हमारा गणतंत्र :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

26 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (20 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारा गणतंत्र :-- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *आज भारत अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है | आज के ही दिन आजाद भारत में भारत के विद्वानों द्वारा निर्मित संविधान धरातल पर आया | भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था तब भारत के वीर सपूतों ने अपनी जान की बाजी लगाकर अपने प्राण निछावर करके देश को आजादी दिलाई | गणतंत्र का अर्थ होता है जनता का राज्य | जहां जनता के द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि राजा की तरह राज्य करता है | परंतु आज के परिदृश्य में गणतंत्र का अर्थ बदल सा गया है कहने को तो यह जनता का राज है परंतु जनता का क्या हाल है यह कोई नहीं देखना चाहता है | आज के गणतंत्र में भगवान शिव के गण कुछ ज्यादा ही तंत्र को चलाते देखे जा रहे हैं | आज के दिन लगभग सभी भारतवासियों के हृदय में देशभक्ति हिलोरें मारने लगती है | अपने पूर्वजों के बलिदानों को याद करके प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है | आज प्रत्येक हाथ में तिरंगा देखा जा सकता है | तिरंगे के तीन रंगों का अर्थ हम जानें या न जानें परंतु तिरंगा हमारी शान है , उसकी रक्षा के लिए हम अपने प्राण तक देने को तैयार हो जाते हैं | परंतु आज का परिदृश्य बहुत ही चिंतनीय होता जा रहा है | कहने को तो हम आजाद देश के निवासी हैं परंतु विचार कीजिए कि क्या हम आजाद हैं ?? आज हम आजाद हुए भी अपने ही देश में उत्पन्न हुई विकृत मानसिकता के गुलाम ही हैं |* *आज के दिन ही देश को सुचारु रूप से चलाने के लिए हमारे देश के विद्वानों ने दिन रात मेहनत करके अपना संविधान बनाया था | जिससे कि जनता को कोई कष्ट न हो | गणतंत्र जहाँ जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि के ऊपर जनता की सेवा एवं उनकी सुख - सुविधा का ध्यान रखने की नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए | समान अधिकार एवं कानून सभी भारतीयों के लिए बनाया गया | परंतु आज का परिदृश्य बदल सा गया है | समान कानून होने पर भी आज आम आदमी कराह रहा है , और धनबली , जनबली ऐश कर रहे हैं | आज गरीब - असहाय और निर्बल कोई आधार न होने पर जेल की कोठरियों में कराह रहे हैं ! तो अत्याचारी , व्यभिचारी , बलात्कारी , भ्रष्टाचारी अपने धन एवं प्रभुत्व के बल पर देश में खुलेआम घूम रहे हैं | और तो और ऐसे कई लोग तो संसद की शोभा भी बढा रहे हैं | यह कैसा गणतंत्र है ?? देश का संविधान चंद लोगों की चौखट तक ही सीमित होता देखा जा सकता है | जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि के रूप में प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त होता है | ऋग्वेद के अनुसार राजा को दुष्टों को दंड देने का पूरा अधिकार होता है | परंतु आज के भारतीय संविधान में राजा (राष्ट्रपति) किसी को दंड नहीं दे सकता | यद्यपि वह जानता है कि अमुक व्यक्ति व्यभिचारी है परंतु दंड देने का अधिकार उसके पास नहीं हैं |* *आज भापतीय गणतंत्र के अवसर मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" समस्त देशवासियों को शुभकामनायें देते हुए यह कहना चाहूँगा कि अब पुन: आत्ममंथन करने का समय आ गया है कि क्या हम सही मायने में गणतंत्री हैं ??*

अगला लेख: अपमान एवं सम्मान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 जनवरी 2019
*भारतीय मनीषियों ने मानवमात्र के जीवन में उमंग , उल्लास एवं उत्साह का अनवरत संचार बनाये रखने के लिए समय समय पर पर्वों एवं त्यौहारों का सृजन किया है | विभिन्न त्यौहारों के मध्य "मकर संक्रान्ति" के साथ मानव मात्र की अनुभूतियां गहराई से जुड़ी हैं | "मकर संक्रान्ति" सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन का संचार करन
