कात्यायनी माता का स्वरूप है प्रत्येक कन्या :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

15 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (144 बार पढ़ा जा चुका है)

कात्यायनी माता का स्वरूप है प्रत्येक कन्या :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक कल्याण किया है | परंतु महामाया के नौ रूप विशेष रूप से पूजनीय हैं क्योंकि इन्हीं नौ रूपों में नारी का सम्पूर्ण जीवन रहस्य छुपा हुआ है | नवरात्र का छठा दिवस जगदम्बा के छठवें स्वरूप माता "कात्यायनी" का पूजन करके मनाया जाता है | मैया कात्यायनी वैसे तो सभी प्रकार के मनोरथों को पूर्ण करने वाली हैं परंतु विशेष रूप से कन्याओं द्वारा मनोवांछित वर (पति) पाने के लिए इनके पूजन का विधान है | श्रीमद्भागवत महापुराण में ब्रज की गोपिकाओं के द्वारा भगवान कन्हैया को पतिरूप में पाने के लिए कात्यायन व्रत के वर्णन की कथा मिलती है | महामाया कात्यायनी के प्राकट्य के विषय में कथा मिलती है कि महर्षि कात्यायन ने आदिशक्ति जगदम्बा की घोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर जगदम्बा ने उन्हें दर्शन दिया | तपस्या करने का कारण पूछने पर महर्षि कात्यायन ने बताया कि वे स्वयं जगदम्बा को पुत्री रूप में पाना चाहते हैं | मनोवांछित वरदान देकर यथा समय जगदम्बा जी महर्षि के घर कन्या रूप में प्रकट हुईं , इसीलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा | विचार काजिए कि महर्षि कात्यायन में इस सृष्टि में नारी जाति के महत्व को जानकरके महामाया से एक कन्या का वरदान माँगा | परंतु आज हम क्या कर रहे हैं |* *आज मनुष्य बहुत प्रेम से नवरात्र में "दुर्गापूजा" का आयोजन करते हैं यह नौ दिन पूर्णरूप से भक्तिमय रहता है | कन्यापूजन करके मनुष्य स्वयं को कृतार्थ मानता है | परंतु जिस प्रकार महर्षि कात्यायन ने कन्या का वरदान माँगा क्या उसी प्रकार की भक्ति हमारी भी है | शायद आज हमारी मानसिकता बदल गयी है | आज के मनुष्य का दोहरा चरित्र देखने को मिलता है | दूसरों की कन्या बुलाकर कन्या पूजन करने वाले स्वयं अपने घर में कन्या नहीं चाहते हैं | आज प्रगतिशील युग में गर्भ की जाँच कराके कन्याओं की गर्भ में ही हत्या करा देने वाले कन्या पूजन करने के लिए मुहल्ले भर में कन्याओं को खोजा करते हैं | विचार कीजिए कि जिस प्रकार आज लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के जन्म का अनुपात कम होता जा रहा है आने वाला भविष्य क्या होगा ?? मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इस दुर्गापूजा के आयोजन करने वालों से पूंछना चाहता हूँ कि जब घर में कन्या सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं तो दुर्गा पूजन करने का क्या अर्थ है | आज समाज इतना विकृत हो गया है कि एक ओर तो दुर्गापूजा मनाया जा रहा है दूसरी ओर पांडालों में सजी भव्य मूर्तियों का दर्शन करने जा रही कन्याओं पर कुछ सिरफिरे अश्लील छींटाकशी करते हुए देखे एवं पकड़े जाते हैं | विचार कीजिए कि ऐसा करने वाले कैसी दुर्गापूजा एवं कन्याओं की पूजा का पर्व मना रहे हैं |* *अपने - अपने घर में कन्या भ्रूण हत्या रोकने पर ही कन्या पूजन का फल मिलना है अन्यथा दिखावा मात्र करने से कुछ नहीं होने वाला है |*

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