फर्क

08 जनवरी 2019   |  जानू नागर   (51 बार पढ़ा जा चुका है)

फर्क

सतयुग मे औरत यमराज से अपने पति को जीत लिया।

त्रेता युग मे औरत पुरुष एक समान थे।

अहिल्या बहाल हुई। पर अंत मे सीता हरी गई।

द्वापर मे औरतों पर उंगली उठने लगी राधा ने प्यार किया, मीरा ने प्रेम किया। रुकमनी ने विवाह किया।
अंत मे द्रोपदी का चीर हरन हुआ ।
कलयुग मे सभी नारी-नारी चिल्ला रहे हैं, नारी को मजबूत करो, बेटी को बचाओ। दूध से जल गए हैं। मट्ठा फूक के पियो। अब अगर आंखे चूक जाए तो समझ ही नहीं पाओगे नारी गई या जीवन जीने वाली नारी (नब्ज़) गईं।
अंत मे अब जज मिले या तलाक मिले भरोसा नहीं बाकी तो जेल हैं रेप मे, अब मांग बढ़ी हैं फासी की।अभी तो धोनी ने नारी के पैर ही पकड़े हैं बहाना हैं सैंडील बांधने का

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