poetry



मुर्दो की चौपाल

एक बार यूहीं शमशान के पास से निकल रहा था गौर से देखा तो वहाँ मुर्दो का चौपाल चल रहा था जो कल तक एक दूसरे को काटने के लिए बने थे कसाईआज ऐसे बैठे थे जैसे हो भाई भाई उनकी चर्चा का विषय था ऑक्सीजन की कमी इस पर बात करते हुए सभी के आँखों में थी नमी जात पात रंग वर्ण किसी का न भेद थाबस सभी को मात्र ऑक्सीजन



अभिलाष

जीवन के मधु प्यास हमारे, छिपे किधर प्रभु पास हमारे?सब कहते तुम व्याप्त मही हो,पर मुझको क्यों प्राप्त नहीं हो?नाना शोध करता रहता हूँ, फिर भी विस्मय में रहता हूँ,इस जीवन को तुम धरते हो, इस सृष्टि को तुम रचते हो।कहते कण कण में बसते हो,फिर क्यों मन बुद्धि हरते हो ?सक्त हुआ मन निरासक्त पे,अभिव



बैरी चाँद

मोरी अटरिया पे ठहरा ये “बैरी चाँद”देखो कैसे मोहे चिढायेदूर बैठा भी देख सके है मोरे पिया कोमोहे उनकी एक झलक भी न दिखाए .. कभी जो देखूं पूरा चाँद, याद आती है वो रातजब संग देख रहा था ये बैरी, हम दोनों को टकटकी लगाये … बिखरी थी चांदनी पुरे घर में, रति की किरण पड़ रही थी तन मन मेंऔर खोये थे हम दोनो, घर क



इंतज़ार

लहरें होकर अपने सागर से आज़ादतेज़ दौड़ती हुई समुद्र तट को आती हैं ,नहीं देखती जब सागर को पीछे आतातो घबरा कर सागर को लौट जाती हैं ,कुछ ऐसा था मेरा प्यारखुद से ज्यादा था उसपे विश्वास,के मुझसे परे, जहाँ कही भी वो जायेगाफिर लौट कर मुझ तक ही आएगा ,इंतजार कैसा भी हो सिर्फसब्र और आस का दामन थामे ही कट पाता है



बंदिशें

"इस तन पर सजती दो आँखेंबोलो किस से ज्यादा प्रेम करोगे,काटना चाहो अपना एक हाथतो बोलो किस हाथ को चुनोगे "कुछ ऐसा ही होता है बेटी का जीवनसब कहते उसे पराया धनबचपन से ही सीखा दिए जाते हैंबंदिश में रहने के सारे फ़नएक कोख एक कुटुंब में जन्मेंफिर भी क्यों ये बेगानापन ?कुछ ऐसी थी उसकी कहानीजो थी महलों की रानी



ताबीर

शीर्षक :- ताबीरमहज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होतीज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है ..बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती हैकभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है …नहीं चलता है किसी का बस इस परये सिर्फ अपनी धुन में रहा करती है ..न इतराने देगी तुम्हें ये, अपनी शख्सियत



अरमान

अरमान जो सो गए थे , वो फिर सेजाग उठे हैंजैसे अमावस की रात तो है , परतारे जगमगा उठे हैं…बहुत चाहा कि इनसे नज़रें फेर लूँपर उनका क्या करूँ,जो खुद- ब – खुद मेरे दामन में आ सजे हैं ….नामुमकिन तो नहीं पर अपनी किस्मत पेमुझे शुभा सा है,कही ऐसा तो नहीं , किसी और के ख़तमेरे पते पे आने लगे हैं …जी चाहता है फिर



DTC bus

पुर्जों से बना मैं यांत्रिकी का यश था। दंगाइयों ने जला दियाहाँ मैं DTC बस था। वातानुकूलित लाल थासमान्य रंग था हरियाली। देखो ना रंग धुल गयापर गया कोयले सी काली। धर्म निरपेक्ष रहा मैंकरने दी सबको सवारी। फिर क्यों मुझे फुंक दियाआखिर कया गलती थी हमारी। खड़ा हुआ जब भी कोई मुद्द



Hindi poetry on childhood life - अजूबी  बचपन ; अर्चना की रचना

बचपन की यादों आधारित हिंदी कविता अजूबी बचपन आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था,उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता हैमोगली जो जंगल में बघ



