क्या है भगवान की कला ?? आचार्य अर्जुन तिवारी

04 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (176 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या है भगवान की कला ?? आचार्य अर्जुन तिवारी

*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार कलाओं का विस्तार रहता है | पाँच कला आकाश में पाई जाती हैं तो सारे पशु - पक्षी एवं वृक्षों में छ: कलायें होती हैं | एक से लेकर सात तक की कलायें मनुष्यों में पाई जाती हैं आठ के ऊपर कलाओं से युक्त प्राणी को महापुरुष - "अवतार" की संज्ञा दे दी जाती है | भगवान परशुराम आठ कलाओं से युक्त थे तो मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम बारह कलाओं के साथ अवतीर्ण हुए क्योंकि वे सूर्यवंश में अवतीर्ण हुए थे और सूर्य की बारह कलायें होती हैं | कृष्णावतार एकमात्र अवतार है जो सोलह कलाओं से युक्त था इसीलिए लीलाविहारी , लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण को पूर्णावतार कहा जाता है | चन्द्रमा में सोलह कलायें होती हैं और चन्द्रवंश में अवतरित भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से परिपूर्ण थे | जिस प्रकार चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ नित्य अठखेलियाँ करता है उसी प्रकार सोलह कलाओं से युक्त भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी भी नित्य नयी लीलायें किया करते थे | जहाँ भगवान श्री कृष्ण का अवतार सोलह कलाओं से परिपूर्ण था वहीं उनकों चौसठ कलाओं का ज्ञान भी था | कंस का वध करने के बाद सांदीपनि गुरु के यहाँ चौंसठ दिन में चौंसठ कलाओं को सीखने वाले सृष्टि के एकमात्र महापुरुष थे "भगवान श्री कृष्ण" | कुल चौंसठ कलायें होती हैं | चौंसठ कलाओं से परिपूर्ण हैं पारब्रह्म परमेश्वर जिन्हें परमात्मा कहा गया है |* *आज इस तथ्य पर विचार करने की आवश्यकता है कि कला क्या है ? वाचस्पत्यम् में कहा गया है :- "कलयति कलते वा कर्तरि अच् , कल्यते ज्ञायते कर्मणि अच् वा" अर्थात :- जो किसी के कर्म व स्थिति को द्योतित करती है वह कला है | एक प्रश्न और उठता है कि जब पारब्रह्म में चौंसठ कलायें होती हैं तो भगवान श्रीकृष्ण सोलह कलाओं से युक्त होने पर भी पारब्रह्म क्यों कहे गये ? मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऋग्वेद का सन्दर्भ लेते हुए बताना चाहूँगा कि परमात्मा चार भागों में विभक्त है जिसका तीन पाद ऊर्ध्वलोकों में और एक पाद (चतुर्थांश) भूलोक (विश्व ब्रह्माण्ड) में व्याप्त है | "त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुष: पादोस्येहाभवत्पुन:" | इसीलिए भूलोक में सोलह कलायें ही विद्यमान हैं और इन्हें ही "पूर्ण कला" कहा जाता है | यहाँ षोडश कला पूर्णता का द्योतक है | जैसा कि बताया है कि ब्रह्म की चौंसठ कलायें होती हैं परंतु ब्रह्म के तीन चरण उर्ध्व में विद्यमान हैं और एक ही चरण इस ब्रह्माण्ड में व्याप्त है तो यदि चौंसठ को चार से विभाजित किया जाता है तो कुल सोलह कलायें ही प्राप्त होती हैं इस प्रकार पूर्णता की द्योतक सोलह कलाओं के साथ पूर्णावतार लिया श्यामसुंदर कन्हैया ने |* *भगवान की सोलह कलायें भगवान की पूर्णता का परिचायक है | ऐसे पूर्ण परमात्मा के श्री चरणों में कोटिश: प्रणाम*

अगला लेख: काम प्रवृत्ति :----- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 सितम्बर 2018
अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला व्रत हरितालिका तीज 12 सितंबर को है। भाद्र शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को तीज व्रत रखा जाता है, जिसमें महिलाएं पतियों के सुख- सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। आचार्य राजनाथ झा बताते हैं कि इस बार सुबह से ही यह
07 सितम्बर 2018
29 अगस्त 2018
*सनातन काल से मनुष्य धर्मग्रंथों का निर्देश मान करके ईश्वर को प्राप्त करने का उद्योग करता रहा है | भिन्न - भिन्न मार्गों से भगवत्प्राप्ति का यतन किया जाता रहा है | इन्हीं में एक यत्न है माला द्वारा मंत्रजप | कुछ लोग यह पूंछते रहते हैं कि धर्मग्रंथों में दिये गये निर्देशानुसार यदि निश्चित संख्या में
29 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*मानव शरीर को गोस्वामी तुलसीदास जी ने साधना का धाम बताते हुए लिखा है :--- "साधन धाम मोक्ष कर द्वारा ! पाइ न जेहि परलोक संवारा !! अर्थात :- चौरासी लाख योनियों में मानव योनि ही एकमात्र ऐसी योनि है जिसे पाकर जीव लोक - परलोक दोनों ही सुधार सकता है | यहाँ तुलसी बाबा ने जो साधन लिखा है वह साधन आखिर क्या ह
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
01 सितम्बर 2018
पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि को हुआ था. उस समय चंद्रमा वृष राशि यानी रोहिणी न
01 सितम्बर 2018
29 अगस्त 2018
*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियां बताई गयी हैं जिनमें सबका सिरमौर बनी मानवयोनि | वैसे तो मनुष्य का जन्म ही एक जिज्ञासा है इसके अतिरिक्त मनुष्य का जन्म जीवनचक्र से मुक्ति पाने का उपाय जानने के लिए होता अर्थात यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का जन्म जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है , परंतु मनुष्य जिज्ञास
29 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
बेटा दुनिया से जा चुका था लेकिन मां मानने को तैयार नहीं। वो बेटे के शव को ऑटो में लादकर इंदौर से उज्जैन पहुंच गई। रामघाट के समीप सिद्ध आश्रम के पास शिप्रा किनारे शव लेकर बैठने की जिद करने लगी। इस भरोसे में कि महाकाल जिंदा कर देंगे।ऑटो चालक ने होमगार्ड जवान को इसकी जानकारी
03 सितम्बर 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जब से मानवी सृष्टि हुई तब से लेकर आज तक मनुष्य के साथ सुख एवं दुख जुड़े हुए हैं | समय समय पर इस विषय पर चर्चायें भी होती रही हैं कि सुखी कौन ? और दुखी कौन है ?? इस पर अनेक विद्वानों ने अपने मत दिये हैं | लोककवि घाघ (भड्डरी) ने भी अपने अनुभव के आधार पर इस विषय पर लिखा :- "बिन व्याही ब
22 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
एक बेटी इतनी बड़ी हो सकती है की वह आपकी गोद में ना समाये, पर वह इतनी बड़ी कभी नहीं होती की आपके दिल में ना समा सके । एक बेटी, अतीत की खुशनुमा यादें होती है, वर्तमान पलों का आनंद और भविष्य की आशा और उम्मीद होती है । “अज्ञात” एक बेटी को जन्
27 अगस्त 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x