15 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*हमारा देश भारत सामाजिक के साथ - साथ धार्मिक देश भी है | प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को धार्मिक दिखाना भी चाहता है | परंतु एक धार्मिक को किस तरह होना चाहिए इस पर विचार नहीं करना चाहता है | हमारे महापुरुषों ने बताया है कि धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं और उसके चरित्रों को केवल उसके शाब्दिक अर्थों में नहीं ले
22 जनवरी 2019
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *मानव जीवन में कई पड़ाव आते हैं | सम्पूर्ण जीवनकाल कभी एक समान नहीं रहता है | यहाँ यदि मनुष्य की प्रशंसा होती है तो उसकी बुराई भी लोग करते रहते हैं | हालांकि संसार के लगभग सभी धर्म किसी की बुराई करना अनुचित मानते हैं परंतु मनुष्य अपनी आदत से मजबूर होकर ऐसा करता रहता है
24 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*इस संसार में मनुष्य समय-समय पर सुख - दुख , प्रसन्नता एवं कष्ट का अनुभव करता रहता है | संसार में कई प्रकार के कष्टों से मनुष्य घिरा हुआ है परंतु मुख्यतः दो प्रकार के कष्ट होते हैं एक शारीरिक कष्ट और दूसरा मानसिक कष्ट | शारीरिक कष्ट से मनुष्य यदि ग्रसित है तो वह औषधि ले करके अपना कष्ट मिटा सकता है पर
22 जनवरी 2019
13 जनवरी 2019
*सनातन धर्म के नियम व सिद्धांत समस्त मानवजाति के लिए प्रेरणास्रोत होने के साथ ही जीवन को दिव्य बनाने वाले रहे हैं | एक मनुष्य का जीवन पापरहित रहते हुए कैसे दिव्य बन सकता है इन रहस्यों के दर्शन यदि कहीं प्राप्त हो सकता है तो वह है सनातन धर्म | सनातन धर्म ने मनुष्यों को अपने ज्ञान , विद्या व धन का अहं
13 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*इस धराधाम पर मनुष्य का एक दिव्य इतिहास रहा है | मनुष्य के भीतर कई गुण होते हैं इन गुणों में मनुष्य की गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को दिव्य बनाती है | मनुष्य को गंभीर होने के साथ सहनशील भी होना पड़ता है यही गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को महामानव बनाती है | मथुरा में जन्म लेकर गोकुल आने के बाद कंस के
22 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*सनातन धर्म इतना विस्तृत है , उसकी मान्यताएं इतनी विशाल हैं जिन्हें एक साथ समझ पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है | हां यह कहा जा सकता है यदि प्राचीन सनातन संस्कृति को एक ही शब्द में समेटना हो तो वह है यज्ञ | हमारी भारतीय संस्कृति में यज्ञ का बहुत व्यापक अर्थ है | यज्ञ मात्र अग्निहोत्र ना होकर के
22 जनवरी 2019
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *हमारे भारत देश में नित्य प्रति त्यौहार एवं पर्व मनाए जाते हैं | यहाँ कोई ऐसा दिन नहीं है जिस दिन कोई पर्व न हो | वर्ष के बारहों महीने के प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व अवश्य होता है जिसे हम भारतवासी पूर्ण श्रद्धा से मनाते हैं | इसी क्रम में आज माघ मास की कृष्ण पक्ष की च
24 जनवरी 2019
01 फरवरी 2019
आज हम आज़ादी का मजा लेते हुए अपने घरों में बड़े-बड़े मुद्दों को बड़ी आसानी से बहस में उड़ा देते है, लेकिन कभी सोचा है कि जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश को आज़ाद कराया, उनमें से जो जिंदा हैं, वो किस हाल में हैं ?ये हैं झाँसी के रहने वाले श्रीपत जी, 93 साल से भी ज्यादा की उम्र पार कर चुके श्रीप
01 फरवरी 2019
04 फरवरी 2019
पाकिस्तान में लड़कियों के लिए कई कड़े नियम होते हैं। वहां रहने वाले लोगों को इन नियमों को मानना भी होता है, लेकिन कहते हैं ना कि जहां चाह वहां राह। एक ऐसा ही वाक्या पाकिस्तान में घटा है जिसके चलते वहां पर पहली बार कोई हिंदू महिला जज बनी हैं। बता दें सुमन पवन बोदानी नाम की ये महिला पहली महिला सिविल ज
04 फरवरी 2019
22 जनवरी 2019
*भारत एक कृषि प्रधान देश है | यहां समय-समय पर त्यौहार एवं पर्व मनाए जाते रहे हैं | यह सभी पर्व एवं त्योहार कृषि एवं ऋतुओं पर विशेष रूप से आधारित होते थे | इन त्योहारों में परंपरा के साथ साथ आस्था भी जुड़ी होती थी | हमारे त्योहार हमारी संस्कृति का दर्पण होते थे , जो कि समाज में आपसी मेल मिलाप का आधार
22 जनवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x