poetry



Archana Ki Rachna: Preview "उमीदों का खेल"

क्या ज़्यादा बोझिल है जब कोई पास न हो या कोई पास हो के भीपास न हो ?कोई दिल को समझा लेता है क्योंकि,उसका कोई अपनाहै ही नहींपर कोई ये भुलाये कैसेजब उसका कोई अपनासाथ हो के भी साथ न होजहाँ चारो ओर चेहरोंकी भीड़ हो अपनापन ओढ़ेअपनी ज़रूरत पर सब दिखेपर गौर करना, जब तुमने पुकारातो



Archana Ki Rachna: Preview "गाडी के दो पहिए"

मैं स्त्री हूँ , और सबकासम्मान रखना जानती हूँ कहना तो नहीं चाहतीपर फिर भी कहना चाहती हूँ किसी को ठेस लगे इस कविता सेतो पहले ही माफ़ी चाहती हूँ सवाल पूछा है और आपसेजवाब चाहती हूँक्या कोई पुरुष, पुरुष होने का सहीअर्थ समझ पाया हैया वो शारीरिक क्षमता को हीअपनी पुरुषता समझ



Archana Ki Rachna: Preview " वो पुराना इश्क़ "

वो इश्क अब कहाँ मिलता है जो पहले हुआ करता था कोई मिले न मिलेउससे रूह का रिश्ताहुआ करता थाआज तो एक दँजाहीसी सी है,जब तक तू मेरी तब तक मैं तेराशर्तों पे चलने की रिवायतसी है ,मौसम भी करवट लेने से पहलेकुछ इशारा देता हैपर वो यूं बदला जैसे वो कभीहमारा न हुआ करता थामोहब्बत में



Archana Ki Rachna: Preview "तेरा तलबगार "

जाओ अब तुम्हारा इंतज़ार नहीं करूंगीके अब खुद को मायूस बार बार नहीं करूंगीबहुत घुमाया तुमने हमें अपनी मतलबपरस्ती मेंके अब ऐसे खुदगर्ज़ से कोई सरोकार नहीं रखूंगीरोज़ जीते रहे तुम्हारे झूठे वादों कोके अब मर के भी तुम्हारा ऐतबार नहीं करूंगीतरसते रहे तुझसे एक लफ्ज़ " मोहब्बत "



Archana Ki Rachna: Preview "किराये का मकान "

बात उन दिनों की है जब बचपन में घरोंदा बनाते थे उसे खूब प्यार से सजाते थे कही ढेर न हो जायेआंधी और तूफानों में उसके आगे पक्की दीवारबनाते थेवख्त गुज़रा पर खेल वहीअब भी ज़ारी हैबचपन में बनाया घरोंदाआज भी ज़ेहन पे हावी हैघर से निकला हूँकुछ कमाने के लिएथोड़ा जमा कर कुछ ईंटेंउस बचप



Archana Ki Rachna: Preview "रुक्मणि की व्यथा "

श्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन मीरा ही कहलाई न राधा सी तुझको भायी श्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन रहती कोई कसकमन मेंजो मैं सोचती सिर्फअपनी भलाईश्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईसहने को और भीगम हैंपर कोई न लेना पीरपरायीश्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन कोई खबर न कोईठोर ठिकानाबहुत



Archana Ki Rachna: Preview "सपने "

सपने हमें न जानेक्या क्या दिखा जाते हैं हमें नींदों में न जानेकैसे कैसे अनुभव करा जाते हैंकभी कोई सपना यादरह जाता है अक्सरकभी लगता है ये जोअभी हुआ वो देखा साहै कही परसिर्फ एक धुंधली तस्वीरसे नज़र आते हैंसपने हमें न जानेक्या क्या दिखा जाते हैंकुछ सपने सजीलेऔर विरले भी होते



जिस घर मात पिता खुश रहते,'लावणी छन्द'

प्रतिमाओं का पूजन करने,हम मंदिर में जाते हैं।जिस घर मात-पिता खुश रहते,उस घर ईश्वर आते हैं।असर दुआ में इतना इनकी,बाधाएँ टल जाती है।कदमों में खुशियाँ दुनिया की सारी चलकर आती है।पालन करने स्वयं विधाता घर में ही बस जाते हैं।जिस घर मात-पिता खुश रहते,उस घर ईश्वर आते हैं।।इस जीवन में कर्ज कभी भी चुका नहीं



Archana Ki Rachna: Preview " मेरी ज़िन्दगी का रावण "

अपनी ज़िन्दगी के रावणअब मुझे जलाने हैंमान मर्यादा लोक लाजके बंधन अब मुझेभुलाने हैंमैं प्यारी और दुलारी थीजब तक अपनीउपेक्षा सेहती रहीतुम्हारे बेटा बेटी के दुर्भाव मेंमैं अपने अधिकार छोड़ती रहीतुम्हारी इस मानसिक सोचसे मुखौटे अब हटाने हैंअपनी ज़िन्दगी के रावणअब मुझे जलाने हैंतु



