सदाचरण एवं सद्व्यवहार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (52 बार पढ़ा जा चुका है)

सदाचरण एवं सद्व्यवहार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य योनि पाकर प्रत्येक व्यक्ति समाज में सम्मान पाने की इच्छा रखता है | हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसे समाज का हर व्यक्ति सम्मान की दृष्टि से देखे | कुछ व्यक्तियों की सोंच यह भी हो सकती है कि ज्ञानी बनकर या धनी बनकर ही सम्मान प्राप्त किया जा सकता है | यदि इसे ही मानक मान लिया जाय तो लंकाधिराज रावण तो पूज्यनीयों में अग्रगण्य होना चाहिए , जिसके समक्ष देवता भी अपना शीश झुका लिया करते थे | किसी के प्रभाव में आकर या भयवश शीश झुका लेना सम्मान का द्योतक माना जा सकता है ?? शायद यह सत्य नहीं है | मनुष्य के सम्माननीय होने में उसके सदाचरण एवं व्यवहार का महत्वपूर्ण योगदान होता है | सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह सामाजिक , पारिवारिक नियमों का पालन करे | सामने वाले व्यक्ति से ऐसा व्यवहार करे जिससे अपनत्व की भावना जागृत हो | हम जैसा व्यवहार दूसरे के साथ करेंगे, वैसा ही व्यवहार दूसरा भी हमारे साथ करेगा | दूसरे से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा करने से पहले हमें उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए | जीवन रूपी गाड़ी को बिना बाधाओं के चलाते रहने में सद्व्यवहार महती भूमिका निभाता है | व्यवहार तथा आचरण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं | जब तक आचरण शुद्ध नहीं होगा, तब तक व्यक्ति में सद्व्यवहार का गुण विकसित नहीं होगा | सच बोलना, चोरी न करना, किसी को दुख न देना, बड़ों का सम्मान करना तथा नैतिक मूल्यों की रक्षा करना जैसी सारी बातें आचरण की शुचिता में आती हैं |* *आज के समाज में सम्मान तो हर व्यक्ति चाहता है परंतु स्वयं जब किसी का सम्मान करना पड़ता है तो उसे आत्मिक कष्ट प्रतीत होता है | सीधी सी बात है कि हम जो बाँटेंगे वही हमें वापस मिलेगा | मनुष्य का आचरण और उसका व्यवहार ही समाज में उसे स्थापित करने में सहायक सिद्ध होते हैं | आज समाज में धनबली , जनबली एवं बाहुबली ही सम्माननीय कहे जा रहे हैं | परंतु यह भी सत्य है कि लोग उसके सम्मुख तो उसका बहुत सम्मान करते हैं परंतु सामने से हटते ही सारा सम्मान समाप्त हो जाता है | क्योंकि इन कारकों से आप सम्माननीय नहीं बन सकते हैं | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि मनुष्य में सदाचरण के बीज बचपन में ही परिवार व गुरुजनों के द्वारा रोपित किये जाते हैं | जब मनुष्य में सदाचरण रहेगा तो उसका व्यवहार स्वमेव सरल होता जायेगा | माता पिता द्वारा दिए हुए संस्कार बच्चों के जीवन में काम आते हैं , हम जो बच्चों को मार्ग दर्शन देते हैं, वो सब आगे जाकर एक प्रबल समाज का निर्माण करते हैं | बच्चों में सेवा की भावना उत्पन्न करना प्रत्येक माता पिता का क‌र्त्तव्य है | समाज जहां भिन्न भिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय के लोगों का निवास है, वहां बच्चों में सभी धर्मो का आदर सिखाना हमारा नैतिक दायित्व है | हमारे बच्चों के मन में सेवा भाव आना यह प्रदर्शित करता है कि हमारे बच्चे सही मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं | सही गलत की जानकारी देना माता-पिता परिवार व स्कूल की जिम्मेदारी है |* *आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों के सर्वागीण विकास में अपना योगदान दें | बच्चों में सभी आचरण बचपन से ही डालने होंगे। तभी हमारी भावी पीढ़ी संस्कारवान बन सकेगी |*

अगला लेख: काम प्रवृत्ति :----- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*सनातन संस्कृति इतनी मनोहारी है कि समय समय पर आपसी प्रेम सौहार्द्र को बढाने वाले त्यौहार ही इसकी विशिष्टता रही है | शायद ही कोई ऐसा महीना हो जिसमें कि कोई त्यौहार न हो , इन त्यौहारों के माध्यम से समाज , देश एवं परिवार के बिछड़े तथा अपनों से दूर रह रहे कुटुंबियों को एक दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में गुरु का कितना महत्त्व है यह आज किसी से छुपा नहीं है | सनातन काल से गुरुसत्ता ने शिष्यों का परिमार्जन करके उन्हें उच्चकोटि का विद्वान बनाया है | शिष्यों ने भी गुरु परम्परा का निर्वाह करते हुए धर्मध्वजा फहराने का कार्य किया है | इतिहास में अनेकों कथायें मिलती हैं जहाँ परिवार / समाज से उ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास के
03 सितम्बर 2018
29 अगस्त 2018
*इस धराधाम पर मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेक शत्रु एवं मित्र बनाता रहता है , यहाँ समय के साथ मित्र के साथ शत्रुता एवं शत्रु के साथ मित्रता होती है | परंतु मनुष्य के कुछ शत्रु उसके साथ ही पैदा होते हैं और समय के साथ युवा होते रहते हैं | इनमें मनुष्य मुख्य पाँच शत्रु है :- काम क्रोध मद लोभ एवं मोह | ये
29 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x