीतमार काट कर धुन बनाया मानव ने।जिसकी धुन में नाचे अबला नारी।कर सृंगार पहन साड़ी धुन पर नर नाचे।मार मृग की खाल उतार मृदंग बनाया।काट बॉस कर छेद अनेक बासुरी बनाया।घर छोड़ राधा बृज कानन में रास रचाई।कर छेद खाल में हारमोनियम बनाई।बजे जब नागिन लहरा तब हिले कमरिया।सुखा लौकी को मिला बसुुरी बीन बनाया।लै



मानव महा प्रयाण

मापनी- 221 2121 1221 212 (ताराजराजभासलगाराजभालगा) मिश्रितगीता क़ुरान प्रेम ज़रा जान लीजिएlमानव महा प्रयाण विधा ज्ञान लीजिएllदुनियाँ अजीब मित्र मकड़ जाल में फँसी,माया महल विशाल सुधी ठान लीजिएlधरती वियोग अम्बरविधना विचार है,नदियाँ मिले समुंदर स्वर मान लीजिएlमन मापनी विचित्र सखे धर्म वीरताकायर विचार धर



युगो-युगो तक

युगो-युगो तक टूट कर गिर जाने सेउम्र कम नहीं हो जाती,आसमान मे चमकोगे तारो की तरह।आकार के छोटा बड़ा हो जाने सेकोई भूल नहीं पाता,ईद-बकरीद,पूर्णिमा, करवाचौथ मे चाँद पूजा जाता।एक रंग मे ऊग कर,उसी रंग मे डूबजाने से औकाद कम नहीं होती।बन आंखो की रोशनी सारेजहाँकी, छठ पर्व मे सम्मानित किया जाता।सूख कर,धूल-बनकर



मानव जीवन की सार्थकता

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *श्री राधे कृपा हि सर्वस्वम* 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 *जय श्रीमन्नारायण*🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚 *जीवन रहस्य*🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 यह जीवन परमपिता परमेश्वर ने कृपा करके हमें प्रदान किया जिसे पाने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं जितने भी सजीव शरीर हैं उनमें मानव शरीर की महत्ता सबसे अधिक



व्यक्ति की अधिक पाने की लालसा

*🌹श्री राधे कृपा ही सर्वस्वम🌷* *जय श्रीमन्नारायण* आज समाज की दयनीय स्थिति जीवन में अधिक पाने की लालसा का खत्म ना होना जीवन को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है की अंततोगत्वा कोई भी साथ में चलना पसंद नहीं करता दोष दूसरों को देते हैं और अपनी तरफ कभी ध्यान नहीं देते एक दृष्टांत याद आ रहा है एक राजा था



मानव और उसकी सोच

मानव और उसकी सोच यात्रा के समान ही चलती है जिस तरह मानव धन कमाने हेतु विचरन करते रहता है ठीक उसी तरह यात्रा करने के साथ उसकी सोच भी विचरन को विवश रहता है जिस मनःसथिती से वह विचरन कर रहा होता है मानो हर पल वह बेचैन मन से चला करता है कया होगा कैसे होगा यह सब सोचते ही विचलित मन से यात्रा पर चलता रहना ह



मानव मन की बात ही क्या?

मानव मन की बात ही क्या, पता नहीं कब कौन सी बात उसके मन को भा जाए और कब कौन की बात उसके दिल में घर कर जाए, कहां नहीं जा सकता। कब वह आकाश की ऊंचाइयों को छूने की कल्पना करने लगे और कब वह धड़ाम से जमीन पर आ गिरे। आज तक कोई भी मानव मन की थाह तो क्या, उसके एक अंश को भी नहीं जान पाया। आपका प्रिय आपकी कौन सी



नीता शेट्टी का सोनी सब के शो तेनाली रामा में एंट्री | आई डब्लयू एम बज

कॉन्टिलो द्वारा निर्मित लोकप्रिय सोनी सब शो तेनाली रामा में जल्द ही एक जेनरेशन लीप आएगा।आई डब्ल्यू एम बज.कॉम ने शो में कृष्ण भारद्वाज द्वारा तेनाली के साथ-साथ उनके बेटे भास्कर की भूमिकाओं के बारे में विशेष रूप से बताया है। हमने शो में मानव गोहिल के निकलने के बाद अभिनेता श



मानवता?

अभी कल की ही बात है, मैं गाड़ी पार्क करके निकला ही था बाहर कि एक महिला तुरंत मेरे पास आयी और अंग्रेजी में कुछ फुसफुसाई। मैं सकपका गया, शुरू के 5 -7 क्षण तो मैं समझ ही नहीं पाया कि इन्हे समस्या क्या है। फिर पता चला कि वो यहाँ मुझसे पहले गाड़ी खड़ी करने वाली थी और मैंने उसकी जगह अपनी गाड़ी लगा दी। अंग्रेज



रिश्तों की



छोटी सरदारनी एक अभिनेता के रूप में मेरे लिए काफी बड़ा अवसर है:हितेश भारद्वाज | आई डब्लयू एम बज

हितेश भारद्वाज जो कलर्स के सीरियल छोटी सरदारनी में मानव का किरदार निभा रहे है वो अपने इस किरदार को अपने एक्टिंग कैरियर का सबसे बड़ा अवसर मानते है।शो छोटी सरदारनी जिसमें अभी मानव और मेहर (निमृत कौर) की क्यूट सी लव स्टोरी दिखाई जा रही है उसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा



एचजीएच को कैसे बढ़ाये और उसके लाभ, हानि

ग्रोथ हार्मोन यानि एचजीएच एक छोटा प्रोटीन है जो पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है और रक्तप्रवाह में स्रावित होता है। जीएच उत्पादन मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस और आंतों के मार्ग और अग्न्याशय में उत्पादित हार्मोन के एक जटिल समूह द्वारा नियंत्रित किया जाता है।



वर्दी

वर्दी विश्वास मानव मे नही उसकी वर्दी मे होता हैं। कुर्सी का कलर एक हो सकता हैं पर वर्दी का नहीं। कुछ बुद्धजीवियों ने यह तय किया की इस कुर्सी के लिए इस कलर की वर्दी जमेगी। जवान, वकील, डॉक्टर, मास्टर, जज, राजा, नेता, किसान सब की एक वर्दी को उनकी योग्यता के अनुसार बनाया लेकिन आज वह वर्दी भी मायने नहीं



दीनी सियासत का तोड़ क्या है ?श्रीलंका के ताजा बम धमाके

दीनी सियासत का तोड़ क्या है ? श्रीलंका में ताजा बम धमाके डॉ शोभा भारद्वाज दीनी आधार पर की जाने वाली राजनीति की काट दिखाई नहीं देती है ? हर तर्क पर मौलाना अपनेसमाज से प्रश्न करते हैं क्या तुम इस्लाम के दुश्मन हो , दीन के विरुद्ध हो ? याधमकियाँ श्री लंका में ईस्टर के दिन चर्च में इबादत करने आये क्रिश



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