"मैं समंदर हूँ "

मैं समंदर हूँ ऊपर से हाहाकार पर भीतर अपनी मौज़ों में मस्त हूँ मैं समंदर हूँ दूर से देखोगे तो मुझमें उतर चढ़ाव पाओगे पर अंदर से मुझे शांत पाओगे मैं निरंतर बहते रहने में व्यस्त हूँ मैं समंदर हूँ ऐसा कुछ नहीं जो मैंने भीतर छुपा रखा होजो मुझमे समाया उसे डूबा रखा हो हर बुराई बहार निकाल देने में अभ्यस्त हू



Archana Ki Rachna: Preview " ज़िन्दगी का उपकार "

अपने कल की चिंता मेंमैं आज को जीना भूल गयाज़िन्दगी बहुत खूबसूरत हैमैं उसको जीना भूल गयाखूब गवाया मैंने चिंता करकेजो मुझे नहीं मिला उसका गम कर केअपने कल की चिंता मेंमैं अपनी चिंता भूल गयाज़िन्दगी बहुत खूबसूरत हैमैं उसको जीना भूल गयाजब तक मैं आज़ाद बच्चा थामुझे तेरी परवाह



Archana Ki Rachna: Preview "" चिकने घड़े" "

" चिकने घड़े"कुछ भी कह लोकुछ भी कर लोसब तुम पर से जाये फिसलक्योंकि तुम हो चिकने घड़ेबेशर्म बेहया और कहने कोहो रुतबे में बड़ेउफ्फ ये चिकने घड़ेबस दूसरों का ऐब ही देखता तुमकोअपनी खामियां न दिखती तुमकोपता नहीं कैसे आईने के सामने होपाते हो खड़ेक्योंकि तुम हो चिकने घड़ेदूसरों का



Archana Ki Rachna: Preview "आदत"

आदतन मोहब्बत नहीं हुई थी मुझकोआदतन उसका यूँ टकरा जाना याद आता रहाआदतन बेखौफ बढ़ता रहा मैं उसकी ओरआदतन वो मिलने का दस्तूर निभाता रहाआदतन मैं रेत पर घर बनाता रहाआदतन वो मेरा सब्र परखता रहाआदतन मैं ख्वाब बुनता रहाआदतन वो उनसे नज़रें चुराता र



Archana Ki Rachna: Preview "मैं हूँ नीर "

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीरमैं सुनाने को अपनी मनोवेदनाहूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीरजब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से ,मैं थी धवल, मैं थी निश्चलमुझे माना तुमने अति पवित्रमैं खलखल बहती जा रही थीतुम लोगों के पापों को धोती जा रही थीपर तुमने मेरा सम्मान न बनाये रक्खाऔर मुझे



Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "

इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब



Archana Ki Rachna: Preview "एक छोटी सी घटना "

जब भी तुम्हें लगे की तुम्हारी परेशानियों का कोई अंत नहींमेरा जीवन भी क्या जीना है जिसमे किसी का संग नहींतो आओ सुनाऊँ तुमको एक छोटी सी घटनाजो नहीं है मेरी कल्पनाउसे सुन तुम अपने जीवन पर कर लेना पुनर्विचारएक दिन मैं मायूस सी चली जा रही थीखाली सड़को पर अपनी नाकामयाबियों क



मैं हारूँगा नहीं

थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँमैं निरंतर चलता रहूँगाआगे बढ़ता रहूँगाउदास हूँ ,मायूस हूँपर मुझे जितना भी आज़मा लो ,मैं टूटूँगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा,पर अपनी तक़दीर को, तक़दीर केहवाले सौंप , हाथ बाँधबैठूंगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा ,अपनी तक़दीर को कोसूंगा



मेरा परिचय, मेरी कलम

मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँके शब्दों में छुपे एहसास कोकागज़ पे उतार पाऊँऔर मरने के बाद भी अपनीकविता से पहचाना जाऊँमुझे शौक नहीं मशहूर होने काबस इतनी कोशिश है केवो लिखूं जो अपने चाहने वालोंको बेख़ौफ़ सुना पाऊँये सच है के मेरे हालातोंने मुझे कविता करना सीखा दियारहा तन्हा



तुम्हें माफ़ किया मैंने

जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेबस इतना सुकून हैजैसा तुमने कियावैसा नहीं किया मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेहाँ खुद से प्यार करती थीमैं ज़रूरपर जितना तुमसे कियाउस से ज़्यादा नहींतुम्हारी हर उलझनों कोअपना लिया था मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेतुम्हारी लाचारियाँ मज़बूरियाँसब स्वीकार थी मुझकोसिर्फ उस रिश्ते



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