Hindi Inspirational poetry on life - मृत  टहनियाँ ; अर्चना की रचना

जीवन पर प्रेरक हिंदी कविता मृत टहनियाँवो टहनियाँ जो हरे भरे पेड़ोंसे लगे हो कर भीसूखी रह जाती है जिनपे न बौर आती है न पात आती है आज उन मृत टहनियों को उस पेड़ सेअलग कर दिया मैंने… हरे पेड़ से लिपटे हो कर भी वो सूखे जा रही थी और इसी कुंठा में उस पेड़ को ही कीट बन खाए जा रही



Hindi poetry on women empowerment - आज की नारी ; अर्चना की रचना

महिला सशक्तिकरण पर हिंदी कविता आज की नारी मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थानन मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें आयी हो चाहे हज़ार फिर भी कोई मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाये तो अच्छा लगता है



Hindi poetry on patriotism and love - शूरवीर ; अर्चना की रचना

देशभक्ति प्रेम पर हिंदी कविता शूरवीर आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबरदिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा कर देखा तो उनको भेजा आखिरी मेसेज अब तक unread था न ही पहले के मेसेज पर blue tick था ऑनला



Hindi poetry on love - तुमको लिखा करूंगी ; अर्चना की रचना

Hindi poetry on love - तुमको लिखा करूंगी > अर्चना की रचना अब से मैं प्यार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो शामें मेरी ,जो तुम पर उधार हैं , उन पर ख्वाब लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो गलियाँ जिन पर तेरेवापस आने क



इलाहाबाद

इलाहाबाद अपना घर, गाँव,और शहरया यूँ कहियेअपनी छोटी सी इक दुनिया।इसके बारे में कुछ कहना-लिखना, जैसे आसमान में तारे गिननाया जलते हुए तवे परउंगलियों से अपनी ही कहानी लिखना है।सैकड़ों ख्वाब, हज़ारों किताब और अनगिनत रिश्तों में बीतती जिंदगी का नाम है इलाहाबाद। एक ऐसी जगहजहाँ हर पल, हर लम्हाबनती-बिगड़ती ह



Hindi poetry on love and betrayal - मलाल ; अर्चना की रचना

प्रेम और विश्वासघात पर हिंदी कविता मलाल मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों की नज़र से नहींखुद अपनी नज़र से परखा था तुम्हें मुझे लगा तेरे मेरा संग कमा



Inspirational Hindi Poetry on life - मेरे दर्द > अर्चना की रचना

प्रेरक हिंदी कविता मेरे दर्द मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँतरसे और बरसेइन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँमेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर इसे रोने क्यों दूँमेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों द



Hindi poetry on holy festival Ramadan - एक ऐसी ईद ; अर्चना की रचना

रमज़ान के मौके पर हिंदी कविता एक ऐसी ईद ( कोरोना में त्यौहार )एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई जब न मंदिरों में घंटे बजे न मस्जिदों में चहल कदमी हुईबाँध रखा था हमने जिनको अपने सोच की चार दीवारों में अब समझा तो जाना हर तरफ उसके ही नूर से दुनिय



रुख़्सत

ये जो लोग मेरी मौत पर आजचर्चा फरमा रहे हैंऊपर से अफ़सोस जदा हैंपर अन्दर से सिर्फ एक रस्मनिभा रहे हैंमैं क्यों मरा कैसे मराक्या रहा कारन मरने कापूछ पूछ के बेवजह की फिक्रजता रहे हैंमैं अभी जिंदा हो जाऊँतो कितने मेरे साथ बैठेंगेवो जो मेरे र



ताज महल

नाकाम मोहब्बत की निशानीताज महल ज़रूरी हैजो लोगो को ये बतलाये केमोहब्बत का कीमती होना नहींबल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी हैदे कर संगमरमर की कब्रगाहकोई दुनिया को ये जतला गयाके मरने के बाद भीमोहब्बत का सांस लेते रहना ज़रूरी हैवो लोग और थे शायद, जोतैरना न आता हो तो भीदरि



प्रेम

प्रेम, जिसमें मैं ही मैं होहम न होडूब गए हो इतने केउबरने का साहस न होवो प्रेम नहीं एक आदत हैउसकीजो एक दिन छूट जाएगीफिर से जीने की कोई वजहतो मिल जाएगीजब तू उस घेरे के बाहरनिहारेगातब ही तेरा आत्म सम्मानतुझे फिर से पुकारेगातू झलांग लगा पकड़ लेनाउसकी कलाई कोउसकी आदत के चलतेतूने नहीं सोचा खुद कीभलाई कोतब



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