भगवान विश्वकर्मा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

17 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (84 बार पढ़ा जा चुका है)

भगवान विश्वकर्मा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म इतना वृहद है कि नित्य किसी न किसी पर्व का एक नया दिन होता है | आज भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी को त्याग की प्रतिमूर्ति महर्षि दधीचि का अवतरण दिवस , प्रेम की प्रतिमूर्ति रासरासेश्वरी राधिका जू का अवतरण दिवस होने के साथ आज ही सृष्टि का सृजन एवं निर्माण करने वाले "भगवान विश्वकर्मा का पूजन" (१७ सितम्बर) भी पूरे धूमधाम से देश भर में मनाया जा रहा है | विश्वकर्मा का उल्लेख वेदों से लेकर पुराणों तक देखने को मिलता है | आज तक कई विश्वकर्मा होने की भी पुष्टि होती रही है , तो सर्वप्रथम यह जान लिया जाय कि विश्वकर्मा हैं क्या ??? वेदों में कहा गया है :--- "विशवं कृत्स्नं कर्म व्यापारो वा यस्य सः" अर्थातः जिसकी सम्यक् सृष्टि और कर्म व्यपार है वह विशवकर्मा है | यही विश्वकर्मा प्रभु है, प्रभूत पराक्रम-प्रतिपत्र, विशवरुप विशवात्मा हैं | वैसे तो विश्वकर्मा भगवान के लिए भिन्न - भिन्न मान्यताये देखने को मिलती हैं ! वेदों में इन्हें सूर्य एवं इन्द्र भी कहा गया है , कहीं इन्हें प्रजापति भी कहा गया है परन्तु स्कंद पुराण प्रभात खण्ड के निम्न श्लोक की भांति किंचित पाठ भेद से सभी पुराणों में यह श्लोक मिलता हैः--- बृहस्पते भगिनी भुवना ब्रह्मवादिनी ! प्रभासस्य तस्य भार्या बसूनामष्टमस्य च !! विश्वकर्मा सुतस्तस्यशिल्पकर्ता प्रजापतिः !!! अर्थात :-- महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना जो ब्रह्मविद्या जानने वाली थी वह अष्टम् वसु महर्षि प्रभास की पत्नी बनी और उससे सम्पुर्ण शिल्प विद्या के ज्ञाता प्रजापति विश्वकर्मा का जन्म हुआ | बिना विश्वकर्मा जी के सृष्टि के निर्माण की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती ! इन्द्र का स्वर्ग , रावण की लंका , कृष्ण की द्वारिका , पांडवों के इन्द्रप्रस्थ एवं हस्तिनापुर तथा भगवान जगन्नाथ का मंदिर एवं उनके विग्रह विश्वकर्मा जी की शिल्पकारी के उदाहरण हैं |* *आज पुरे देश में ही नहीं वरन् विश्व में विश्वकर्मा पूजा की धूम है ! परंतु कुछ लोग आज (१७ सितम्बर) को "विश्वकर्मा जयंती" कहने लगते हैं जो कि बिल्कुल उचित नहीं है | विश्वकर्मा पूजा एवं उनकी जयंती में अन्तर है | अधिकतर लोग जानकारी के अभाव में आज को ही भगवान विश्वकर्मा की जयंती कहकर सम्बोधित करते हुए देखे जा सकते हैं | ऐसे सभी बंधुओं से मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" कहना चाहूँगा कि भगवान विशवकर्मा जी की वर्ष मे कई बार पुजा व महोत्सव मनाया जाता है | जैसे :- भाद्रपद शुक्ला प्रतिपदा , अन्नकुट (गोवर्धन पूजा) दिपावली से अगले दिन भगवान विश्वकर्मा जी की पुजा अर्चना (औजार पूजा) , एवं मई दिवस मई में ऋषि अंगिरा जयन्ति होने से विश्वकर्मा-पुजा महोत्सव मनाया जाता है | जब कि इन सभी आयोजनों में से एक भी विश्वकर्मा जी की जयंती नहीं है | विश्वकर्मा जी के अवतरण से सम्बंधित उल्लेख हमें ग्रंथों से प्राप्त होता है कि :-- माघे शुक्ले त्रयोदश्यां दिवापुष्पे पुनर्वसौ ! अष्टा र्विशति में जातो विश्वकर्मा भवनि च !! अर्थात :- धर्मशास्त्रों में माघ शुक्ल त्रयोदशी को विश्वकर्मा जयंती बताया गया है |* *आज भी विश्व का सृजन भगवान विश्वकर्मा जी की कृपा से ही हो रहा है ! हम पर इनकी कृपा सदैव बरसती रहे |*

अगला लेख: नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*ईश्वर ने सृष्टि की सुंदर रचना की, जीवों को उत्पन्न किया | फिर नर-नारी का जोड़ा बनाकर सृष्टि को मैथुनी सृष्टि में परिवर्तित किया | सदैव से पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी समय समय पर उपेक्षा का शिकार होती रही है | और इस समाज को पुरुषप्रधान समाज की संज्ञा दी जाती रही है | जबकि यह न तो सत्य
03 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सकल सृष्टि में ईश्वर ने मनुष्य को सभी अधिकार दे रखे हैंं | जैसी इच्छा हो वैसा कार्य करें यह मनुष्य के हाथ में है | इतना सब कुछ देने के बाद भी परमात्मा ने कुछ अधिकार अपने हाथ में ले रखे हैं | कर्मानुसार भोग करना मनुष्य की मजबूरी है | जिसने जैसा कर्म किया है , जिसके भाग्य में जैसा लिखा है वह उसको भोग
20 सितम्बर 2018
10 सितम्बर 2018
रा
राम राम क्यों कहा जाता है? क्या कभी सोचा है कि बहुत से लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो आपस में एक दूसरे को दो बार ही *“राम राम"* क्यों बोलते हैं ? *एक बार या तीन बार क्यों नही बोलते ?* दो बार *“राम राम"* बोलने के पीछे बड़ा गूढ़ रहस्य है क्योंकि यह आदि काल से ही चला आ रहा है... हिन्दी की शब्दावली मे
10 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास
03 सितम्बर 2018
09 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म में त्रिदेवों (ब्रह्मा , विष्णु एवं महेश) की सर्वोच्चता प्रत्येक देश , काल , परिस्थिति में व्याप्त है | ब्रह्मा जी सृजन करते हैं , श्री हरि विष्णु जी पालनकर्ता हैं तो भगवान रुद्र को संहारक कहा गया है | क्या भगवान शिव संहारक मात्र हैं ?? जी नहीं ! भगवान शिव का चरित्र रहस्स्यों से भर
09 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*सनातन काल से हमारे समाज के सृजन में परिवार के बुजुर्गों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है | हमारे ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ बुजुर्ग सदैव से हमारे मार्गदर्शक रहे हैं चाहे वे शिक्षित रहे हों या अशिक्षित | बुजुर्ग यदि अशिक्षित भी रहे हों तब भी उनके पास अपने जीवन के खट्टे - मीठे इतने अनुभव होते हैं कि वे उन अनुभ
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x